नाना पाटेकर के निधन पर केदार जाधव भावुक: '24 सितंबर को मिला था, पहली मुलाकात आखिरी बन गई'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय क्रिकेटर केदार जाधव ने बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में कार्डियक अरेस्ट से 75 वर्ष की आयु में दिवंगत हुए नाना पाटेकर को जाधव ने 'दबंग कलाकार और इंसान' बताया। जाधव ने कहा कि उनकी पहली मुलाकात ही आखिरी मुलाकात बन गई।
पहली मुलाकात जो आखिरी निकली
केदार जाधव ने बताया कि वह 24 सितंबर 2026 को नाना पाटेकर के फार्म हाउस पर गणेश उत्सव के दौरान पहली बार उनसे मिले थे। जाधव ने कहा, 'यह बहुत ही दुखद है। मैं 15 दिन पहले ही उनसे पहली बार उनके फार्म हाउस पर गणेश उत्सव के दौरान मिला था। मुझे पता नहीं था कि वह पहली मुलाकात आखिरी मुलाकात हो जाएगी। वह एक दबंग कलाकार और इंसान थे।'
जाधव ने बताया कि मिलने की इच्छा कैसे जागी। उन्होंने कहा, 'पिछले 2-3 महीनों के दौरान अपने दोस्तों के साथ मैंने वेलकम के उनके कई कॉमेडी दृश्य देखे। इसके बाद मुझे लगा कि मैं भी पुणे से हूं और वे भी पुणे में रहते हैं, इसलिए मुझे उनसे मिलना चाहिए।' जाधव ने उनका नंबर हासिल कर मैसेज भेजा और आधे घंटे के भीतर नाना पाटेकर का खुद फोन आ गया।
एक फैन की श्रद्धांजलि
जाधव ने कहा, 'मैंने बचपन से उनकी फिल्में देखी हैं, उनका अभिनय देखा है। उन्होंने अपने अभिनय के दम पर फैंस की बड़ी संख्या अर्जित की है। मैं जब उनसे मिला, तो वह ठीक वैसे ही थे जैसे पर्दे पर नजर आते थे। वह बहुत बड़े कलाकार थे। यह मैं एक फैन के नाते बोल रहा हूं।' उन्होंने नाना पाटेकर के निधन को फिल्म उद्योग और मराठी समाज दोनों के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया।
जाधव ने कहा, 'उनका निधन फिल्म उद्योग और महाराष्ट्र के लिए, क्योंकि वे मराठी थे, बहुत बड़ा नुकसान है। उनके परिवार को ईश्वर यह दुख सहने की शक्ति दे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सुबह पुणे से मुंबई आते वक्त गाड़ी में उन्हें निधन की खबर मिली।
नाना पाटेकर के निधन की परिस्थितियाँ
नाना पाटेकर को 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट हुआ। मेडिकल टीम के पहुँचने पर वह अचेत अवस्था में मिले। उन्हें तत्काल मणिपाल हॉस्पिटल, गोवा ले जाया गया, जहाँ सुबह 5:20 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
नाना पाटेकर ने 75 वर्ष की आयु में अंतिम साँस ली। उनका अधिकांश समय हाल के वर्षों में पुणे में व्यतीत होता था।
नाना पाटेकर: एक युग का अंत
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड में हुआ था। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। रंगमंच से सिनेमा तक का सफर तय करने वाले पाटेकर 1978 से 2026 तक सक्रिय रहे।
उनकी प्रमुख फिल्मों में सलाम बॉम्बे, परिंदा, तिरंगा, क्रांतिवीर, वजूद, अंकुश, खामोशी, शक्ति, राजनीति और वेलकम शामिल हैं। मराठी सिनेमा में उनकी फिल्म नटसम्राट को अत्यंत प्रशंसा मिली। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका था।
फिल्म जगत और क्रीड़ा जगत का साझा शोक
नाना पाटेकर के जाने से हिंदी और मराठी दोनों सिनेमाओं ने एक ऐसा स्तंभ खो दिया है जिन्होंने पाँच दशकों से अधिक समय तक दर्शकों के मन पर अमिट छाप छोड़ी। केदार जाधव जैसे खेल जगत के हस्तियों की भावुक प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि पाटेकर का प्रभाव फिल्मी दुनिया की सीमाओं से कहीं आगे तक था। फिल्म उद्योग में उनके योगदान का मूल्यांकन आने वाली पीढ़ियाँ भी करती रहेंगी।