नीरज चोपड़ा को लॉजेन डायमंड लीग में रुमेश पथिरागे ने लगातार तीसरी बार हराया, 88.14 मी. से जीता
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जैवलिन स्टार नीरज चोपड़ा को 22 अगस्त की रात लॉजेन डायमंड लीग में एक बार फिर दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा, जब श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 88.14 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया। नीरज ने 88.05 मीटर का प्रभावशाली थ्रो फेंका, लेकिन पथिरागे के 9 सेंटीमीटर अधिक दूरी के थ्रो का जवाब वे नहीं दे सके — यह लगातार तीसरा मौका था जब इस श्रीलंकाई एथलीट ने नीरज को शीर्ष स्थान से दूर रखा।
मुकाबले का घटनाक्रम
28 वर्षीय नीरज चोपड़ा का 88.05 मीटर का थ्रो शुरुआत में इवेंट का सर्वश्रेष्ठ प्रयास लग रहा था और उनके प्रशंसकों को पहले स्थान की उम्मीद बंध गई थी। लेकिन 23 वर्षीय पथिरागे ने अपने थ्रो से पूरे मुकाबले का रुख पलट दिया। नीरज अपने बाद के प्रयासों में पथिरागे को पीछे नहीं छोड़ सके। ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स 86.69 मीटर के थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
पथिरागे की हैट्रिक जीत — नीरज पर लगातार तीसरी बढ़त
यह पहली बार नहीं है कि पथिरागे ने नीरज को चुनौती दी हो। इससे पहले ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में पथिरागे ने स्वर्ण पदक जीता था और नीरज को रजत से संतोष करना पड़ा था। उससे भी पहले जून में दोहा डायमंड लीग में भी पथिरागे ने नीरज को दूसरे स्थान पर धकेला था। तीन प्रमुख प्रतिस्पर्धाओं में यह लगातार तीसरी हार नीरज के लिए गंभीर संकेत है।
नीरज चोपड़ा का सफर और चुनौतियाँ
नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में जैवलिन में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था और उन्हें तत्काल कोई बड़ी चुनौती नहीं दिखती थी। पेरिस ओलंपिक 2024 में पाकिस्तान के अरशद नदीम ने स्वर्ण जीता और नीरज को रजत मिला। 2024 के बाद अरशद नदीम के प्रदर्शन में गिरावट आई है, लेकिन नीरज खुद चोट से जूझते रहे हैं, जिसका असर उनकी निरंतरता पर पड़ा है।
पथिरागे — विश्व जैवलिन का उभरता सितारा
नीरज से 5 साल छोटे पथिरागे अपेक्षाकृत कम संसाधनों के बावजूद लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी ऊर्जा और तकनीक को देखते हुए उन्हें विश्व जैवलिन का अगला बड़ा नाम माना जाने लगा है। नीरज को अपना वर्चस्व पुनः स्थापित करने के लिए पथिरागे की तकनीक और रणनीति का तोड़ निकालना होगा।
आगे क्या
डायमंड लीग सीज़न अभी जारी है और नीरज के पास अपनी स्थिति सुधारने के अवसर बाकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नीरज की असली परीक्षा यह होगी कि वे पथिरागे के खिलाफ अपनी रणनीति में बदलाव कर पाते हैं या नहीं। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ और कोचिंग स्टाफ की नज़र अब इस प्रतिद्वंद्विता के अगले अध्याय पर होगी।