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क्या पृथ्वी शॉ की टीम में वापसी की उम्मीदें अभी भी बरकरार हैं?

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क्या पृथ्वी शॉ की टीम में वापसी की उम्मीदें अभी भी बरकरार हैं?

सारांश

पृथ्वी शॉ, जो 2018 में अंडर-19 विश्व कप में भारत को जीत दिलाने वाले कप्तान रहे हैं, ने अपनी करियर की शुरुआत में जबरदस्त सफलता हासिल की थी। लेकिन उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया है। उनकी वापसी की कहानी में क्या है? जानिए उनके संघर्ष और मेहनत के बारे में।

मुख्य बातें

पृथ्वी शॉ ने अंडर-19 विश्व कप में भारत को जीत दिलाई।
उन्होंने अपनी पहली टेस्ट पारी में शतक बनाया।
उनके करियर में कई बाधाएं आईं, जिनका सामना करना पड़ा।
वापसी के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
फिटनेस और प्रदर्शन उनकी वापसी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

नई दिल्ली, 8 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। साल 2018 में भारत को अंडर-19 विश्व कप जीताने वाले कप्तान पृथ्वी शॉ को अगला 'सचिन तेंदुलकर' कहा जा रहा था। उन्होंने अपनी पहली टेस्ट पारी में शतक बनाया और अपने करियर की शुरुआत शानदार तरीके से की, लेकिन जल्द ही उनके करियर का ग्राफ गिरने लगा

9 नवंबर 1999 को महाराष्ट्र के ठाणे में जन्मे पृथ्वी शॉ ने 14 साल की उम्र में ही क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा। 2013 में हैरिस शील्ड में उन्होंने अपने स्कूल रिजवी स्प्रिंगफील्ड के लिए 330 गेंदों में 85 चौकों और 5 छक्कों546 रन बनाए। यह उस समय का स्कूल क्रिकेट का सबसे बड़ा स्कोर था।

पृथ्वी शॉ, जो तेजी से रन बनाने में माहिर हैं, 2016 में अंडर-19 टीम का हिस्सा बने, जिसने यूथ एशिया कप जीता। इसके कुछ ही समय बाद, उन्होंने रणजी ट्रॉफी में मुंबई की तरफ से डेब्यू किया और तमिलनाडु के खिलाफ शतक बनाया।

शॉ ने 17 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी में डेब्यू करते हुए शतक बनाया, जिससे वह सबसे युवा खिलाड़ी बने। इससे पहले इस रिकॉर्ड का स्वामित्व सचिन तेंदुलकर के पास था।

साल 2018 में, पृथ्वी शॉ ने अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 विश्व कप जिताया और इसी साल दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें 1.2 करोड़ रुपये में टीम में शामिल किया। पहले ही सीजन में शॉ ने 9 मैचों में 27.22 की औसत से 245 रन बनाए।

शॉ का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू 2018 में वेस्टइंडीज के खिलाफ हुआ, जहां उन्होंने 134 रन बनाए। इसके साथ ही वह सचिन तेंदुलकर के बाद भारत के लिए दूसरे सबसे कम उम्र के टेस्ट शतकवीर बने।

हालांकि, प्रारंभिक सफलता के बाद उनके करियर में कई बाधाएं आईं। 2019 में डोपिंग के कारण उन्हें आठ महीने का प्रतिबंध झेलना पड़ा। लेकिन 2020 में उन्होंने वनडे में डेब्यू किया और 2021 में टी20 क्रिकेट में भी कदम रखा।

कई चोटों और अनुशासनहीनता के चलते उनकी फॉर्म में गिरावट आई, जिसके कारण वह टीम से बाहर हो गए। बाद में, खराब फिटनेस के कारण उन्हें मुंबई की टीम से भी बाहर कर दिया गया।

हालांकि, उन्होंने कड़ी मेहनतअक्टूबर 2025 में रणजी ट्रॉफी में चंडीगढ़ के खिलाफ 222 रन

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी शुरुआत शानदार रही, लेकिन अब तक उन्होंने केवल 5 टेस्टफर्स्ट क्लास करियर में 61 मुकाबलों में 14 शतक और 19 अर्धशतक के साथ 4,881 रन बनाए हैं।

वर्तमान में, पृथ्वी शॉ टीम इंडिया में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। उनकी फिटनेस और घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि वे अपने करियर को आगे बढ़ा सकें। हम सभी को उनकी मेहनत और संघर्ष को सराहना चाहिए।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पृथ्वी शॉ ने कब अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया?
पृथ्वी शॉ ने 2018 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया।
पृथ्वी शॉ की सबसे बड़ी क्रिकेट उपलब्धि क्या है?
पृथ्वी शॉ ने 2018 में भारत को अंडर-19 विश्व कप जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पृथ्वी शॉ के करियर में कौन-सी बाधाएं आईं?
पृथ्वी शॉ को 2019 में डोपिंग के कारण प्रतिबंध का सामना करना पड़ा और बाद में चोटों और अनुशासनहीनता के कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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