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नीरज चोपड़ा का खुलासा: '90.23 मीटर थ्रो तकनीकी रूप से सर्वश्रेष्ठ नहीं था, 2-3 मीटर और जा सकता था'

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नीरज चोपड़ा का खुलासा: '90.23 मीटर थ्रो तकनीकी रूप से सर्वश्रेष्ठ नहीं था, 2-3 मीटर और जा सकता था'

सारांश

90.23 मीटर का थ्रो रिकॉर्ड था, पर नीरज चोपड़ा की नज़र में 'परफेक्ट' नहीं। दोहा में उन्होंने माना कि निचले शरीर की तकनीक बेहतर होती तो भाला 2-3 मीटर और जाता। यह आत्म-विश्लेषण बताता है कि भारत का सबसे बड़ा एथलेटिक्स सितारा अभी भी अपनी सीमाएं तोड़ने की राह पर है।

मुख्य बातें

नीरज चोपड़ा ने 18 जून को दोहा में कहा कि उनका 90.23 मीटर थ्रो तकनीकी रूप से उनके सर्वश्रेष्ठ थ्रो जैसा नहीं था।
उनके अनुसार निचले शरीर की बेहतर तकनीक से थ्रो 2-3 मीटर और लंबा जा सकता था।
चोपड़ा फाइनल के वीडियो की जगह क्वालिफिकेशन राउंड के थ्रो देखना पसंद करते हैं, जहाँ वे तनावमुक्त और तकनीकी रूप से अधिक सटीक रहते हैं।
जर्मनी के जूलियन वेबर ने उस रात चोपड़ा से लंबा थ्रो किया; चोपड़ा ने वेबर की सफलता पर खुशी जताई।
वेबर ने 2016 में चोपड़ा के सामने 88 मीटर का थ्रो किया था, और उनकी बड़ी कामयाबी तक का सफर लंबा रहा।

भारतीय जैवलिन स्टार और ओलंपिक मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने 18 जून को दोहा में वांडा डायमंड लीग के दौरान मीडिया से बातचीत में एक चौंकाने वाला खुलासा किया — उनका वह ऐतिहासिक 90.23 मीटर का थ्रो, जिसने उन्हें पिछले सीजन दोहा डायमंड लीग में सुर्खियों में ला दिया था, तकनीकी दृष्टि से उनके सर्वश्रेष्ठ थ्रो की श्रेणी में नहीं आता। उनके अनुसार, निचले शरीर की तकनीक बेहतर होती तो भाला 2-3 मीटर और दूर जा सकता था।

90 मीटर का थ्रो — पर परफेक्ट नहीं

मौजूदा विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि उस थ्रो में हाथ की रिलीज तो जबरदस्त थी, लेकिन निचले शरीर की तकनीक उनके अपने मानकों पर खरी नहीं उतरी। उन्होंने कहा, 'तकनीकी तौर पर, वह थ्रो उतना अच्छा नहीं था; हाथ से तो वह बहुत तेज था, लेकिन अगर मैं निचले शरीर के साथ बेहतर कर पाता, तो शायद 2-3 मीटर और दूर जा सकता था।' यह बयान इस बात का प्रमाण है कि 27 वर्षीय चोपड़ा अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं, बल्कि निरंतर सुधार की राह पर हैं।

क्वालिफिकेशन राउंड के थ्रो क्यों हैं पसंदीदा

चोपड़ा ने बताया कि वह फाइनल के वीडियो बार-बार देखने की बजाय क्वालिफिकेशन राउंड के थ्रो देखना अधिक पसंद करते हैं। उनके अनुसार, चाहे ओलंपिक हो या विश्व चैंपियनशिप, क्वालिफिकेशन राउंड में वे तनावमुक्त रहते हैं और तकनीकी रूप से अधिक सटीक थ्रो कर पाते हैं। 'जब भी मैं फाइनल या मुख्य प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेता हूं, तो मैं हमेशा बहुत ज्यादा जोर लगाता हूं। मैं बहुत आक्रामक हो जाता हूं, और अपनी तकनीक भूल जाता हूं,' — यह उनकी अपनी स्वीकारोक्ति है।

दोहा से जुड़ी यादें और जूलियन वेबर से रिश्ता

दोहा चोपड़ा के करियर के सबसे यादगार स्थलों में से एक है — यहीं उन्होंने पहली बार 90 मीटर का आंकड़ा पार किया था। उसी रात जर्मनी के जूलियन वेबर ने उनसे भी लंबा थ्रो कर प्रतियोगिता जीती। चोपड़ा ने इस पर कहा, 'मैं उनके लिए खुश हूं क्योंकि उन्होंने भी काफी संघर्ष किया था। उन्होंने साल 2016 में मेरे सामने 88 मीटर का थ्रो किया था, उन्हें भी इसमें काफी समय लगा।' यह खेल भावना चोपड़ा के व्यक्तित्व की एक उल्लेखनीय झलक है।

विशेषज्ञ दृष्टिकोण: तकनीक बनाम दूरी

जैवलिन थ्रो में दूरी और तकनीक के बीच का यह द्वंद्व खेल विशेषज्ञों के लिए कोई नई बात नहीं है। गौरतलब है कि विश्व स्तरीय एथलीट अक्सर उच्च-दबाव की स्थितियों में तकनीकी अनुशासन बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हैं। चोपड़ा का यह आत्म-विश्लेषण दर्शाता है कि वे अपनी सीमाओं को पहचानते हैं और उन्हें पार करने की दिशा में सचेत रूप से काम कर रहे हैं।

आगे क्या

दोहा डायमंड लीग में भाग लेने आए चोपड़ा के लिए यह सीजन तकनीकी परिपक्वता का सीजन हो सकता है। यदि वे क्वालिफिकेशन राउंड की तकनीक को फाइनल में भी दोहरा पाएं, तो 90 मीटर के पार एक नया व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ दूर नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह एक एथलीट की उस परिपक्वता को दर्शाता है जो रिकॉर्ड से नहीं, प्रक्रिया से संतुष्टि ढूंढता है। मुख्यधारा की कवरेज '90 मीटर पार' को मील का पत्थर मानकर रुक जाती है, जबकि चोपड़ा खुद उसे अधूरा थ्रो कहते हैं — यह अंतर महत्वपूर्ण है। फाइनल में अत्यधिक आक्रामकता और तकनीक भूल जाने की जो समस्या उन्होंने स्वीकारी है, वह उनके कोचिंग स्टाफ के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यदि वे क्वालिफिकेशन राउंड की तकनीकी शांति को फाइनल में ला सकें, तो भारतीय एथलेटिक्स का अगला अध्याय और भी ऐतिहासिक हो सकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीरज चोपड़ा ने 90.23 मीटर थ्रो के बारे में क्या कहा?
नीरज चोपड़ा ने कहा कि तकनीकी दृष्टि से वह थ्रो उनके सर्वश्रेष्ठ थ्रो जैसा नहीं था। उनके अनुसार हाथ की रिलीज तो तेज थी, लेकिन निचले शरीर की तकनीक बेहतर होती तो भाला 2-3 मीटर और दूर जा सकता था।
नीरज चोपड़ा क्वालिफिकेशन राउंड के थ्रो क्यों पसंद करते हैं?
चोपड़ा का कहना है कि क्वालिफिकेशन राउंड में वे तनावमुक्त रहते हैं और तकनीकी रूप से बेहतर थ्रो कर पाते हैं। फाइनल में वे अत्यधिक आक्रामक हो जाते हैं और तकनीक भूल जाते हैं, इसलिए क्वालिफिकेशन के वीडियो उन्हें बेहतर ब्लूप्रिंट देते हैं।
दोहा डायमंड लीग में जूलियन वेबर ने क्या किया था?
पिछले सीजन दोहा डायमंड लीग में जर्मनी के जूलियन वेबर ने नीरज चोपड़ा के 90.23 मीटर थ्रो के बाद उनसे भी लंबा थ्रो कर प्रतियोगिता जीती थी। चोपड़ा ने वेबर की इस सफलता पर खुशी जताई, क्योंकि वेबर ने 2016 से लंबा संघर्ष किया था।
नीरज चोपड़ा का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ जैवलिन थ्रो कितना है?
नीरज चोपड़ा का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो 90.23 मीटर है, जो उन्होंने दोहा डायमंड लीग में किया था। हालांकि, उनका मानना है कि बेहतर तकनीक के साथ यह दूरी और बढ़ाई जा सकती है।
नीरज चोपड़ा 2025 दोहा डायमंड लीग में क्यों हैं?
नीरज चोपड़ा 18 जून 2025 को दोहा में आयोजित वांडा डायमंड लीग में भाग लेने दोहा आए हैं। दोहा उनके करियर के सबसे यादगार स्थलों में से एक है, जहाँ उन्होंने पहली बार 90 मीटर का आंकड़ा पार किया था।
राष्ट्र प्रेस
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