नवजोत सिंह सिद्धू @63: क्रिकेट से कमेंट्री, राजनीति से मनोरंजन तक — हर मैदान में छाए 'गुरु'
सारांश
मुख्य बातें
नवजोत सिंह सिद्धू उन विरले भारतीयों में से हैं, जिन्होंने क्रिकेट, राजनीति और मनोरंजन — तीनों क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। 20 अक्टूबर 1963 को पंजाब के पटियाला में जन्मे सिद्धू आज 63 वर्ष के हो रहे हैं, और उनकी यात्रा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। बेबाक अंदाज, शायराना जुबान और हर मंच पर हावी होने की क्षमता — यही उनकी असली पहचान है।
क्रिकेट की पिच पर धमाकेदार आगाज़
सिद्धू का पहला प्यार क्रिकेट था। उन्होंने 1981-82 में पंजाब की रणजी टीम से घरेलू क्रिकेट में कदम रखा और महज एक साल बाद 12 नवंबर 1983 को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। दाएं हाथ के इस आक्रामक सलामी बल्लेबाज ने 1987 में वनडे फॉर्मेट में भी प्रवेश किया।
करियर में कई बार टीम से बाहर होने के बावजूद सिद्धू ने खेल के प्रति अपना जुनून बनाए रखा। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर जनवरी 1999 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ एक टेस्ट मैच के साथ समाप्त हुआ, और दिसंबर 1999 में उन्होंने औपचारिक रूप से संन्यास की घोषणा की।
आँकड़ों में एक मुकम्मल बल्लेबाज
सिद्धू ने 51 टेस्ट मैचों की 78 पारियों में 9 शतक और 15 अर्धशतक की मदद से 3,202 रन बनाए। टेस्ट में उनका सर्वाधिक स्कोर 201 रन रहा। वहीं 136 वनडे मैचों में 6 शतक और 33 अर्धशतक के साथ उन्होंने 4,413 रन अर्जित किए, जिसमें सर्वाधिक नाबाद 134 रन रहे।
वह 1988, 1990-91 और 1995 एशिया कप विजेता भारतीय टीम के अहम सदस्य थे। इसके अलावा उन्होंने 1987 और 1996 वनडे विश्व कप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। गौरतलब है कि टॉप ऑर्डर में उनकी आक्रामकता ने उस दौर की भारतीय बल्लेबाजी को एक नई धार दी।
कमेंट्री बॉक्स में नई इनिंग
संन्यास के करीब दो साल बाद सिद्धू ने कमेंट्री की दुनिया में कदम रखा। कमेंट्री बॉक्स में उनका शायराना और हाजिरजवाब अंदाज दर्शकों के लिए नितांत नया अनुभव था। क्रिकेट के दिनों में अपेक्षाकृत कम बोलने वाले सिद्धू की दूसरी पारी की मुख्य विशेषता ही उनकी बेबाक वाक्पटुता बन गई।
उनके मुहावरे और काव्यात्मक टिप्पणियाँ इतनी लोकप्रिय हुईं कि 'सिद्धूइज़्म' एक अलग शब्द के रूप में पहचाना जाने लगा। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय क्रिकेट कमेंट्री तकनीकी विश्लेषण से आगे मनोरंजन की ओर बढ़ रही थी।
राजनीति में प्रवेश और उतार-चढ़ाव
बोलने की कला और जनप्रियता ने सिद्धू के लिए राजनीति का द्वार खोला। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर 2004 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर से जीत दर्ज की। हालांकि 2016 में उन्होंने BJP से इस्तीफा दे दिया और 2017 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) में शामिल हो गए।
कांग्रेस के साथ उनका सफर भी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वह पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और अमरिंदर सिंह सरकार में मंत्री पद भी संभाला। आलोचकों का कहना है कि सिद्धू की राजनीतिक यात्रा उनकी क्रिकेट इनिंग जितनी ही अप्रत्याशित रही है। वह वर्तमान में भी कांग्रेस से जुड़े हैं।
मनोरंजन जगत में अलग पहचान
राजनीति के समानांतर सिद्धू ने मनोरंजन की दुनिया में भी अपनी जगह बनाई। वह लाफ्टर शो और 'बिग बॉस' जैसे कार्यक्रमों में नज़र आए। कपिल शर्मा के कॉमेडी शो में उनकी उपस्थिति शो की एक अनिवार्य विशेषता बन गई — उनकी काव्यात्मक टिप्पणियाँ और ठहाके दर्शकों को बार-बार खींचते रहे।
63 वर्ष की आयु में भी सिद्धू तीनों क्षेत्रों में अपनी-अपनी भूमिका में सक्रिय हैं। यह उस दौर में उल्लेखनीय है, जब अधिकांश हस्तियाँ एक ही क्षेत्र में टिकी रहती हैं। आगे देखना यह होगा कि अगले राजनीतिक चुनावी चक्र में वह किस भूमिका में उभरते हैं।