थाईलैंड ओपन में सिल्वर के बाद सात्विक-चिराग ने मलेशिया मास्टर्स से नाम वापस लिया
सारांश
मुख्य बातें
भारत की शीर्ष पुरुष युगल जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने थाईलैंड ओपन 2025 में रजत पदक जीतने के बाद मलेशिया मास्टर्स से हटने का फैसला किया है। पटुमवान में खेले गए फाइनल में उन्हें इंडोनेशिया की जोड़ी के हाथों हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस टूर्नामेंट ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी। जोड़ी अब सिंगापुर, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया लेग में वापसी करेगी।
फाइनल में क्या हुआ
थाईलैंड ओपन के स्वर्ण पदक मुकाबले में सात्विक-चिराग को इंडोनेशिया के लियो रॉली कार्नांडो और डेनियल मार्थिन ने 12-21, 23-25 से हराया। पहला गेम एकतरफा रहा, लेकिन दूसरे गेम में भारतीय जोड़ी ने जोरदार संघर्ष किया। उन्होंने चार चैंपियनशिप पॉइंट बचाए, पर अंततः मामूली अंतर से पराजित हुए। शेट्टी ने माना कि कोर्ट की तेज गति के कारण शुरुआत में तालमेल बिठाने में कठिनाई हुई।
आगे का शेड्यूल
रंकीरेड्डी ने मैच के बाद स्पष्ट किया, 'हम मलेशिया में नहीं खेल रहे हैं। हम सिंगापुर, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में खेल रहे हैं।' यह निर्णय जोड़ी की सोची-समझी शेड्यूल प्रबंधन रणनीति का हिस्सा है, जिससे वे आगामी महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों के लिए पूरी तरह तैयार रह सकें।
आत्मविश्वास की वापसी
रंकीरेड्डी ने स्वीकार किया कि हाल के महीनों में जोड़ी का आत्मविश्वास कम हुआ था। उन्होंने कहा, 'आज के दिन को छोड़कर, जिस तरह से हमने खेला, मुझे लगता है कि हम अपनी पुरानी लय वापस पा रहे हैं। पहले, एक साल पहले, हमारा आत्मविश्वास हमेशा 90 प्रतिशत होता था, लेकिन अब हम वह आत्मविश्वास वापस पा रहे हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह खेल शारीरिक से ज्यादा मानसिक है और चीजें अब उनके पक्ष में होने लगी हैं।
थॉमस कप का असर
चिराग शेट्टी ने थॉमस कप अभियान को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया जिसने जोड़ी को अपने खेल पर दोबारा भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा, 'खासकर थॉमस कप के बाद, हमें अपने खेल में काफी ज्यादा आत्मविश्वास महसूस हुआ। हालांकि आज हम हार गए, लेकिन मुझे लगता है कि हम आगे बढ़ सकते हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैडमिंटन जगत इस जोड़ी से शीर्ष प्रदर्शन की उम्मीद लगाए बैठा है।
आगे की राह
सिंगापुर, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले सात्विक-चिराग के लिए अपनी फॉर्म को और धार देने का मौका होंगे। थाईलैंड में मिली रजत पदक की सफलता यह संकेत देती है कि यह जोड़ी अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर की ओर लौट रही है।