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रितु मंडल ने प्रथम वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में जीते 2 स्वर्ण पदक, ओलंपिक का सपना

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रितु मंडल ने प्रथम वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में जीते 2 स्वर्ण पदक, ओलंपिक का सपना

सारांश

राजमिस्त्री की बेटी रितु मंडल ने अहमदाबाद में प्रथम वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में 2 स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। हुगली की 20 वर्षीय इस एथलीट का अगला सपना — योगासन को ओलंपिक में पहुँचाना और भारत के लिए मेडल जीतना।

मुख्य बातें

रितु मंडल ने अहमदाबाद में आयोजित प्रथम वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीते।
वे इस चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं।
रितु पश्चिम बंगाल के हुगली जिले की 20 वर्षीय एथलीट हैं; उनके पिता राजमिस्त्री हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने खेलो इंडिया यूथ गेम्स (चेन्नई) और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (असम) में कांस्य पदक जीते।
रितु का लक्ष्य योगासन को ओलंपिक में शामिल कराना और भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतना है।

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के एक छोटे से गाँव की बेटी रितु मंडल ने अहमदाबाद में आयोजित प्रथम वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया। 20 वर्षीय इस एथलीट की यह उपलब्धि वर्षों की कड़ी मेहनत, पारिवारिक त्याग और अदम्य संकल्प की कहानी है।

ऐतिहासिक प्रदर्शन

रितु वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गई हैं। दुनिया भर के शीर्ष योगासन एथलीटों के बीच उन्होंने संतुलन, लचीलापन, शक्ति और सटीकता का असाधारण प्रदर्शन किया। जीत के बाद कंधों पर तिरंगा लपेटकर जश्न मनाते देख उनके माता-पिता और बड़े भाई भावुक हो गए, जो इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बनने के लिए अहमदाबाद पहुँचे थे।

संघर्ष से शिखर तक

रितु के पिता राजमिस्त्री का काम करते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने उनके सपनों को हमेशा सहारा दिया। रितु ने कहा, 'मेरे पिता मेसन का काम करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद मेरे परिवार ने हमेशा मेरे सपनों का साथ दिया। मैंने सालों तक योगासन का प्रशिक्षण लिया और कड़ा अभ्यास किया। मेरे सामने चुनौतियाँ थीं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। मुझे अपने लक्ष्य पर भरोसा था।'

यह ऐसे समय में आया है जब देश में खेलों के लिए आर्थिक रूप से कमज़ोर पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

भाई की प्रेरणा

रितु के बड़े भाई स्वयं एक योगासन एथलीट रहे हैं, लेकिन परिस्थितियों के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाए। रितु ने बताया कि उनके भाई ने कभी यह नहीं कहा कि वे परफेक्ट हैं। उनके शब्द थे: 'बहुत बढ़िया, लेकिन अभी भी सुधार की गुंजाइश है। सुधार करती रहो। तुम्हें अभी बहुत आगे जाना है।' रितु के अनुसार, यही निरंतर प्रेरणा उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

राष्ट्रीय स्तर की पृष्ठभूमि

अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरने से पहले रितु राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ चुकी थीं। उन्होंने चेन्नई में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स और असम में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स — दोनों में कांस्य पदक जीते। इन अनुभवों ने उन्हें विश्व मंच पर मुकाबले का आत्मविश्वास दिया।

ओलंपिक का सपना

अहमदाबाद की सफलता के बाद भी रितु मानती हैं कि उनका सफर अभी शुरू हुआ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मेरा सपना है कि योगासन को एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और आखिरकार ओलंपिक में शामिल किया जाए। भारत के लिए ओलंपिक मेडल जीतना मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है।' गौरतलब है कि वर्तमान में योगासन ओलंपिक का हिस्सा नहीं है, और इसकी मान्यता के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास जारी हैं। रितु जैसे एथलीटों का प्रदर्शन इस अभियान को नई ऊर्जा दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ढाँचागत समर्थन नदारद है। खेलो इंडिया के कांस्य से वर्ल्ड चैंपियनशिप के स्वर्ण तक का सफर बताता है कि सही अवसर मिलने पर छोटे शहरों की प्रतिभा वैश्विक मंच पर भी चमक सकती है। लेकिन असली सवाल यह है कि जब तक योगासन को ओलंपिक मान्यता नहीं मिलती, रितु जैसे एथलीटों के लिए दीर्घकालिक वित्तीय और संस्थागत समर्थन कहाँ से आएगा? इस उपलब्धि को केवल प्रेरणा की कहानी बनाकर छोड़ना पर्याप्त नहीं — नीति-निर्माताओं को योगासन के लिए ठोस मान्यता और फंडिंग रोडमैप पर ध्यान देना होगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रितु मंडल ने वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में क्या उपलब्धि हासिल की?
रितु मंडल ने अहमदाबाद में आयोजित प्रथम वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीते और इस चैंपियनशिप में यह उपलब्धि पाने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। उन्होंने संतुलन, लचीलापन, शक्ति और सटीकता का असाधारण प्रदर्शन किया।
रितु मंडल कौन हैं और वे कहाँ से हैं?
रितु मंडल पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के एक छोटे से गाँव की 20 वर्षीय योगासन एथलीट हैं। उनके पिता राजमिस्त्री हैं और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने उनके खेल करियर को पूरा समर्थन दिया।
रितु मंडल का ओलंपिक से जुड़ा सपना क्या है?
रितु का सपना है कि योगासन को एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और अंततः ओलंपिक में शामिल किया जाए और वे भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतें। फिलहाल योगासन ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है।
वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप से पहले रितु का राष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रदर्शन रहा?
रितु ने चेन्नई में खेलो इंडिया यूथ गेम्स और असम में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स — दोनों में कांस्य पदक जीते। इन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुभव ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरने का आत्मविश्वास दिया।
रितु की सफलता में उनके परिवार की क्या भूमिका रही?
रितु के बड़े भाई स्वयं योगासन एथलीट रहे हैं लेकिन परिस्थितियों के कारण आगे नहीं बढ़ पाए; वे रितु को निरंतर सुधार के लिए प्रेरित करते रहे। उनके माता-पिता ने आर्थिक तंगी के बावजूद हर कदम पर साथ दिया और अहमदाबाद में जीत के गवाह बने।
राष्ट्र प्रेस
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