क्या पीवी सिंधु ने बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था?

सारांश
Key Takeaways
- पीवी सिंधु का ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतना एक ऐतिहासिक पल था।
- उनकी सफलताओं ने भारतीय बैडमिंटन को नई पहचान दी।
- सिंधु ने वैश्विक स्तर पर बैडमिंटन में भारत का नाम रोशन किया।
- उनकी उपलब्धियों ने युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया।
- बैडमिंटन में उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी प्रेरणादायक है।
नई दिल्ली, 4 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। पीवी सिंधु ने 2016 में ब्राजील के रियो में आयोजित ओलंपिक में बैडमिंटन में सिल्वर मेडल जीता था। वह इस इवेंट में बैडमिंटन में सिल्वर जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर भी प्रसिद्ध बना दिया। सिंधु की इस सफलता पर पूरे देश को गर्व था। अपने आक्रामक खेल के लिए जानी जाने वाली सिंधु ने 2017 में भी देश को गर्व का एक और पल प्रदान किया।
2017 में बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप का आयोजन स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुआ। महिला एकल के फाइनल में पीवी सिंधु का मुकाबला जापान की नोजोमी ओकुहारा से हुआ। इस मैच में सिंधु को हार का सामना करना पड़ा, जबकि देश को उम्मीद थी कि ओलंपिक में रजत जीतने वाली सिंधु इस बार स्वर्ण पदक जीतेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि, बैडमिंटन के इस महत्वपूर्ण वैश्विक टूर्नामेंट में रजत पदक प्राप्त करना भी एक बड़ी उपलब्धि है। इसलिए जब वह घर लौटीं तो उनका स्वागत एक विजेता की तरह किया गया।
यह मैच स्कॉटलैंड के समय के अनुसार 27 अगस्त को खेला गया था, लेकिन देर रात होने के कारण भारत में इसे 28 अगस्त को देखा गया।
सिंधु ने 2018 में भी बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप का फाइनल हारा, लेकिन 2019 में उन्होंने स्वर्ण पदक का इंतजार समाप्त किया और फाइनल में नोजोमी ओकुहारा को हराया।
पीवी सिंधु बैडमिंटन के क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा चेहरा मानी जाती हैं। उनका जन्म 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में हुआ। उनका पूरा नाम पुसरला वेंकट सिंधु है। उन्होंने 6 साल की उम्र से बैडमिंटन खेलना शुरू किया।
सिंधु ने 2016 के रियो ओलंपिक में सिल्वर और 2020 के टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने 1 गोल्ड, 2 सिल्वर, 2 ब्रॉन्ज, कॉमनवेल्थ में 2 गोल्ड, 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज, और एशियन चैंपियनशिप में 2 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं।
ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में पीवी सिंधु की सिल्वर मेडल वाली सफलता ने देश में बैडमिंटन का एक बड़ा वर्ग तैयार किया। आज, बैडमिंटन के किसी भी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारतीय प्रशंसक उसी तरह की रुचि रखते हैं जैसे क्रिकेट और अन्य खेलों में।
बैडमिंटन में असाधारण प्रदर्शन के लिए सिंधु को भारत सरकार ने 2013 में अर्जुन पुरस्कार, 2015 में पद्म श्री, 2016 में खेल रत्न पुरस्कार और 2020 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया है।