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बड़ा फैसला: पाकिस्तान ने SAFF विमेंस चैंपियनशिप 2026 से नाम वापस लिया, भारत-पाक तनाव बना कारण

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बड़ा फैसला: पाकिस्तान ने SAFF विमेंस चैंपियनशिप 2026 से नाम वापस लिया, भारत-पाक तनाव बना कारण

सारांश

पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन ने भारत-पाक राजनीतिक तनाव के चलते SAFF विमेंस चैंपियनशिप 2026 से नाम वापस लिया। गोवा में 25 मई से होने वाले टूर्नामेंट में अब 6 टीमें खेलेंगी। पाकिस्तान की महिला फुटबॉलरों को बड़ा झटका।

मुख्य बातें

पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन (PFF) ने SAFF विमेंस चैंपियनशिप 2026 से आधिकारिक रूप से नाम वापस लिया।
भारत-पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव इस फैसले की मुख्य वजह बताई गई है।
टूर्नामेंट 25 मई से 6 जून 2026 तक गोवा के मडगांव में होगा, अब 6 टीमें भाग लेंगी।
यह तीसरी बार है जब पाकिस्तान ने भारत में किसी बड़ी खेल प्रतियोगिता से किनारा किया — इससे पहले जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप और एशिया कप से भी हटा था।
भारत इस टूर्नामेंट की सबसे सफल टीम है — 5 खिताब (2010, 2012, 2014, 2016, 2019)।
बांग्लादेश डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में उतरेगा, जिसने 2022 और 2024 में लगातार खिताब जीते।

लाहौर, 23 अप्रैल। पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन (PFF) ने SAFF विमेंस चैंपियनशिप 2026 से अपनी टीम का नाम आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच गहराते राजनीतिक तनाव को इस फैसले की मुख्य वजह बताया गया है। यह टूर्नामेंट 25 मई से 6 जून 2026 के बीच गोवा के मडगांव स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित होना है।

टूर्नामेंट में अब छह टीमें होंगी शामिल

पाकिस्तान के हटने के बाद SAFF विमेंस चैंपियनशिप 2026 में अब केवल छह टीमें भाग लेंगी। टूर्नामेंट का ड्रॉ पहले ही संपन्न हो चुका है और शेष टीमों को दो ग्रुप में विभाजित किया गया है। इन टीमों में भारत (मेजबान), नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश (डिफेंडिंग चैंपियन), भूटान और मालदीव शामिल हैं।

यह दूसरा मौका है जब भारत इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2016 में सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल में यह आयोजन हुआ था, जहां भारतीय महिला टीम ने अपना चौथा खिताब जीता था। गोवा में पहले 1999 में पुरुषों की SAFF चैंपियनशिप का आयोजन हो चुका है।

पाकिस्तान की महिला फुटबॉल टीम को बड़ा झटका

इस फैसले का सबसे अधिक नुकसान पाकिस्तान की महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को उठाना पड़ेगा। पाकिस्तान महिला फुटबॉल टीम लंबे समय से प्रशासनिक अस्थिरता और सीमित अंतरराष्ट्रीय मैचों की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में यह टूर्नामेंट उनके लिए अनुभव और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग सुधारने का एक दुर्लभ अवसर था, जो अब हाथ से निकल गया।

विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक निर्णयों के कारण खिलाड़ियों के करियर पर असर डालना एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। FIFA और अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाएं आमतौर पर खेल में राजनीतिक हस्तक्षेप को नियमों का उल्लंघन मानती हैं।

यह पहली बार नहीं — पाकिस्तान का बहिष्कार का पैटर्न

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने भारत में होने वाली किसी खेल प्रतियोगिता से किनारा किया हो। इससे पहले नवंबर 2024 में तमिलनाडु में आयोजित जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप से भी पाकिस्तान ने अपना नाम वापस ले लिया था। इसके अलावा राजगीर में हुए एशिया कप में भी पाकिस्तान ने अपनी सीनियर पुरुष हॉकी टीम नहीं भेजी थी।

यह पैटर्न दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव अब खेल के मैदान तक भी पहुंच चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के बहिष्कार से दक्षिण एशियाई खेल सहयोग को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।

भारत का दबदबा — SAFF विमेंस चैंपियनशिप रिकॉर्ड

SAFF विमेंस चैंपियनशिप में भारत अब तक की सबसे सफल टीम रही है। भारत ने 2010, 2012, 2014, 2016 और 2019 — यानी कुल पांच बार यह खिताब जीता है। हालांकि, हाल के दो संस्करणों — 2022 और 2024 — में बांग्लादेश ने लगातार ट्रॉफी अपने नाम की है और अब वह डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में मैदान में उतरेगी।

भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामेंट घरेलू मैदान पर खिताब奪 वापसी का सुनहरा अवसर है। 25 मई 2026 से शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट पर पूरे दक्षिण एशिया की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरे होते राजनीतिक संकट का प्रतिबिंब है — जिसकी कीमत सबसे पहले वे खिलाड़ी चुकाते हैं जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं। विडंबना यह है कि पाकिस्तान की महिला फुटबॉल टीम पहले से ही प्रशासनिक उपेक्षा और कम अंतरराष्ट्रीय मैचों की मार झेल रही है, और अब यह एकमात्र बड़ा मंच भी छिन गया। हॉकी वर्ल्ड कप, एशिया कप और अब SAFF — यह बहिष्कारों की श्रृंखला बताती है कि पाकिस्तान खेल को कूटनीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन इसका असली नुकसान उसके अपने एथलीटों को हो रहा है। FIFA जैसी संस्थाओं को इस प्रवृत्ति पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान ने SAFF विमेंस चैंपियनशिप 2026 से नाम क्यों वापस लिया?
पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को इस फैसले की वजह बताया है। यह टूर्नामेंट भारत के गोवा में आयोजित होना है, जो इस निर्णय की पृष्ठभूमि बना।
SAFF विमेंस चैंपियनशिप 2026 कब और कहां होगी?
यह टूर्नामेंट 25 मई से 6 जून 2026 तक गोवा के मडगांव स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित होगा। पाकिस्तान के हटने के बाद अब छह टीमें इसमें भाग लेंगी।
SAFF विमेंस चैंपियनशिप में कौन सी टीमें खेलेंगी?
पाकिस्तान के हटने के बाद भारत (मेजबान), नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश (डिफेंडिंग चैंपियन), भूटान और मालदीव — कुल छह टीमें इस टूर्नामेंट में भाग लेंगी। टूर्नामेंट का ड्रॉ पहले ही हो चुका है।
SAFF विमेंस चैंपियनशिप में सबसे सफल टीम कौन सी है?
भारत इस टूर्नामेंट की सबसे सफल टीम है जिसने 2010, 2012, 2014, 2016 और 2019 में खिताब जीते हैं। हालांकि बांग्लादेश ने 2022 और 2024 के दो हालिया संस्करण जीते हैं और वह डिफेंडिंग चैंपियन है।
क्या पाकिस्तान पहले भी भारत में किसी खेल टूर्नामेंट से हट चुका है?
हां, पाकिस्तान ने नवंबर 2024 में तमिलनाडु में हुए जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप और राजगीर में हुए एशिया कप से भी अपनी टीम नहीं भेजी थी। यह SAFF विमेंस चैंपियनशिप से हटना तीसरा बड़ा बहिष्कार है।
राष्ट्र प्रेस
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