ऋषभ पंत ने एलएसजी की कप्तानी छोड़ी: 2 सीज़न में 10 हार, ₹27 करोड़ की उम्मीदें धराशायी
सारांश
मुख्य बातें
ऋषभ पंत ने 29 मई 2026 को लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया। आईपीएल 2026 में टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पंत ने खुद एलएसजी प्रबंधन से कप्तानी छोड़ने का अनुरोध किया, जिसे फ्रेंचाइज़ी ने स्वीकार कर लिया। एलएसजी ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनलों के ज़रिए इस बदलाव की पुष्टि की।
₹27 करोड़ का दांव और टूटी उम्मीदें
आईपीएल 2025 की नीलामी में एलएसजी ने पंत को ₹27 करोड़ में खरीदकर उन्हें आईपीएल इतिहास का सबसे महंगा खिलाड़ी बना दिया था। फ्रेंचाइज़ी ने इस बाएं हाथ के विकेटकीपर-बल्लेबाज को कप्तानी सौंपते हुए यह उम्मीद जताई थी कि वे लंबे समय तक टीम की अगुवाई करेंगे और एलएसजी को पहला आईपीएल खिताब दिलाएंगे।
एलएसजी के मालिक संजीव गोयनका ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगले 10 वर्षों में पंत की कप्तानी में सफलता एमएस धोनी और रोहित शर्मा जैसी होगी — जिन्होंने क्रमशः चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और मुंबई इंडियंस (एमआई) को पाँच-पाँच आईपीएल खिताब दिलाए हैं। फिलहाल, गोयनका की यह भविष्यवाणी पूरी होती नहीं दिख रही।
कप्तानी का रिकॉर्ड: दो सीज़न, दो निराशाएँ
आईपीएल 2025 में पंत की कप्तानी में एलएसजी ने 14 मैचों में 6 जीत और 8 हार दर्ज कीं, और टीम सातवें स्थान पर रहकर प्लेऑफ़ से बाहर हो गई। आईपीएल 2026 में हालात और बिगड़ गए — टीम 14 मैचों में केवल 4 जीत के साथ अंकतालिका में दसवें स्थान पर रही। दो सीज़न में कुल 28 मैचों में सिर्फ 10 जीत — यह रिकॉर्ड फ्रेंचाइज़ी की अपेक्षाओं से कोसों दूर रहा।
बल्लेबाज़ी के आँकड़े: महंगाई के अनुरूप नहीं
बल्लेबाज़ी में भी पंत का प्रदर्शन उनकी कीमत के अनुरूप नहीं रहा। आईपीएल 2025 में उन्होंने 14 मैचों की 13 पारियों में 1 शतक और 1 अर्धशतक की मदद से 24.45 की औसत से 269 रन बनाए। आईपीएल 2026 में उन्होंने 13 पारियों में 1 अर्धशतक के साथ 28.36 की औसत से 312 रन बनाए। आईपीएल के सबसे महंगे खिलाड़ी से जो विस्फोटक और निरंतर प्रदर्शन अपेक्षित था, वह दोनों सीज़न में नदारद रहा।
आगे क्या होगा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पंत अगले सीज़न में एलएसजी के साथ एक खिलाड़ी के रूप में बने रहेंगे या फ्रेंचाइज़ी उन्हें रिलीज़ करने पर विचार करेगी। ₹27 करोड़ के अनुबंध और दो सीज़न के औसत प्रदर्शन के बीच का यह अंतर एलएसजी प्रबंधन के लिए एक कठिन निर्णय बन सकता है।