पीटी ऊषा को पहले 'इंडियन एथलेटिक्स अवार्ड्स' में लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान, अंजू बॉबी जॉर्ज भी नवाज़ी गईं
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष और भारतीय ट्रैक एंड फील्ड की दिग्गज स्प्रिंटर पीटी ऊषा को 20 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित पहले 'इंडियन एथलेटिक्स अवार्ड्स' समारोह में 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में भारतीय एथलेटिक्स के कई अन्य दिग्गजों को भी इसी पुरस्कार से नवाज़ा गया।
किन्हें मिला लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान
पीटी ऊषा के साथ-साथ 1962 के एशियन गेम्स में डेकाथलॉन के स्वर्ण पदक विजेता गुरबचन सिंह रंधावा, राष्ट्रीय टीम के पूर्व मुख्य कोच बहादुर सिंह चौहान, और 2003 पेरिस विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिला लॉन्ग जंप में कांस्य पदक जीतने वाली अंजू बॉबी जॉर्ज को भी 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। गौरतलब है कि अंजू बॉबी जॉर्ज विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली भारत की एकमात्र एथलीट हैं।
पीटी ऊषा की प्रतिक्रिया
इस सम्मान पर पीटी ऊषा ने कहा, 'मुझे इस अवार्ड को जीतने की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि मैंने इसके लिए आवेदन नहीं किया था। भारत में अधिकतर ऐसा होता है कि अगर आप अवार्ड के लिए आवेदन नहीं करते हैं, तो आपको अवार्ड नहीं मिलता। यह फेडरेशन, AFI की तरफ से एक बहुत अच्छी पहल है।' यह टिप्पणी भारत में पुरस्कार-प्रक्रिया पर एक महत्त्वपूर्ण टिप्पणी भी मानी जा रही है।
इंडियन एथलेटिक्स अवार्ड्स: पहले संस्करण की रूपरेखा
AFI ने ये पुरस्कार एथलेटिक्स के विभिन्न पहलुओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन और योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से शुरू किए हैं। पहले संस्करण में 10 श्रेणियाँ रखी गई थीं, जिनमें बेस्ट एथलीट (पुरुष व महिला), बेस्ट कोच, बेस्ट टेक्निकल अधिकारी, बेस्ट राज्य संघ और लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रमुख हैं। इन पुरस्कारों का लक्ष्य वर्तमान और पूर्व एथलीटों, कोचों, मेंटर्स, राज्य संघों और स्पॉन्सर्स — सभी को सम्मानित करना है, जिन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की एथलेटिक्स पहचान बनाने में भूमिका निभाई।
सम्मानित दिग्गजों की उपलब्धियाँ
'इंडियन ट्रैक एंड फील्ड की क्वीन' कही जाने वाली पीटी ऊषा ने एशियन गेम्स में 11 पदक (4 स्वर्ण, 7 रजत) और एशियन चैंपियनशिप में 23 पदक जीते हैं। वे ओलंपिक फाइनल में भी पहुँची थीं — एक ऐसी उपलब्धि जो उन्हें भारतीय एथलेटिक्स की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों में स्थापित करती है।
गुरबचन सिंह रंधावा ने 1962 के एशियन गेम्स में डेकाथलॉन में स्वर्ण पदक जीता था और भारतीय एथलेटिक्स के शुरुआती युग के सबसे चमकदार नामों में गिने जाते हैं। बहादुर सिंह चौहान ने राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में कई पीढ़ियों के एथलीटों को तराशने में अहम योगदान दिया।
आगे की राह
AFI के इस पहल को भारतीय एथलेटिक्स समुदाय में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब भारत अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। माना जा रहा है कि यह वार्षिक समारोह आने वाले वर्षों में एथलेटिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को और प्रोत्साहित करेगा।