29 सितंबर 2026
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नीरू ढांडा का एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड, बीमारी और येलो कार्ड के बाद भी 28/30 का कमाल

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नीरू ढांडा का एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड, बीमारी और येलो कार्ड के बाद भी 28/30 का कमाल

सारांश

बीमारी से उबरकर, बारिश में भीगते हुए और येलो कार्ड के दबाव को झेलते हुए — नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 की महिला ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीता। 30 में से 28 हिट और असाधारण संयम ने कोच पीटर विल्सन को भी भावुक कर दिया।

मुख्य बातें

नीरू ढांडा ने 29 सितंबर 2026 को आइची-नागोया में एशियन गेम्स 2026 की महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता।
फाइनल में ढांडा ने 30 में से 28 हिट लगाए और क्वालिफिकेशन में भी शीर्ष स्थान हासिल किया था।
26 वर्षीय नीरू प्रतियोगिता से महज 10-12 दिन पहले गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और उनकी भागीदारी संदेह में थी।
फाइनल में लगातार बारिश और घटती रोशनी के बीच ढांडा को येलो कार्ड भी मिला, जिसे कोच पीटर विल्सन ने जूरी के सामने सफलतापूर्वक चुनौती दी।
कोच पीटर विल्सन ने ढांडा की मानसिक दृढ़ता की सराहना करते हुए कहा कि वह दबाव के सबसे कठिन क्षण में भी सबसे शांत रहीं।

भारत की शूटर नीरू ढांडा ने 29 सितंबर 2026 को आइची-नागोया में एशियन गेम्स 2026 की महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल में 30 में से 28 हिट लगाने वाली ढांडा ने यह उपलब्धि तब हासिल की जब प्रतियोगिता से महज दस-बारह दिन पहले वह गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। उनके कोच, ब्रिटिश ओलंपिक चैंपियन पीटर विल्सन, ने इस जीत को असाधारण मानसिक दृढ़ता का प्रमाण बताया।

बीमारी से मैदान तक: एक असाधारण वापसी

कोच पीटर विल्सन ने पत्रकारों को बताया कि 26 वर्षीय नीरू प्रतियोगिता से पहले इतनी बीमार थीं कि उनकी एशियन गेम्स में भागीदारी ही संदेह में थी। उन्होंने कहा, 'यह उतार-चढ़ाव भरा सफर रहा है। नीरू सिर्फ 10-12 दिन पहले बहुत बीमार थीं और ऐसा लग रहा था कि वह शायद एशियन गेम्स में हिस्सा भी नहीं ले पाएंगी। उन्होंने तैयारी के दौरान कोई ट्रेनिंग नहीं की थी।' यह ऐसे समय में आया जब ढांडा क्वालिफिकेशन राउंड में शीर्ष स्थान पर रही थीं, जो उनकी तकनीकी श्रेष्ठता को और रेखांकित करता है।

मुश्किल मौसम और येलो कार्ड का दबाव

फाइनल के दिन नागोया में लगातार बारिश और घटती रोशनी ने हालात को और कठिन बना दिया। विल्सन ने विस्तार से बताया, 'पूरे दिन बारिश होती रही। बारिश की बूंदें गन की रिब पर टकराती हैं, गर्दन के पीछे से पानी बहता है — यह वाकई बहुत मुश्किल होता है।' इन परिस्थितियों के बीच जब ढांडा गोल्ड से बस एक टारगेट दूर थीं, तभी उन्हें अधिक समय लेने पर येलो कार्ड दे दिया गया। विल्सन ने जूरी के सामने इस फैसले को चुनौती दी और टाइमर को सही कराया। उनके अनुसार, 'नीरू कमाल की थीं। वह सबसे ज्यादा शांत थीं। उन्होंने खुद को संभाला और शूट किया।'

कोच की रणनीति: एक बार में एक टारगेट

विल्सन ने बताया कि फाइनल से पहले उनकी प्राथमिकता ढांडा पर इस मौके की अहमियत का मानसिक बोझ न डालना था। उन्होंने कहा, 'बस डटे रहो और एक बार में एक टारगेट पर ध्यान दो। यह सुनने में आसान है, लेकिन करना मुश्किल। आपको विचारों को रोकना होता है और ध्यान वापस इसी पल पर लाना होता है।' गौरतलब है कि ढांडा ने क्वालिफिकेशन में टॉप करने के बाद फाइनल में भी अपनी श्रेष्ठता बरकरार रखी, जो किसी भी शूटर के लिए दोहरी चुनौती होती है।

भारतीय शूटिंग के लिए ऐतिहासिक क्षण

नीरू की यह जीत एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। महिला ट्रैप स्पर्धा में एशियाई स्तर पर गोल्ड जीतना भारतीय शूटिंग के लिए एक नया मानक स्थापित करता है। विल्सन ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, 'शक से लेकर आगे बढ़कर नेतृत्व करने तक — इससे ज्यादा खुशी नहीं हो सकती।' आने वाले महीनों में ढांडा का ध्यान अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर अपनी इस लय को बनाए रखने पर होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रतिकूल मौसम और फाइनल के सबसे निर्णायक क्षण में येलो कार्ड — इन तीनों को एक साथ झेलकर गोल्ड जीतना बताता है कि भारतीय शूटिंग का मानसिक ढाँचा परिपक्व हो रहा है। हालाँकि, सवाल यह भी उठता है कि यदि कोच विल्सन जूरी के फैसले को चुनौती नहीं देते, तो क्या परिणाम बदल सकता था — और क्या भारतीय एथलीटों को ऐसे तकनीकी विवादों में खुद लड़ने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल रहा है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में क्या उपलब्धि हासिल की?
नीरू ढांडा ने 29 सितंबर 2026 को आइची-नागोया में एशियन गेम्स 2026 की महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने फाइनल में 30 में से 28 हिट लगाए और क्वालिफिकेशन में भी शीर्ष स्थान हासिल किया था।
नीरू ढांडा की जीत इतनी खास क्यों मानी जा रही है?
नीरू प्रतियोगिता से केवल 10-12 दिन पहले गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और उनकी भागीदारी संदेह में थी। इस दौरान उन्होंने कोई ट्रेनिंग नहीं की, फिर भी फाइनल में लगातार बारिश और येलो कार्ड जैसी चुनौतियों के बावजूद गोल्ड जीता।
फाइनल में येलो कार्ड का विवाद क्या था?
जब नीरू गोल्ड से बस एक टारगेट दूर थीं, तब उन्हें अधिक समय लेने पर येलो कार्ड दे दिया गया। कोच पीटर विल्सन ने जूरी के सामने आपत्ति जताई और टाइमर को सही कराया, जिसके बाद नीरू ने शांत रहते हुए अंतिम शॉट लगाया।
कोच पीटर विल्सन कौन हैं?
पीटर विल्सन एक ब्रिटिश ओलंपिक चैंपियन शूटर हैं जो भारतीय महिला ट्रैप टीम के कोच हैं। उन्होंने एशियन गेम्स 2026 में नीरू ढांडा को कोचिंग देकर उन्हें गोल्ड मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
एशियन गेम्स 2026 में नीरू की रणनीति क्या थी?
कोच विल्सन के अनुसार, नीरू को 'एक बार में एक टारगेट' पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई थी। इस मानसिक रणनीति ने उन्हें बीमारी, प्रतिकूल मौसम और येलो कार्ड के दबाव के बावजूद शांत और केंद्रित रहने में मदद की।
राष्ट्र प्रेस
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