एशियन गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज के बाद कपिल पोखरिया का अगला निशाना — वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक मेडल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बॉक्सर कपिल पोखरिया ने एशियन गेम्स 2026 में 90 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद साफ कर दिया है कि उनका अगला लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक गेम्स में देश के लिए पदक जीतना है। खटीमा, उत्तराखंड के इस युवा मुक्केबाज़ ने कहा कि आने वाले दो साल उनके करियर के सबसे निर्णायक होंगे।
एशियन गेम्स मेडल — राहत और खुशी दोनों
कपिल पोखरिया ने बताया कि एशियन गेम्स से पहले उन पर मानसिक दबाव काफी ज़्यादा था। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए यह निजी तौर पर काफी बड़ी उपलब्धि है। कॉमनवेल्थ गेम्स में मैं हार गया था और मेडल लाने से चूक गया था। ऐसे में मेरे मन में यह था कि कॉमनवेल्थ में तो मेडल मिस हो गया, लेकिन एशियन गेम्स में हर हाल में देश के लिए मेडल तो लाना ही है। मुझे ब्रॉन्ज मेडल जीतने की बेहद खुशी है।'
उन्होंने स्वीकार किया कि एशियन गेम्स चार साल में एक बार आते हैं, इसलिए इस अवसर को गँवाने का डर उन पर हावी था। मेडल सुनिश्चित होते ही उनका सारा दबाव छंट गया।
सेमीफाइनल हार से सीख
कपिल फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहे और सेमीफाइनल में उज़्बेकिस्तान के बॉक्सर तुरबेक खबीबुल्लाव के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इस हार पर बात करते हुए उन्होंने कहा, 'सेमीफाइनल मैच में वह लड़का मेरे से बेहतर खेला, जिसके कारण मुझे हार का सामना करना पड़ा।' कपिल ने बताया कि मैच के बाद उन्होंने अपने कोच से विस्तृत फीडबैक लिया और अब कैंप में वापस लौटकर अपनी कमज़ोरियों पर काम करेंगे।
अगला लक्ष्य — वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलंपिक
कपिल ने कहा कि अगले साल होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, 'अगले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप है और मेरी कोशिश रहेगी कि यहां देश के लिए मेडल जीतकर ला सकूं।' इसके बाद ओलंपिक क्वालिफिकेशन भी उनके रडार पर है।
उन्होंने ओलंपिक सपने के बारे में कहा, 'हर एथलीट का सपना ओलंपिक में खेलना होता है। मैं भी चाहूंगा कि मैं पहले ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करूं और फिर देश के लिए मेडल लेकर आ सकूं।'
करियर के लिहाज़ से निर्णायक दो साल
कपिल पोखरिया के अनुसार आने वाले दो साल उनके बॉक्सिंग करियर की दिशा तय करेंगे। वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रदर्शन और उसके बाद ओलंपिक क्वालिफिकेशन प्रक्रिया — दोनों मिलकर यह निर्धारित करेंगे कि वे भारत के शीर्ष मुक्केबाज़ों की पंक्ति में अपनी जगह बना पाते हैं या नहीं। गौरतलब है कि भारतीय बॉक्सिंग में हैवीवेट वर्ग में ओलंपिक प्रतिनिधित्व की परंपरा अपेक्षाकृत कम रही है, इसलिए कपिल का लक्ष्य इस शून्य को भरने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
एशियन गेम्स के ब्रॉन्ज से हासिल आत्मविश्वास और सेमीफाइनल हार से मिली सीख के साथ, कपिल पोखरिया अब अपने करियर के सबसे बड़े अध्याय की तैयारी में जुट गए हैं।