एशियन गेम्स 2026: चंबा की सीमा कुमारी ने 10,000 मीटर में जीता ब्रॉन्ज, भव्य स्वागत पर बोलीं — 'अब गोल्ड लाना है'
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश की धाविका सीमा कुमारी ने आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। सीमा ने यह दौड़ 32 मिनट 50.05 सेकंड में पूरी करके पोडियम पर जगह बनाई। अपने गृहनगर चंबा लौटने पर उनका जोरदार और भावपूर्ण स्वागत हुआ।
चंबा में ऐतिहासिक स्वागत
एशियाई खेलों के मंच से पदक लेकर लौटीं सीमा का चंबा में वैसा ही भव्य स्वागत हुआ जैसा बड़े राज्यों के खिलाड़ियों को मिलता है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'जैसे कि आप दूसरे राज्यों में देखते होंगे, जब भी वहाँ के खिलाड़ी एयरपोर्ट से बाहर निकलते हैं तो उनका पूरा गाँव वहाँ पर इकट्ठा होता है और बैंड-बाजे के साथ उन्हें अपने घर गाँव तक वापस लेकर जाता है। मैं जब चंबा में आई तो मेरा भी बहुत मान-सम्मान हुआ। आज तक मेरा ऐसे कभी स्वागत नहीं हुआ था। ये मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।'
सीमा ने उन सभी का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके सम्मान में यह आयोजन किया। उन्होंने विशेष रूप से राइजिंग स्टार स्कूल के प्रधानाचार्य संजीव सूरी का उल्लेख करते हुए कहा कि वे 2017 से उनके साथ जुड़े हुए हैं।
2017 से शुरू हुई सफलता की यात्रा
सीमा ने बताया कि 2017 में यूथ एशिया में भी उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था, और उस समय कपिल भैया, मनोज कुमार मनु और संजीव सूरी ने सबसे पहले उन्हें सम्मानित किया था। उन्होंने कहा, 'आज मुझे चंबा और हिमाचल में काफी लोग जानते हैं। इस मेडल के बाद मुझे पूरे भारतवासियों ने बहुत ज़्यादा प्यार दिया है।' गौरतलब है कि इस ब्रॉन्ज से पूरी तरह संतुष्ट न होते हुए उन्होंने साफ़ कहा, 'मुझे अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाना है, क्योंकि ये ब्रॉन्ज है — मैं इससे इतना खुश नहीं हूँ।'
प्रशिक्षण और संस्थागत समर्थन
सीमा ने इस पदक का श्रेय एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, SAI और TOPS कार्यक्रम को दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें अमेरिका में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है, जहाँ वे ओलंपिक और विश्व चैंपियन एथलीटों के साथ अभ्यास करती हैं। उनके अनुसार, 'हम वहाँ उनके पैतरों का भी पता लगाते हैं' — यानी अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक और रणनीति को समझने का मौका मिलता है।
माँ और परिवार को समर्पित पदक
सीमा ने इस उपलब्धि में अपनी माँ का सबसे बड़ा योगदान बताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, 'मैं लंबे समय से माँ से भी नहीं मिली हूँ। इस मेडल के पीछे उनका बहुत बड़ा हाथ है। मैं उनका कभी अहसान नहीं चुका पाऊँगी।' उन्होंने अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए कहा कि यदि वे आज होते तो उन्हें भी बहुत गर्व होता। सीमा ने कहा, 'मेरे पूरे चंबावासियों को मुझ पर गर्व है — मेरे लिए इससे बड़ी खुशी की बात कुछ भी नहीं हो सकती।'
आगे का लक्ष्य
ब्रॉन्ज पदक के बावजूद सीमा की नज़रें स्पष्ट रूप से गोल्ड पर टिकी हैं। अमेरिका में ओलंपिक चैंपियन एथलीटों के साथ प्रशिक्षण और TOPS जैसे संस्थागत समर्थन के साथ, हिमाचल की यह बेटी आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में और ऊँची छलाँग लगाने की तैयारी में है।