4 अक्टूबर 2026
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एशियन गेम्स 2026: चंबा की सीमा कुमारी ने 10,000 मीटर में जीता ब्रॉन्ज, भव्य स्वागत पर बोलीं — 'अब गोल्ड लाना है'

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एशियन गेम्स 2026: चंबा की सीमा कुमारी ने 10,000 मीटर में जीता ब्रॉन्ज, भव्य स्वागत पर बोलीं — 'अब गोल्ड लाना है'

सारांश

चंबा की धाविका सीमा कुमारी ने एशियन गेम्स 2026 में 10,000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज जीतकर लौटीं और घर पर ऐतिहासिक स्वागत पाया — लेकिन उनकी नज़र अगले गोल्ड पर है। TOPS और SAI समर्थन से अमेरिका में ओलंपिक चैंपियन एथलीटों के साथ ट्रेनिंग कर रहीं सीमा की यात्रा 2017 के यूथ एशिया ब्रॉन्ज से शुरू होकर अब राष्ट्रीय मंच तक पहुँची है।

मुख्य बातें

सीमा कुमारी ने आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
उन्होंने यह दौड़ 32 मिनट 50.05 सेकंड में पूरी की।
चंबा लौटने पर भव्य स्वागत हुआ; सीमा ने कहा — 'आज तक ऐसा स्वागत कभी नहीं हुआ था।' सीमा ने पदक का श्रेय एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया , SAI और TOPS को दिया; अमेरिका में ओलंपिक चैंपियन एथलीटों के साथ ट्रेनिंग का उल्लेख किया।
सीमा ने कहा — 'ब्रॉन्ज से पूरी तरह खुश नहीं, अब देश के लिए गोल्ड लाना है।' 2017 में यूथ एशिया में ब्रॉन्ज जीतने से शुरू हुई उनकी अंतरराष्ट्रीय सफलता की यात्रा जारी है।

हिमाचल प्रदेश की धाविका सीमा कुमारी ने आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। सीमा ने यह दौड़ 32 मिनट 50.05 सेकंड में पूरी करके पोडियम पर जगह बनाई। अपने गृहनगर चंबा लौटने पर उनका जोरदार और भावपूर्ण स्वागत हुआ।

चंबा में ऐतिहासिक स्वागत

एशियाई खेलों के मंच से पदक लेकर लौटीं सीमा का चंबा में वैसा ही भव्य स्वागत हुआ जैसा बड़े राज्यों के खिलाड़ियों को मिलता है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'जैसे कि आप दूसरे राज्यों में देखते होंगे, जब भी वहाँ के खिलाड़ी एयरपोर्ट से बाहर निकलते हैं तो उनका पूरा गाँव वहाँ पर इकट्ठा होता है और बैंड-बाजे के साथ उन्हें अपने घर गाँव तक वापस लेकर जाता है। मैं जब चंबा में आई तो मेरा भी बहुत मान-सम्मान हुआ। आज तक मेरा ऐसे कभी स्वागत नहीं हुआ था। ये मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।'

सीमा ने उन सभी का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके सम्मान में यह आयोजन किया। उन्होंने विशेष रूप से राइजिंग स्टार स्कूल के प्रधानाचार्य संजीव सूरी का उल्लेख करते हुए कहा कि वे 2017 से उनके साथ जुड़े हुए हैं।

2017 से शुरू हुई सफलता की यात्रा

सीमा ने बताया कि 2017 में यूथ एशिया में भी उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था, और उस समय कपिल भैया, मनोज कुमार मनु और संजीव सूरी ने सबसे पहले उन्हें सम्मानित किया था। उन्होंने कहा, 'आज मुझे चंबा और हिमाचल में काफी लोग जानते हैं। इस मेडल के बाद मुझे पूरे भारतवासियों ने बहुत ज़्यादा प्यार दिया है।' गौरतलब है कि इस ब्रॉन्ज से पूरी तरह संतुष्ट न होते हुए उन्होंने साफ़ कहा, 'मुझे अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाना है, क्योंकि ये ब्रॉन्ज है — मैं इससे इतना खुश नहीं हूँ।'

प्रशिक्षण और संस्थागत समर्थन

सीमा ने इस पदक का श्रेय एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, SAI और TOPS कार्यक्रम को दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें अमेरिका में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है, जहाँ वे ओलंपिक और विश्व चैंपियन एथलीटों के साथ अभ्यास करती हैं। उनके अनुसार, 'हम वहाँ उनके पैतरों का भी पता लगाते हैं' — यानी अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक और रणनीति को समझने का मौका मिलता है।

माँ और परिवार को समर्पित पदक

सीमा ने इस उपलब्धि में अपनी माँ का सबसे बड़ा योगदान बताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, 'मैं लंबे समय से माँ से भी नहीं मिली हूँ। इस मेडल के पीछे उनका बहुत बड़ा हाथ है। मैं उनका कभी अहसान नहीं चुका पाऊँगी।' उन्होंने अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए कहा कि यदि वे आज होते तो उन्हें भी बहुत गर्व होता। सीमा ने कहा, 'मेरे पूरे चंबावासियों को मुझ पर गर्व है — मेरे लिए इससे बड़ी खुशी की बात कुछ भी नहीं हो सकती।'

आगे का लक्ष्य

ब्रॉन्ज पदक के बावजूद सीमा की नज़रें स्पष्ट रूप से गोल्ड पर टिकी हैं। अमेरिका में ओलंपिक चैंपियन एथलीटों के साथ प्रशिक्षण और TOPS जैसे संस्थागत समर्थन के साथ, हिमाचल की यह बेटी आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में और ऊँची छलाँग लगाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि छोटे शहरों के उन एथलीटों की है जिन्हें TOPS और SAI जैसे कार्यक्रमों के बिना शायद अंतरराष्ट्रीय मंच भी नसीब न होता। ब्रॉन्ज से असंतुष्ट रहकर गोल्ड की माँग करना उस मानसिकता को दर्शाता है जो भारतीय एथलेटिक्स में अब धीरे-धीरे आ रही है। हालाँकि, असली सवाल यह है कि क्या इन्फ्रास्ट्रक्चर और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन भी उसी रफ़्तार से बढ़ रहा है जिस रफ़्तार से पदकों की उम्मीदें बढ़ रही हैं — और क्या हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के एथलीटों को लंबे समय तक परिवार से दूर रहने की कीमत चुकाने की मजबूरी को नीति-निर्माता गंभीरता से लेते हैं।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीमा कुमारी ने एशियन गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
सीमा कुमारी ने आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने यह दौड़ 32 मिनट 50.05 सेकंड में पूरी की।
सीमा कुमारी कहाँ से हैं और उनका प्रशिक्षण कहाँ होता है?
सीमा कुमारी हिमाचल प्रदेश के चंबा से हैं। TOPS कार्यक्रम के तहत उन्हें अमेरिका में ओलंपिक और विश्व चैंपियन एथलीटों के साथ प्रशिक्षण का अवसर मिलता है।
सीमा कुमारी का एशियन गेम्स में यह पहला पदक है?
नहीं, सीमा 2017 में यूथ एशिया में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। एशियन गेम्स 2026 का यह ब्रॉन्ज उनके करियर का ताज़ा और बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक है।
सीमा कुमारी का अगला लक्ष्य क्या है?
सीमा कुमारी ने स्पष्ट कहा है कि वे ब्रॉन्ज से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और अब भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहती हैं। अमेरिका में चल रहे उनके उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण को इसी दिशा में देखा जा रहा है।
सीमा कुमारी की सफलता में किन संस्थाओं का योगदान रहा?
सीमा ने एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, SAI और TOPS कार्यक्रम को इस पदक का श्रेय दिया है। इसके अलावा राइजिंग स्टार स्कूल के प्रधानाचार्य संजीव सूरी सहित कई स्थानीय सहयोगियों का भी उन्होंने आभार व्यक्त किया।
राष्ट्र प्रेस
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