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अंशुमन गायकवाड़: क्रिकेट विरासत, माइकल होल्डिंग की खतरनाक गेंद और अदम्य साहस की कहानी

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अंशुमन गायकवाड़: क्रिकेट विरासत, माइकल होल्डिंग की खतरनाक गेंद और अदम्य साहस की कहानी

सारांश

विरासत में क्रिकेट, मैदान पर जानलेवा चोट और फिर सात महीने बाद उसी साहस के साथ वापसी — अंशुमन गायकवाड़ की कहानी सिर्फ रन और विकेट की नहीं, बल्कि एक बल्लेबाज के असाधारण हौसले की दास्तान है जिसने 1976 में माइकल होल्डिंग की रफ्तार को भी झुका दिया।

मुख्य बातें

अंशुमन गायकवाड़ का जन्म 23 सितंबर 1952 को मुंबई में हुआ; उनके पिता दत्ताजीराव गायकवाड़ भी भारत के पूर्व टेस्ट कप्तान थे।
1975 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण के बाद अंशुमन सुनील गावस्कर के साथ विश्वसनीय ओपनिंग जोड़ी बनाने लगे।
1976 में माइकल होल्डिंग की गेंद कान पर लगने से गंभीर चोट आई, दो दिन ICU में रहने के बाद सात महीने बाद वापसी की।
करियर में 40 टेस्ट में 1985 रन और 15 वनडे में 269 रन बनाए; पाकिस्तान के खिलाफ दोहरा शतक भी लगाया।
सेवानिवृत्ति के बाद राष्ट्रीय चयनकर्ता और भारतीय कोच की भूमिका निभाई।
31 जुलाई 2024 को 71 वर्ष की आयु में कैंसर से निधन।

भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज अंशुमन गायकवाड़ की गिनती भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे निडर बल्लेबाजों में होती है। 1970-80 के दशक में उन्होंने वेस्टइंडीज के उन खतरनाक तेज गेंदबाजों का डटकर सामना किया, जिनके खिलाफ अधिकांश बल्लेबाज विकेट की नहीं, बल्कि अपनी जान की फिक्र करते थे।

क्रिकेट विरासत में मिला

अंशुमन गायकवाड़ का जन्म 23 सितंबर 1952 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता दत्ताजीराव गायकवाड़ भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और कप्तान रह चुके थे, जिन्होंने 1952 से 1961 के बीच भारत के लिए 11 टेस्ट मैच खेले। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने अंशुमन को खेल की बारीकियाँ सहज ही सिखा दीं।

घरेलू क्रिकेट में निरंतर उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद 1975 में अंशुमन को भारतीय टीम में पदार्पण का अवसर मिला। ईडन गार्डन्स, कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट में उन्होंने दोनों पारियों को मिलाकर 40 रन बनाए।

गावस्कर के साथ खूंटा बनी सलामी जोड़ी

शुरुआत में मध्यक्रम बल्लेबाज के रूप में टीम में आए अंशुमन ने जल्द ही सलामी बल्लेबाज की भूमिका अपना ली। सुनील गावस्कर के साथ उनकी ओपनिंग जोड़ी उस युग की एक विश्वसनीय साझेदारी बन गई — जहाँ गावस्कर आक्रामक अंदाज़ में रन बनाते, वहीं अंशुमन क्रीज पर जमकर खड़े रहते।

गौरतलब है कि यह वह दौर था जब वेस्टइंडीज की तेज गेंदबाजी चौकड़ी — माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, कॉलिन क्राफ्ट और जोएल गार्नर — दुनिया की सबसे खतरनाक आक्रमण पंक्ति मानी जाती थी।

वह दर्दनाक पल — जब जान पर बन आई

1976 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज का तीसरा मैच जीतकर भारतीय टीम चौथे टेस्ट में उतरी। क्लाइव लॉयड की कप्तानी में कैरेबियाई टीम हार को पचाने में असमर्थ थी। तीसरी पराजय के बाद वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों के शरीर को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई।

अंशुमन गायकवाड़ और सुनील गावस्कर पहले विकेट के लिए 136 रन की साझेदारी कर चुके थे। विकेट लेने में बार-बार नाकाम रहने से वेस्टइंडीज के गेंदबाजों का आक्रोश और भड़क उठा। इसी बीच माइकल होल्डिंग की एक तीव्र गेंद उछाल लेती हुई सीधे अंशुमन के कान पर जा लगी। चोट इतनी गहरी थी कि उनका चेहरा लहूलुहान हो गया।

अंशुमन को तत्काल अस्पताल ले जाया गया और उन्हें दो दिन तक ICU में रखा गया। क्रिकेट जगत ने साँस रोककर देखा और कई लोगों को आशंका हो गई कि वे शायद फिर मैदान पर न लौट पाएँ।

सात महीने बाद — साहस की वापसी

हालाँकि, सात महीने बाद अंशुमन गायकवाड़ मैदान पर वापस आए — उसी अदम्य जज्बे के साथ। उन्होंने वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों का फिर सामना किया और भारत में खेली गई टेस्ट सीरीज में शतक भी ठोका। इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट में दोहरा शतक भी जड़ा।

अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में अंशुमन ने 40 टेस्ट मैचों में 1985 रन और 15 वनडे में 269 रन बनाए। खिलाड़ी के रूप में संन्यास के बाद उन्होंने राष्ट्रीय चयनकर्ता और फिर भारतीय क्रिकेट टीम के कोच की भूमिका भी निभाई।

विदाई और विरासत

31 जुलाई 2024 को अंशुमन गायकवाड़ का 71 वर्ष की आयु में कैंसर के कारण निधन हो गया। उनका जीवन भारतीय क्रिकेट के उस स्वर्णिम युग की याद दिलाता है जब साहस ही किसी बल्लेबाज की सबसे बड़ी पूँजी थी। वे न केवल एक योद्धा बल्लेबाज थे, बल्कि भारतीय क्रिकेट की परंपरा के सजग संरक्षक भी थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और एक बल्लेबाज का असली इम्तिहान रन से नहीं, बल्कि 150 किमी/घंटे की रफ्तार की गेंद का सामना करने के हौसले से आँका जाता था। जिस 1976 सीरीज में उन्हें ICU तक पहुँचा दिया गया, उसी वेस्टइंडीज के खिलाफ सात महीने बाद मैदान पर उतरना और शतक लगाना — यह मानसिक दृढ़ता की मिसाल है जो आज के पेशेवर क्रिकेट में भी दुर्लभ है। यह भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने खेल के बाद कोचिंग और चयन में भी योगदान दिया, जो बताता है कि क्रिकेट उनके लिए केवल करियर नहीं, जीवन था। उनके निधन के साथ भारतीय क्रिकेट ने एक ऐसे स्तंभ को खो दिया जिसने मैदान के भीतर और बाहर दोनों जगह पीढ़ियों को रास्ता दिखाया।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंशुमन गायकवाड़ कौन थे?
अंशुमन गायकवाड़ भारत के पूर्व टेस्ट बल्लेबाज थे, जिन्होंने 1975 से 1985 के बीच 40 टेस्ट और 15 वनडे मैचों में देश का प्रतिनिधित्व किया। वे सुनील गावस्कर के साथ भारत के विश्वसनीय ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में जाने जाते हैं।
1976 में माइकल होल्डिंग की गेंद से अंशुमन को क्या चोट लगी थी?
1976 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के चौथे मैच में माइकल होल्डिंग की तेज उछाल भरी गेंद सीधे अंशुमन के कान पर लगी, जिससे उनका चेहरा लहूलुहान हो गया। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया और दो दिन ICU में रखा गया।
अंशुमन गायकवाड़ के पिता कौन थे और क्या वे भी क्रिकेट खेलते थे?
अंशुमन के पिता दत्ताजीराव गायकवाड़ भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और कप्तान थे। उन्होंने 1952 से 1961 के बीच भारत के लिए 11 टेस्ट मैच खेले थे।
अंशुमन गायकवाड़ के करियर के आँकड़े क्या हैं?
अंशुमन गायकवाड़ ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 40 टेस्ट मैचों में 1985 रन और 15 वनडे मैचों में 269 रन बनाए। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शतक और पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट में दोहरा शतक भी लगाया।
अंशुमन गायकवाड़ का निधन कब और किस कारण हुआ?
अंशुमन गायकवाड़ का निधन 31 जुलाई 2024 को 71 वर्ष की आयु में हुआ। वे कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। खेल से संन्यास के बाद उन्होंने राष्ट्रीय चयनकर्ता और भारतीय क्रिकेट टीम के कोच के रूप में भी अपनी सेवाएँ दी थीं।
राष्ट्र प्रेस
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