एशियन पैरा गेम्स 2026: प्रवीण कुमार का 2.05 मीटर गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड, बंटी को सिल्वर
सारांश
मुख्य बातें
भारत के पैरा एथलीट प्रवीण कुमार ने 21 अक्टूबर 2026 को आइची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की हाई जंप टी64 स्पर्धा में 2.05 मीटर की ऐतिहासिक छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता और नया गेम्स रिकॉर्ड स्थापित किया। उनके साथी बंटी ने 1.92 मीटर के पर्सनल बेस्ट के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया, जिससे इस इवेंट में भारत के लिए यादगार डबल पोडियम फिनिश दर्ज हुई।
मुख्य घटनाक्रम
प्रवीण ने प्रतियोगिता की शुरुआत 1.92 मीटर की जंप से की। उन्होंने सबसे पहले 2 मीटर की छलांग लगाकर जकार्ता 2018 में उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाजोव द्वारा बनाए गए 1.95 मीटर के पुराने गेम्स रिकॉर्ड को ध्वस्त किया। इसके बाद अपनी अंतिम कोशिश में उन्होंने 2.05 मीटर की ऊंचाई पार करके रिकॉर्ड को और ऊँचाई पर पहुँचाया।
बंटी ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 1.92 मीटर की जंप के साथ रजत पदक जीता। उज्बेकिस्तान के गियाजोव ने 1.86 मीटर के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पोडियम पूरा किया।
खेल मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने दोनों एथलीटों को बधाई दी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'रिकॉर्ड तोड़ने वाला डबल पोडियम। टॉप्स एथलीट प्रवीण कुमार को 2.05 मीटर के शानदार नए गेम्स रिकॉर्ड के साथ अपना गोल्ड बचाने के लिए और बंटी को एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की हाई जंप टी64 में 1.92 मीटर के शानदार पर्सनल बेस्ट के साथ सिल्वर मेडल जीतने के लिए बहुत-बहुत बधाई।'
प्रवीण कुमार का शानदार करियर
दो बार के पैरालंपिक पदक विजेता प्रवीण कुमार का यह प्रदर्शन उनके शानदार करियर की अगली कड़ी है। उन्होंने टोक्यो 2020 पैरालंपिक (2021 में आयोजित) में पुरुषों की हाई जंप टी64 में 2.07 मीटर की छलांग के साथ सिल्वर मेडल जीता था, जो तब एशियन रिकॉर्ड था। इसके बाद उन्होंने हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल जीता।
पेरिस 2024 पैरालंपिक में उन्होंने 2.08 मीटर की छलांग के साथ गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद नई दिल्ली में आयोजित 2025 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 2.00 मीटर की जंप के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था।
टी64 कैटेगरी क्या है
टी64 कैटेगरी उन एथलीटों के लिए है जिनके निचले अंग में प्रोस्थेसिस (कृत्रिम अंग) है और जो अंगों की कमी या पैर की लंबाई में अंतर के कारण प्रभावित हैं। गौरतलब है कि यह कैटेगरी उन एथलीटों से अलग है जो टी44 कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करते हैं — टी44 में बिना प्रोस्थेसिस के प्रतिस्पर्धा होती है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
प्रवीण और बंटी की इस उपलब्धि ने आइची-नागोया 2026 में भारत के पैरा एथलीटों के बढ़ते कद को रेखांकित किया है। यह सफलता भारत सरकार की टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) जैसी पहलों के प्रभाव को भी दर्शाती है, जिसके अंतर्गत प्रवीण को समर्थन मिल रहा है। आने वाले समय में प्रवीण के विश्व रिकॉर्ड की ओर नज़रें होंगी।