रिंकू हुड्डा का एशियाई पैरा गेम्स में स्वर्ण: 65.11 मीटर के आखिरी थ्रो से मां को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी रिंकू हुड्डा ने 20 अक्टूबर 2026 को नागोया में एशियाई पैरा गेम्स की पुरुष एफ46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता — और वह भी तब, जब वह अपनी मां के निधन और कंधे की चोट के दोहरे दर्द से उबरने की कोशिश कर रहे थे। हरियाणा के 27 वर्षीय इस खिलाड़ी ने अपने आखिरी प्रयास में 65.11 मीटर का थ्रो करके हमवतन अजीत सिंह को महज नौ सेंटीमीटर के अंतर से पीछे छोड़ दिया।
मुकाबले का रोमांचक घटनाक्रम
प्रतियोगिता के चौथे प्रयास में अजीत सिंह ने 65.02 मीटर का थ्रो करके बढ़त बना ली थी। रिंकू के लिए स्वर्ण का रास्ता अब केवल आखिरी प्रयास से होकर गुजरता था। उन्होंने छठे और अंतिम प्रयास में 65.11 मीटर भाला फेंककर शीर्ष स्थान हासिल किया। इंडोनेशिया के आर. सक्त्योनो ने 55.30 मीटर के प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता। रिंकू ने बताया कि बड़े टूर्नामेंटों में उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो प्रायः आखिरी प्रयास में ही आता है — 2022 के एशियाई खेलों में भी उन्होंने अंतिम प्रयास में 67 मीटर का थ्रो किया था।
मां का निधन और भावनात्मक संघर्ष
रिंकू की मां का निधन 8 अगस्त 2026 को हुआ था। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, 'ऐसा कोई दिन नहीं रहा, जब मैं रोया न होऊं। सुबह से शाम तक। हर बार, मैं दिन में एक या दो बार रोता हूं। मुझे उनकी याद आती है। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ ऐसा होगा।' उन्होंने बताया कि माँ के जाने के बाद अंदर से पदक जीतने की वह अनुभूति नहीं होती, जो पहले होती थी। उन्होंने कहा, 'मैं अब भी पदक जीतता हूं, लेकिन मुझे ऐसा महसूस नहीं होता कि मैंने कोई पदक जीता है।'
मां के अंतिम क्षणों को याद करते हुए रिंकू ने बताया कि 8 अगस्त को दोपहर 3:10 बजे तक उनकी मां उनके हाथ पर सिर रखकर सो रही थीं। उसी दौरान डोपिंग टीम उनका नमूना लेने आ गई और वह बगल के घर में गए। वे दस मिनट उनके जीवन में एक अमिट घाव बन गए। उन्होंने कहा, 'जीवनभर मुझे वे 10 मिनट याद रहेंगे।'
चोट और वापसी की चुनौती
माँ के निधन के बाद रिंकू ने 19 अगस्त से प्रशिक्षण फिर शुरू किया, लेकिन मन नहीं लगा। इसी दौरान कंधे में दर्द हुआ और MRI में ग्रेड-1 टियर पाया गया। डॉक्टर स्वप्निल, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच लक्ष्य और रिंकू ने मिलकर दो-तीन घंटे की चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की। उनके चार-पांच प्रशिक्षण सत्र छूट गए। जब अभ्यास दोबारा शुरू हुआ, तो कंधे पर टेपिंग करके थ्रो किए गए। प्रतियोगिता से पहले 9 अक्टूबर को उनके सर्वश्रेष्ठ थ्रो 61 से 62 मीटर के बीच रहे, इसलिए 65 मीटर से अधिक का थ्रो उनकी अपेक्षाओं से परे था।
पिता की प्रेरणा और आगे की योजना
रिंकू के पिता ने उन्हें समझाया कि जो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता और अब उन्हें अपने खेल और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। यही प्रेरणा उनकी वापसी की नींव बनी। रिंकू ने अब एक-दो महीने आराम करने की योजना बनाई है। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक और पैरालंपिक है।
जूनियर पैरा खिलाड़ियों के लिए पुकार
स्वर्ण पदक विजेता रिंकू ने पैरा खेलों में नए और जूनियर खिलाड़ियों के लिए अधिक वित्तीय सहायता और संस्थागत सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'वरिष्ठ खिलाड़ियों के पास प्रायोजन और नौकरियां हैं। हर तरह से उनके पास एक बैकअप होता है। लेकिन जो जूनियर खिलाड़ी पहली बार खेल रहे हैं, उन्हें अधिक सहयोग की जरूरत है।' उन्होंने TOPS (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) के तहत नए खिलाड़ियों को और अधिक सहायता देने का आग्रह किया। यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि दर्द, अनुशासन और अदम्य जिजीविषा की मिसाल है।