क्या रमन लांबा एक स्टाइलिश क्रिकेटर थे, जो छोटे से करियर में फैंस के चहेते बन गए?
सारांश
Key Takeaways
- रमन लांबा का करियर छोटा था लेकिन प्रभावशाली था।
- उन्होंने 32 वनडे मैचों में 783 रन बनाए।
- उनका डेब्यू मैच यादगार रहा।
- फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके 31 शतक थे।
- उनका निधन एक दुखद घटना थी।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रमन लांबा को भारत के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों और फील्डरों में से एक माना जाता था, जो 1980-90 के दशक में घरेलू क्रिकेट में सक्रिय रहे। अपने छोटे से करियर में, इस खिलाड़ी ने न केवल भारत में, बल्कि आयरलैंड और बांग्लादेश में भी अपार लोकप्रियता हासिल की।
2 जनवरी 1960 को मेरठ में जन्मे रमन लांबा ने घरेलू क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई। उनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू यादगार रहा, जिसमें उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मैच में 53 गेंदों पर 1 छक्का और 8 चौकों की मदद से 64 रन बनाए।
दाएं हाथ के इस आक्रामक बल्लेबाज ने 1989 में नेहरू कप के दौरान कृष्णमाचारी श्रीकांत के साथ मिलकर पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतकीय साझेदारियां कीं।
पाकिस्तान के खिलाफ दोनों सलामी बल्लेबाजों ने 120 रन जोड़े, जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले विकेट के लिए 115 रन की साझेदारी की। इन दोनों मुकाबलों में, रमन लांबा ने 57-57 रन की शानदार पारियां खेली।
रमन लांबा ने 1986 में वनडे फॉर्मेट में 10 मैच खेले, जिसमें 32.11 की औसत के साथ 289 रन बनाए। इस दौरान राजकोट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 102 रन की पारी भी शामिल रही। अगली वर्ष, उन्होंने 11 मैचों में 22 की औसत से 220 रन बनाए। हालाँकि, 1988 में उन्हें केवल एक वनडे खेलने का अवसर मिला। 1989 में, उन्होंने 10 मैचों में 29.55 की औसत से 266 रन बनाए, जिसमें उनके बल्ले से 3 अर्धशतक निकले।
उन्होंने भारत की ओर से कुल 32 वनडे खेले, जिसमें 27 की औसत से 783 रन बनाए। इस दौरान 1 शतक और 6 अर्धशतक बने। वहीं, 4 टेस्ट की 5 पारियों में उन्होंने 102 रन बनाये।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में रमन लांबा का प्रदर्शन अद्भुत था, जहां उन्होंने 121 मैचों में 53.84 की औसत से 8,776 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 31 शतक और 27 अर्धशतक निकले। वह लगातार रन बनाने वाले खिलाड़ियों में से एक थे, जिनमें दो तिहरे शतक शामिल हैं। लिस्ट ए क्रिकेट में 82 मैचों में उन्होंने 36.85 की औसत से 2,543 रन बनाए।
जब रमन लांबा को भारतीय टीम में जगह नहीं मिली, तो उन्होंने आयरलैंड के क्लबों (नॉर्थ डाउन, वुडवेल, क्लिफ्टनविले, आर्डमोर) के लिए खेलना शुरू किया और अनौपचारिक वनडे मैचों में भी इस टीम का प्रतिनिधित्व किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात किम मिचेल क्रॉथर से हुई, जिनसे उन्होंने शादी की।
रमन लांबा का सपना था कि वह 45 वर्ष की आयु तक दिल्ली के लिए खेलें, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 1998 में बांग्लादेश में एक क्लब मैच के दौरान फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर फील्डिंग करते समय उन्हें सिर पर गंभीर चोट लगी, जिसके बाद वह कोमा में चले गए। 22 फरवरी 1998 को इस खिलाड़ी ने दुनिया को अलविदा कह दिया।