पाकिस्तान पर ICC का दोहरा प्रहार: 50% मैच फीस जुर्माना और 11 WTC अंक कटे, जीत प्रतिशत सिर्फ 4.63
सारांश
मुख्य बातें
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बर्मिंघम के एजबेस्टन में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट में धीमी ओवर गति बनाए रखने पर पाकिस्तान को कड़ी सजा सुनाई है — टीम पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) तालिका से 11 अंक काट लिए गए हैं। इस दोहरी सजा के बाद बाबर आजम की टीम का WTC जीत प्रतिशत गिरकर महज 4.63% रह गया है, जो किसी भी टीम का चालू चक्र में सबसे निचला स्तर है।
जुर्माने की वजह
ICC के अनुसार, बर्मिंघम टेस्ट में 8 विकेट की हार के दौरान पाकिस्तान की टीम समय की सभी छूटों को जोड़ने के बाद भी निर्धारित लक्ष्य से 11 ओवर कम फेंक सकी। ऑन-फील्ड अंपायर पॉल राइफेल और क्रिस गैफनी, तीसरे अंपायर अल्लाहउद्दीन पालेकर और चौथे अंपायर रसेल वॉरेन ने टीम को दोषी पाया। एमिरेट्स ICC एलीट पैनल के मैच रेफरी रंजन मदुगले ने औपचारिक रूप से यह दंड सुनाया।
WTC तालिका में पाकिस्तान की स्थिति
बर्मिंघम टेस्ट में हार से पहले ही पाकिस्तान का WTC जीत प्रतिशत 14.81% था और वह तालिका के सबसे निचले पायदान पर था। 11 अंक कटने के बाद अब मौजूदा WTC चक्र में 9 मैचों में टीम के पास केवल 5 अंक बचे हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने चालू चक्र में 2 मैच जीते और 7 हारे हैं, लेकिन धीमी ओवर गति के कारण उसके कुल 24 अंकों में से 19 अंक छिन चुके हैं।
यह पहली बार नहीं
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले भी इसी कारण दंड झेल चुका है। इस साल मई में ढाका टेस्ट में बांग्लादेश के खिलाफ धीमी ओवर गति के चलते उसके 8 अंक काटे गए थे। इस तरह महज कुछ महीनों में टीम ने स्लो ओवर रेट के कारण 19 में से 19 अंक गँवाए हैं — यह क्रिकेट अनुशासन के मोर्चे पर एक गंभीर पैटर्न है।
WTC तालिका में अन्य टीमें
ऑस्ट्रेलिया WTC स्टैंडिंग में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। बांग्लादेश के खिलाफ 1-1 की बराबरी के बाद उसके 96 अंक हैं और जीत प्रतिशत 80% है। साउथ अफ्रीका 36 अंक और 75% जीत प्रतिशत के साथ दूसरे, न्यूजीलैंड 72.22% के साथ तीसरे और बांग्लादेश 55.56% के जीत प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर है।
आगे की राह
इंग्लैंड के खिलाफ 0-3 की क्लीन स्वीप और अब यह दोहरी सजा पाकिस्तान के लिए WTC फाइनल की राह लगभग बंद कर देती है। टीम प्रबंधन को न केवल मैदानी प्रदर्शन बल्कि ओवर-रेट अनुशासन पर भी तत्काल ध्यान देना होगा, अन्यथा आगामी श्रृंखलाओं में भी इसी तरह की कटौती का जोखिम बना रहेगा।