जोगिंदर शर्मा जन्मदिन: 2007 टी20 विश्व कप फाइनल के हीरो, सिर्फ 8 मैचों का रहा इंटरनेशनल सफर
सारांश
मुख्य बातें
जोगिंदर शर्मा — वह नाम जो 2007 टी20 विश्व कप की हर चर्चा में अनिवार्य रूप से आता है। हरियाणा के रोहतक में 23 अक्टूबर 1983 को जन्मे इस ऑलराउंडर ने फाइनल के अंतिम ओवर में मिस्बाह उल हक को आउट कर भारत को पहली बार टी20 विश्व चैंपियन बनाया था। विडंबना यह रही कि यही उनका करियर का सबसे ऊँचा शिखर भी साबित हुआ — इसके बाद वे राष्ट्रीय टीम में वापस नहीं लौट सके।
शुरुआती संघर्ष और घरेलू क्रिकेट
सीमित संसाधनों के बावजूद जोगिंदर ने क्रिकेट को अपना लक्ष्य बनाया और कड़ी मेहनत से घरेलू सर्किट में खुद को साबित किया। मध्य प्रदेश के खिलाफ उनके डेब्यू मैच में उन्होंने 84 रन देकर 11 विकेट चटकाने के साथ-साथ 81 रन भी बनाए — एक दमदार ऑलराउंड शुरुआत। कुल 77 फर्स्ट-क्लास मैचों में उन्होंने 297 विकेट लिए और 2,804 रन बनाए, जो उनकी घरेलू क्रिकेट में उपयोगिता को साफ दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय पदार्पण और शुरुआती प्रदर्शन
जोगिंदर ने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में किया, जहाँ उन्होंने 8 ओवर में 28 रन देकर 1 विकेट लिया। टी20 डेब्यू 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ उस ऐतिहासिक मुकाबले में हुआ जिसमें युवराज सिंह ने स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में 6 छक्के लगाए थे। हालाँकि उस मैच में जोगिंदर का प्रदर्शन सामान्य रहा — उन्होंने 4 ओवर में 57 रन दिए और कोई विकेट नहीं चटकाया।
2007 टी20 विश्व कप फाइनल: वह यादगार ओवर
फाइनल में पाकिस्तान को आखिरी 6 गेंदों में 13 रन चाहिए थे और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने गेंद जोगिंदर को थमाकर सबको चौंका दिया। जोगिंदर ने एक छक्का खाया, लेकिन तीसरी गेंद पर मिस्बाह उल हक का विकेट लेकर भारत को पहला टी20 विश्व कप खिताब दिला दिया। यह ऐसे समय में आया जब धोनी का यह फैसला सबसे बड़ा जुआ माना जा रहा था — और जोगिंदर उस पर पूरी तरह खरे उतरे।
संक्षिप्त अंतरराष्ट्रीय करियर
उस ऐतिहासिक जीत के बावजूद जोगिंदर भारतीय टीम में स्थायी जगह नहीं बना सके। उन्होंने कुल 4 वनडे और 4 टी20 — यानी महज 8 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। वनडे में 1 विकेट और टी20 में 4 विकेट उनके अंतरराष्ट्रीय आँकड़े हैं। उनका अंतिम वनडे मुकाबला 24 जनवरी 2007 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला गया था। गौरतलब है कि टी20 विश्व कप का सबसे बड़ा हीरो बनने के बाद भी वे टीम में जगह नहीं बना सके — यह भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे दिलचस्प विडंबनाओं में से एक है।
क्रिकेट के बाद का सफर
क्रिकेट से संन्यास के बाद जोगिंदर शर्मा हरियाणा पुलिस में डीएसपी के पद पर कार्यरत हुए और उन्होंने समाज सेवा के क्षेत्र में भी काम किया। उनकी कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहती है कि एक ऐतिहासिक पल पूरे करियर को अमर कर सकता है।