महिलाओं की स्पोर्ट्स में भागीदारी से बढ़ सकती है भारत के मेडल संख्या: रक्षा खडसे

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महिलाओं की स्पोर्ट्स में भागीदारी से बढ़ सकती है भारत के मेडल संख्या: रक्षा खडसे

सारांश

रक्षा खडसे ने कहा कि महिलाओं की स्पोर्ट्स में अधिक भागीदारी से भारत की मेडल संख्या में इजाफा हो सकता है। यह बयान अस्मिता कार्यक्रम के तहत दिया गया, जो महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित है।

Key Takeaways

  • महिलाओं की स्पोर्ट्स में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
  • अस्मिता कार्यक्रम के तहत विभिन्न खेलों का आयोजन।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल संख्या में वृद्धि की संभावना।
  • महिलाओं के अधिकार और सम्मान का महत्वपूर्ण संदर्भ।
  • खेलों में समानता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा।

औरंगाबाद, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने रविवार को कहा कि यदि महिलाओं की स्पोर्ट्स में भागीदारी काफी बढ़ती है, तो समर ओलंपिक और अन्य मल्टी-डिसिप्लिनरी इवेंट्स में भारत की मेडल संख्या में वृद्धि संभव है।

यह बयान खडसे ने छत्रपति संभाजीनगर के गरखेड़ा में डिविजनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में अस्मिता (अचीविंग स्पोर्ट्स माइलस्टोन बाय इंस्पायरिंग वीमेन थ्रू एक्शन) प्रोग्राम के तहत एथलेटिक्स लीग के लॉन्च के दौरान दिया। यह कार्यक्रम इंटरनेशनल महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसमें देश भर में 250 स्थानों पर एथलेटिक्स लीग शुरू की गई।

खडसे ने कहा कि अस्मिता बैनर के तहत योग, वुशु, किकबॉक्सिंग, और वेटलिफ्टिंग लीग का उद्घाटन भी किया गया। इसके साथ ही, उन्होंने साइक्लोथॉन और वॉकथॉन को भी हरी झंडी दिखाई। यह आयोजन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एनसीओई) द्वारा माय भारत, छत्रपति संभाजीनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, और महाराष्ट्र राज्य खेल विभाग के सहयोग से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए किया गया।

खडसे ने कहा कि अस्मिता भारत के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में मेडल की संख्या बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा, "इंटरनेशनल महिला दिवस हमें याद दिलाता है कि महिलाओं के अधिकार और सम्मान केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नींव हैं। जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तब पूरा समाज सशक्त होता है।"

उन्होंने कहा, "अस्मिता हमें जमीनी स्तर पर ग्रामीण, आदिवासी, और स्कूल-लेवल के बैकग्राउंड से टैलेंट पहचानने में मदद कर रहा है। जब भागीदारी बढ़ती है, टैलेंट पूल में वृद्धि होती है, प्रतिस्पर्धा बेहतर होती है और इससे मेडल की संख्या भी बढ़ती है।"

अब तक अस्मिता लीग में 2600 लीग में 33 डिसिप्लिन में लगभग 3 लाख महिलाओं ने भाग लिया है। 2025-26 में लगभग 1.59 लाख महिलाएं पहले ही 1287 लीग में भाग ले चुकी हैं।

इंटरनेशनल महिला दिवस के अवसर पर, अस्मिता एथलेटिक्स लीग तीन अलग-अलग रेस क्लास – 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर – में अंडर-13, 13-18, और 18-प्लस कैटेगरी की लड़कियों के लिए देश भर में 250 स्थानों पर आयोजित की गई थी। इस एक दिवसीय इवेंट में कुल 2 लाख लड़कियों ने भाग लिया, जिसे माय भारत, खेलो इंडिया सेंटर्स (केआईसी), साई इकोसिस्टम, और एनसीओई के सहयोग से लागू किया गया था।

Point of View

बल्कि महिलाओं की सशक्तीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
NationPress
09/03/2026

Frequently Asked Questions

अस्मिता कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
अस्मिता कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना और उनके टैलेंट को पहचानना है।
महिलाओं की स्पोर्ट्स में भागीदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
महिलाओं की भागीदारी से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और यह समाज में समानता को बढ़ावा देती है।
इस कार्यक्रम में कितनी महिलाएं भाग ले चुकी हैं?
अब तक अस्मिता लीग में लगभग 3 लाख महिलाओं ने भाग लिया है।
यह कार्यक्रम कब शुरू हुआ?
अस्मिता कार्यक्रम को 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था।
इस कार्यक्रम का आयोजन किसने किया?
इस कार्यक्रम का आयोजन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, छत्रपति संभाजीनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, और महाराष्ट्र राज्य खेल विभाग ने मिलकर किया।
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