30 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नीरू ढांडा का एशियन गेम्स में ऐतिहासिक डबल गोल्ड, बीमारी को हराकर रचा इतिहास

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नीरू ढांडा का एशियन गेम्स में ऐतिहासिक डबल गोल्ड, बीमारी को हराकर रचा इतिहास

सारांश

बीमारी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन नीरू ढांडा ने नागोया में तीन पदक जीतकर जवाब दिया — डबल गोल्ड और एक सिल्वर। ट्रैप शूटिंग में एशियन गेम्स व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी नीरू का यह सफर सिर्फ खेल की नहीं, इरादे की जीत है।

मुख्य बातें

नीरू ढांडा ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में दो स्वर्ण पदक (व्यक्तिगत और मिश्रित टीम) और एक रजत पदक (टीम इवेंट) जीते।
वह ट्रैप शूटिंग में एशियन गेम्स व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
मिश्रित टीम स्पर्धा में क्यानन चेनाई के साथ जोड़ी ने चौथे स्थान से वापसी कर कतर को हराकर स्वर्ण जीता।
टीम इवेंट में आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ रजत पदक हासिल किया।
कोच पीटर विल्सन और NRAI के समर्थन को नीरू ने अपनी सफलता का अहम हिस्सा बताया।

भारतीय ट्रैप निशानेबाज नीरू ढांडा ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में तीन पदक जीतकर इतिहास रच दिया — व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक, टीम स्पर्धा में रजत पदक, और 30 सितंबर को क्यानन चेनाई के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक — यह सब तब, जब उनका प्रतियोगिता में हिस्सा लेना ही संदेह में था। ट्रैप शूटिंग में व्यक्तिगत एशियन गेम्स स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का यह सफर बीमारी, अनिश्चितता और अदम्य मनोबल की कहानी है।

बीमारी से शुरू हुआ सफर

नागोया पहुँचने से कुछ दिन पहले तक नीरू बीमारी से जूझ रही थीं और उनकी भागीदारी अधर में थी। इन हालात में उन्होंने खुद को मानसिक रूप से तैयार रखा और अपने कोच की प्रेरणा को ढाल बनाया।

नीरू ने बताया, 'उस समय, मुझे खुद को प्रेरित रखना था। सबसे पहले, मुझे अपनी सेहत सुधारने पर ध्यान देना था। मेरे कोच ने मुझे याद दिलाया कि मैंने पूरे एक साल ट्रेनिंग की थी और पिछले पाँच-छह वर्षों से किसी मकसद के लिए लगातार मेहनत कर रही थी। इसलिए, ये चार या पाँच दिन मुझे डिगा नहीं सकते।'

मिश्रित टीम स्पर्धा में शानदार वापसी

नीरू और क्यानन चेनाई की जोड़ी मेडल राउंड में चौथे स्थान पर थी, लेकिन दोनों ने जबरदस्त वापसी करते हुए खिताबी मुकाबले में कतर को मात दी और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। शूटिंग के दौरान मौखिक संवाद सीमित होने के बावजूद, चेनाई के इशारे और तकनीकी रुकावट के दौरान हुई संक्षिप्त बातचीत ने नीरू का ध्यान केंद्रित रखा।

नीरू ने बताया, 'उन्होंने कहा कि मुझे लड़ना है, मुझे आखिरी शॉट तक लड़ना है। हमने इस बारे में थोड़ी बात की कि मुझे कैसे लड़ना है, और मुझे एक बार में एक शॉट के बारे में सोचना है।'

तीन पदकों के बीच का फर्क

तीनों पदकों के अनुभव के बारे में पूछे जाने पर नीरू ने कहा, 'इंडिविजुअल इवेंट में फाइनल ज्यादा अहम होता है। टीम इवेंट में पूरी टीम का योगदान ज्यादा अहम होता है।' उन्होंने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ टीम इवेंट में जीते रजत पदक का श्रेय पूरी टीम को दिया और कहा कि साथियों ने हर मुश्किल में एक-दूसरे का साथ दिया।

गौरतलब है कि यह उपलब्धि इतनी बड़ी है कि नीरू खुद अभी तक इसे पूरी तरह महसूस नहीं कर पाई हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे अकेले बैठकर इसे सच में महसूस करने का समय नहीं मिला है।'

NRAI और SAI का योगदान

नीरू ने भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) को इस सफलता का श्रेय दिया। उन्होंने बताया कि पहले साल में एक कैंप मिलता था, अब दो से तीन कैंप मिलते हैं। फेडरेशन ने फिजियो, मनोवैज्ञानिक और विशेषज्ञ कोच उपलब्ध कराए, जिनमें पीटर विल्सन को कोच के रूप में नियुक्त करना भी शामिल है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शूटिंग टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। नीरू की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत संघर्ष की जीत है, बल्कि भारतीय ट्रैप शूटिंग के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत भी है। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनसे और भी बड़े प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय शूटिंग के बदलते ढाँचे का प्रमाण है — जहाँ NRAI और SAI की बढ़ी हुई संस्थागत मदद, विदेशी कोचिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता मिलकर असर दिखा रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय निशानेबाजी पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए अपनी तैयारी तेज कर रही है। असली सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्थागत सुधार टिकाऊ है, या यह कुछ चुनिंदा एथलीटों तक ही सीमित रहेगा।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में कितने पदक जीते?
नीरू ढांडा ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में कुल तीन पदक जीते — व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ टीम इवेंट में रजत, और क्यानन चेनाई के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक।
नीरू ढांडा का एशियन गेम्स में ऐतिहासिक रिकॉर्ड क्या है?
नीरू ढांडा ट्रैप शूटिंग में एशियन गेम्स व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं। यह उपलब्धि उन्होंने नागोया में बीमारी से उबरने के बाद हासिल की।
नीरू ढांडा एशियन गेम्स से पहले बीमार क्यों थीं और इसका असर कैसे पड़ा?
नागोया पहुँचने से कुछ दिन पहले नीरू बीमारी से जूझ रही थीं और उनकी प्रतियोगिता में भागीदारी संदेह में थी। कोच की प्रेरणा और वर्षों की ट्रेनिंग के आत्मविश्वास ने उन्हें वापसी करने में मदद की।
मिश्रित टीम स्पर्धा में नीरू और क्यानन चेनाई ने कैसे गोल्ड जीता?
नीरू ढांडा और क्यानन चेनाई की जोड़ी मेडल राउंड में चौथे स्थान पर थी। दोनों ने शानदार वापसी करते हुए फाइनल में कतर को हराकर स्वर्ण पदक जीता। तकनीकी रुकावट के दौरान हुई संक्षिप्त बातचीत ने नीरू का ध्यान केंद्रित रखने में मदद की।
भारतीय शूटिंग फेडरेशन ने नीरू ढांडा की सफलता में क्या भूमिका निभाई?
नीरू ने NRAI और SAI को अपनी सफलता का श्रेय दिया। उन्होंने बताया कि अब साल में दो से तीन कैंप मिलते हैं, फिजियो, मनोवैज्ञानिक और विशेषज्ञ कोच उपलब्ध कराए जाते हैं। कोच पीटर विल्सन की नियुक्ति भी फेडरेशन के समर्थन से हुई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 घंटे पहले
  2. 8 घंटे पहले
  3. कल
  4. कल
  5. कल
  6. कल
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले