24 सितंबर 2007: जोगिंदर-श्रीसंत के उस कैच ने भारत को बनाया पहला टी20 विश्व चैंपियन
सारांश
मुख्य बातें
24 सितंबर 2007 का वह ऐतिहासिक दिन — वांडरर्स स्टेडियम, जोहान्सबर्ग के मैदान पर भारत ने पाकिस्तान को 5 रनों से हराकर टी20 क्रिकेट के पहले विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। एमएस धोनी की अगुवाई में युवा खिलाड़ियों की इस टीम ने न सिर्फ एक मैच जीता, बल्कि क्रिकेट के एक नए फॉर्मेट को पूरी दुनिया में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाई। आज उस जीत के ठीक 19 साल पूरे हो रहे हैं।
मुकाबले का पूरा घटनाक्रम
धोनी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला लिया। गौतम गंभीर और युसूफ पठान ने पारी की शुरुआत की। पठान 8 गेंदों पर 15 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन गंभीर डटे रहे। उन्होंने 54 गेंदों पर 2 छक्के और 8 चौकों की मदद से 75 रनों की यादगार पारी खेली — जो उस फाइनल की सबसे बड़ी और सर्वाधिक निर्णायक पारी साबित हुई।
छठे नंबर पर उतरे रोहित शर्मा ने भी 16 गेंदों पर 30 रन जड़कर स्कोर को गति दी। टीम इंडिया ने 5 विकेट खोकर 157 रन बनाए और पाकिस्तान के सामने 158 रनों का लक्ष्य रखा।
पाकिस्तान की पारी और रोमांचक अंत
जवाब में पाकिस्तानी टीम 19.3 ओवर में 152 रन पर सिमट गई। भारत के लिए आर.पी. सिंह और इरफान पठान ने 3-3 विकेट झटके, जोगिंदर शर्मा ने 2 और एस. श्रीसंत ने 1 विकेट लिया।
आखिरी ओवर में नाटकीय मोड़ आया। 9 विकेट पर 145 रन बना चुकी पाकिस्तान को अंतिम ओवर में 13 रन चाहिए थे और भारत को केवल 1 विकेट। पाकिस्तान के लिए अकेले मिस्बाह उल हक टिके हुए थे, जो टीम को जीत के करीब ले जा रहे थे।
धोनी ने आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा को सौंपा — उस समय एक बड़े जोखिम भरा फ़ैसला माना गया। पहली गेंद वाइड गई। दूसरी वैध गेंद पर रन नहीं बना। तीसरी गेंद पर मिस्बाह ने छक्का जड़ दिया — अब 3 गेंदों पर 6 रन चाहिए थे। लेकिन अगली ही गेंद पर मिस्बाह ने फाइन लेग की दिशा में शॉट खेला, गेंद हवा में उठी और श्रीसंत ने वह यादगार कैच थामते हुए भारत को इतिहास के पन्नों में दर्ज कर दिया।
धोनी की कप्तानी — एक नई शुरुआत
यह वह दौर था जब टी20 क्रिकेट अभी अपनी पहचान बना रहा था। भारतीय टीम को इस फॉर्मेट में कमज़ोर दावेदार माना जा रहा था। एमएस धोनी की युवा टीम में गंभीर, युवराज सिंह, इरफान पठान, हरभजन सिंह और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी थे, जिनमें से कई अपने करियर के शुरुआती पड़ाव पर थे। इस जीत ने न केवल धोनी को भारत के सबसे भरोसेमंद कप्तानों में से एक की पहचान दी, बल्कि टी20 को एक वैश्विक घटना के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
गौरतलब है कि इसी जीत के बाद भारत में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की नींव पड़ी, जो आज दुनिया की सबसे मूल्यवान क्रिकेट लीग है।
भारत की टी20 विरासत
आज भारतीय टीम टी20 फॉर्मेट की सर्वाधिक सफल टीम है। टीम इंडिया इस फॉर्मेट में 200 जीत हासिल करने वाली दुनिया की पहली टीम बन चुकी है। साथ ही, भारत ने सर्वाधिक तीन टी20 विश्व कप — 2007, 2024 और 2026 — जीते हैं। वह यात्रा जोहान्सबर्ग के उस मैदान पर श्रीसंत के कैच से शुरू हुई थी, आज एक गौरवशाली अध्याय में तब्दील हो चुकी है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए 24 सितंबर 2007 भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सुनहरे पृष्ठों में से एक बना रहेगा।