धोनी के करियर को बदलने वाला गांगुली का वो एक फैसला — तीन ICC ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान
सारांश
मुख्य बातें
महेंद्र सिंह धोनी का नाम जब भी भारत के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट कप्तानों की चर्चा होती है, सबसे पहले आता है। बल्लेबाज़ी और कप्तानी — दोनों मोर्चों पर धोनी ने ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए जो भारतीय क्रिकेट इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज हो गए। लेकिन इस असाधारण सफ़र की नींव रखने में तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के एक साहसी फ़ैसले की अहम भूमिका रही।
रांची से रेलवे तक — धोनी का शुरुआती सफ़र
महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को रांची में हुआ। क्रिकेट से उनका परिचय उनके स्कूल के कोच केशव रंजन बनर्जी ने कराया। दरअसल, स्कूल की क्रिकेट टीम को एक विकेटकीपर की ज़रूरत थी और कोच बनर्जी की नज़र उस युवा धोनी पर पड़ी, जो फुटबॉल में गोलकीपर की भूमिका बख़ूबी निभा रहे थे। उन्होंने धोनी को विकेटकीपर के रूप में टीम में शामिल किया और यहीं से 'माही' का क्रिकेट प्रेम परवान चढ़ने लगा।
लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के बाद धोनी को रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी मिली। नौकरी के बाद भी वे मैदान पर अभ्यास जारी रखते थे। घरेलू क्रिकेट और भारत-ए टीम में उल्लेखनीय प्रदर्शन के दम पर उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिली।
शुरुआती नाकामी और गांगुली का भरोसा
दिसंबर 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज़ में धोनी का अंतरराष्ट्रीय डेब्यू निराशाजनक रहा — 3 पारियों में महज़ 19 रन। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ पहले वनडे में भी वे केवल 3 रन बनाकर पवेलियन लौटे। 4 मैचों में लगातार नाकामी के बाद माहौल ऐसा था कि धोनी को टीम से बाहर किया जा सकता था।
यहीं पर तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने वो फ़ैसला लिया जो धोनी के करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया। गांगुली ने न केवल धोनी पर भरोसा बनाए रखा, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे वनडे में उन्हें नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी के लिए प्रमोट किया। धोनी ने इस मौके को दोनों हाथों से थाम लिया और 123 गेंदों में 148 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर विश्व क्रिकेट में अपना लोहा मनवाया। गांगुली के उस एक फ़ैसले ने धोनी को एक नई पहचान दी और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
बल्लेबाज़ी के आँकड़े — एक विरासत
धोनी ने तीनों फ़ॉर्मेट मिलाकर भारत के लिए 538 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 17,266 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 6 शतक और वनडे में 10 शतक दर्ज हैं। फिनिशर के रूप में उनकी प्रतिष्ठा ने उन्हें आधुनिक क्रिकेट के सबसे विश्वसनीय बल्लेबाज़ों में शुमार किया।
कप्तानी का स्वर्णिम अध्याय — तीन ICC ट्रॉफियाँ
बतौर कप्तान धोनी का रिकॉर्ड अद्वितीय है। 2007 में उन्होंने भारत को पहला ICC T20 विश्व कप जिताया। 2008 में ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज़ जीती। फिर 2011 में 28 साल के लंबे इंतज़ार को खत्म करते हुए वनडे विश्व कप का खिताब भारत की झोली में डाला। 2013 में इंग्लैंड को फाइनल में हराकर ICC चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती।
यह ऐसे समय में आया जब भारतीय क्रिकेट एक नई पहचान की तलाश में था। धोनी दुनिया के एकमात्र कप्तान हैं जिन्होंने तीनों प्रमुख ICC ट्रॉफियाँ — T20 विश्व कप, वनडे विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी — जीती हैं। 15 अगस्त 2020 को धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, लेकिन उनकी विरासत भारतीय क्रिकेट की धड़कन में हमेशा के लिए बस गई।