आनंद परांजपे की 14 साल बाद शिवसेना में 'घर वापसी', NCP (अजित पवार) को ठाणे में बड़ा झटका
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व सांसद आनंद परांजपे ने 14 मई 2026 को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में औपचारिक रूप से वापसी की — यह उनकी 14 साल के अंतराल के बाद 'घर वापसी' है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के मुख्य प्रवक्ता पद से सीधे शिवसेना की सदस्यता ग्रहण करने वाले परांजपे के इस कदम को महायुति गठबंधन के भीतर एक अहम राजनीतिक पुनर्गठन के रूप में देखा जा रहा है।
शामिल होने का समारोह और उपस्थित नेता
परांजपे को शिवसेना संसदीय दल के नेता श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर राज्य के मंत्री दादाजी भुसे और उदय सामंत भी उपस्थित रहे। समारोह में परांजपे ने स्पष्ट किया कि वह किसी पद या पुरस्कार की आकांक्षा के बिना पार्टी में लौटे हैं, और अपना पूरा ध्यान संगठनात्मक मज़बूती पर केंद्रित करेंगे।
परांजपे की राजनीतिक यात्रा
आनंद परांजपे का राजनीतिक सफर शिवसेना से ही शुरू हुआ था। उन्होंने 2008 में ठाणे से और 2009 में कल्याण से लोकसभा सदस्य के रूप में शिवसेना का प्रतिनिधित्व किया। 2009 की उनकी जीत में एकनाथ शिंदे की भूमिका को निर्णायक माना जाता है। इसके बाद वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में चले गए, जहाँ पहले शरद पवार और बाद में अजित पवार के नेतृत्व में एक दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहे।
NCP (अजित पवार गुट) को झटका
ठाणे क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) का एक प्रमुख चेहरा रहे परांजपे का यह प्रस्थान पार्टी के लिए नाज़ुक समय पर आया है। यह कदम ऐसे वक्त उठाया गया है जब विधान परिषद नामांकन को लेकर अजित पवार गुट के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई थीं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, परांजपे जैसे वरिष्ठ और संगठनात्मक रूप से मज़बूत नेता का जाना पार्टी की ठाणे-कल्याण बेल्ट में पकड़ को कमज़ोर कर सकता है।
शिंदे गुट की रणनीतिक बढ़त
परांजपे को अपने साथ लाकर शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना ने ठाणे-कल्याण क्षेत्र में अपनी जड़ें और गहरी कर ली हैं — यह वह इलाका है जहाँ परांजपे का स्थानीय जनाधार और संगठनात्मक नेटवर्क दशकों पुराना है। श्रीकांत शिंदे ने इस मौके पर कहा, 'परांजपे और शिंदे परिवारों के बीच एक गहरा और पुराना रिश्ता है। जैसे-जैसे पार्टी पूरे राज्य में अपना विस्तार करेगी, आनंद परांजपे के संगठनात्मक कौशल पार्टी के लिए एक बड़ी ताकत साबित होंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि शिवसेना ने हाल ही में आगामी संगठनात्मक चुनौतियों से निपटने की तैयारी के लिए एक लाख से अधिक बूथ-स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति की है।
परांजपे के अपने शब्द
परांजपे ने अपनी वापसी पर कहा, 'भले ही मैं दूसरी पार्टी में था, लेकिन मेरा डीएनए शिवसेना का ही रहा।' उन्होंने अपनी घर वापसी का मुख्य श्रेय उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की 'आम आदमी' वाली कार्यशैली को दिया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की आलोचना नहीं करेंगे और एनसीपी के साथ अपने जुड़ाव के दौरान पूरी निष्ठा से काम किया।
आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को महायुति के भीतर एक सुनियोजित पुनर्गठन के रूप में देख रहे हैं, जहाँ शिंदे गुट अगले चुनावी दौर से पहले खुद को 'असली' शिवसेना की विचारधारा का प्रमुख ध्वजवाहक के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है। परांजपे की वापसी से ठाणे और कल्याण क्षेत्र में शिवसेना के संगठनात्मक ढाँचे को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।