एनसीपी की अंदरूनी अस्थिरता से परेशान आनंद परांजपे ने शिवसेना की राह चुनी: राजू वाघमारे

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एनसीपी की अंदरूनी अस्थिरता से परेशान आनंद परांजपे ने शिवसेना की राह चुनी: राजू वाघमारे

सारांश

एनसीपी के पूर्व मुख्य प्रवक्ता आनंद परांजपे का शिवसेना में जाना महज़ एक दल-बदल नहीं — यह एनसीपी के भीतर गहराते नेतृत्व संकट का संकेत है। शरद पवार का आशीर्वाद और सुनेत्रा पवार की सहमति, दोनों तथ्य इस घटनाक्रम को महायुति के भीतर एक सुलझे हुए राजनीतिक समझौते की शक्ल देते हैं।

मुख्य बातें

आनंद परांजपे , एनसीपी के पूर्व मुख्य प्रवक्ता, 17 मई 2026 को शिवसेना में शामिल हुए।
शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे के अनुसार परांजपे ने स्वेच्छा से शिवसेना में आने की इच्छा जताई थी; शिवसेना ने संपर्क नहीं किया था।
परांजपे ने शिवसेना में प्रवेश से पहले शरद पवार से व्यक्तिगत मुलाकात कर आशीर्वाद लिया।
वरिष्ठ मंत्री उदय सामंत ने स्पष्ट किया कि प्रवेश एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार से चर्चा के बाद हुआ।
परांजपे ने किसी पद की माँग नहीं की; एकनाथ शिंदे से केवल संगठन में काम करने की जिम्मेदारी माँगी।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पूर्व मुख्य प्रवक्ता आनंद परांजपे के शिवसेना में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 17 मई 2026 को मुंबई में शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने स्पष्ट किया कि परांजपे का यह कदम पूरी तरह स्वैच्छिक था और एनसीपी में चल रही नेतृत्व की उठापटक इसकी मुख्य वजह है।

मुख्य घटनाक्रम

शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने कहा, 'एनसीपी नेता आनंद परांजपे ने खुद शिवसेना में शामिल होने की इच्छा जताई थी। शिवसेना ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया था — वे अपनी मर्जी से पार्टी में आना चाहते थे।' वाघमारे ने यह भी रेखांकित किया कि एनसीपी में इस समय नेतृत्व और कामकाज को लेकर गहरे असमंजस और अनियमितताएं व्याप्त हैं, जिसके चलते परांजपे ने यह निर्णय लिया।

शरद पवार से मुलाकात और आशीर्वाद

शिवसेना में प्रवेश से पहले आनंद परांजपे ने एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार से व्यक्तिगत मुलाकात की। परांजपे ने कहा, 'शरद पवार हमेशा मेरे लिए सम्माननीय थे, हैं और आगे भी रहेंगे। शिवसेना में नए प्रवास की शुरुआत के दौरान मैं उनका आशीर्वाद लेने गया था।' उन्होंने बताया कि शरद पवार ने उन्हें मेहनत करने और नई पार्टी में अच्छे से काम करने की सलाह दी।

एनसीपी तोड़ने के आरोपों पर सफाई

शिवसेना पर एनसीपी को तोड़ने के आरोप लगाए जाने पर परांजपे ने कहा कि शिवसेना के वरिष्ठ मंत्री उदय सामंत ने पहले ही अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है। उन्होंने बताया कि एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार से चर्चा के बाद ही उनका शिवसेना में प्रवेश हुआ, इसलिए दोनों पार्टियों के बीच किसी तरह का टकराव नहीं है।

पद की माँग नहीं, संगठन में काम करने की इच्छा

आनंद परांजपे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने शिवसेना में किसी पद की माँग नहीं की है। उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से केवल यह विनती की कि उन्हें संगठन में काम करने की जिम्मेदारी दी जाए। परांजपे ने कहा, 'मुझे संगठन में ज़्यादा रुचि है। मैं पार्टी कार्यकर्ता के रूप में संगठन के विस्तार के लिए काम करूंगा।'

आगे की राह

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के भीतर सीटों और प्रभाव क्षेत्र को लेकर खींचतान जारी है। गौरतलब है कि एनसीपी का शरद पवार और अजित पवार गुटों में विभाजन के बाद से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। परांजपे का यह कदम इस प्रवृत्ति की एक और कड़ी माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ नेताओं की आवाजाही को टकराव नहीं, बल्कि प्रबंधित पुनर्वितरण के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि एनसीपी के भीतर नेतृत्व का यह असमंजस अगर जल्द नहीं सुलझा, तो परांजपे पहले नहीं, आखिरी भी नहीं होंगे।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आनंद परांजपे कौन हैं और उन्होंने शिवसेना क्यों ज्वाइन की?
आनंद परांजपे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पूर्व मुख्य प्रवक्ता हैं, जो 17 मई 2026 को शिवसेना में शामिल हुए। शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे के अनुसार, एनसीपी में नेतृत्व और कामकाज को लेकर गहरे असमंजस और अनियमितताएं इस फैसले की मुख्य वजह रहीं।
क्या शिवसेना ने आनंद परांजपे को पार्टी में बुलाया था?
नहीं। शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने स्पष्ट किया कि परांजपे ने खुद शिवसेना में शामिल होने की इच्छा जताई थी और शिवसेना ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया था।
क्या शरद पवार ने परांजपे के शिवसेना में जाने को मंजूरी दी?
परांजपे ने शिवसेना में प्रवेश से पहले एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार से व्यक्तिगत मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। पवार ने उन्हें मेहनत करने और नई पार्टी में अच्छे से काम करने की सलाह दी।
क्या शिवसेना ने एनसीपी को तोड़ा?
परांजपे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वरिष्ठ मंत्री उदय सामंत ने स्पष्ट किया है कि यह प्रवेश एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार से चर्चा के बाद हुआ। उनके अनुसार दोनों पार्टियों के बीच कोई टकराव नहीं है।
शिवसेना में परांजपे की क्या भूमिका होगी?
परांजपे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी पद की माँग नहीं की है। उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से केवल संगठन में काम करने की जिम्मेदारी माँगी है और वे पार्टी कार्यकर्ता के रूप में संगठन विस्तार में योगदान देंगे।
राष्ट्र प्रेस
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