शुभदीप घोष बने भारत के फील्डिंग कोच, एसीए ने असम के लाल को दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
असम के पूर्व क्रिकेटर और अनुभवी कोच शुभदीप घोष को भारतीय सीनियर पुरुष क्रिकेट टीम का फील्डिंग कोच नियुक्त किया गया है, जिस पर असम क्रिकेट एसोसिएशन (एसीए) ने रविवार, 2 अगस्त को उन्हें हार्दिक बधाई दी। गुवाहाटी से यह खबर असम के क्रिकेट जगत के लिए एक ऐतिहासिक पल के रूप में सामने आई है।
एसीए ने दी बधाई
असम क्रिकेट एसोसिएशन ने घोष को बधाई देते हुए कहा, 'असम क्रिकेट एसोसिएशन, भारतीय सीनियर पुरुष क्रिकेट टीम के फील्डिंग कोच के रूप में शुभदीप घोष की नियुक्ति पर उन्हें हार्दिक बधाई देता है।' एसीए ने इसे असम के क्रिकेट जगत के लिए सम्मान और गर्व का विषय बताया तथा कहा कि यह नियुक्ति पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के उभरते क्रिकेटरों और कोचों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
शुभदीप घोष का क्रिकेट सफर
घोष ने अपने खिलाड़ी जीवन में असम और रेलवे दोनों का प्रतिनिधित्व किया। खेल से संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे एक मज़बूत कोचिंग प्रोफाइल तैयार की। उन्होंने असम की सीनियर पुरुष टीम के कोच के रूप में काम करते हुए राज्य में क्रिकेट के विकास में अहम भूमिका निभाई।
इसके अतिरिक्त, घोष विभिन्न आयु वर्ग की भारतीय टीमों के साथ भी काम कर चुके हैं, जिससे उनके पास युवा और सीनियर दोनों स्तरों पर कोचिंग का व्यापक अनुभव है।
श्रीलंका सीरीज से होगी शुरुआत
भारतीय सीनियर पुरुष टीम के साथ शुभदीप घोष का पहला असाइनमेंट इस महीने के अंत में श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज होगी। यह सीरीज उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कोचिंग क्षमता साबित करने का पहला बड़ा अवसर होगी।
बीसीसीआई का सपोर्ट स्टाफ में बदलाव
गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने हाल ही में सपोर्ट स्टाफ के दो अहम सदस्यों — टी. दिलीप और रयान टेन डोशेट — को उनके अनुबंध समाप्त होने के बाद बदलने का निर्णय लिया था। रयान टेन डोशेट ने इंग्लैंड के व्हाइट-बॉल दौरे के बाद भारतीय टीम के असिस्टेंट कोच के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त किया था। इन बदलावों के बाद घोष की नियुक्ति से टीम के कोचिंग ढाँचे में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।
असम क्रिकेट के लिए मील का पत्थर
राष्ट्रीय टीम सेटअप में घोष का शामिल होना असम क्रिकेट के इतिहास में एक और मील का पत्थर है। एसीए के अनुसार, यह उपलब्धि यह साबित करती है कि पूर्वोत्तर भारत की प्रतिभाएँ राष्ट्रीय स्तर पर न केवल खेल सकती हैं, बल्कि देश की टीम को दिशा भी दे सकती हैं। आगामी श्रीलंका टेस्ट सीरीज के साथ घोष का यह नया अध्याय भारतीय क्रिकेट की फील्डिंग संस्कृति को नई ऊँचाई देने की संभावना रखता है।