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धोनी को नंबर-3 पर भेजने का गांगुली का दांव: तीन ICC ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान की कहानी

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धोनी को नंबर-3 पर भेजने का गांगुली का दांव: तीन ICC ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान की कहानी

सारांश

गांगुली का वह एक दांव — चार नाकाम मैचों के बाद भी धोनी पर भरोसा और नंबर-3 पर प्रमोशन — भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। उसी दिन जन्मी पारी ने दुनिया को वह कप्तान दिया जिसने तीन ICC ट्रॉफियाँ जीतकर इतिहास रचा।

मुख्य बातें

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई, 1981 को रांची में हुआ; स्कूल कोच केशव रंजन बनर्जी ने उन्हें फुटबॉल से क्रिकेट में लाया।
अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत में 4 मैचों में लगातार विफलता के बाद कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें नंबर-3 पर प्रमोट किया।
धोनी ने पाकिस्तान के खिलाफ 123 गेंदों में 148 रन बनाकर विश्व क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई।
तीनों प्रारूपों में कुल 538 मुकाबलों में 17,266 रन ; टेस्ट में 6 और वनडे में 10 शतक ।
धोनी ने 2007 T20 विश्व कप , 2011 वनडे विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर अनोखा त्रिगुट पूरा किया — दुनिया में यह उपलब्धि किसी और कप्तान के नाम नहीं।
15 अगस्त, 2020 को धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया।

महेंद्र सिंह धोनी को आज भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे सफल कप्तान माना जाता है — और इस यात्रा की नींव तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के एक साहसी फैसले से पड़ी थी। 7 जुलाई, 1981 को रांची में जन्मे धोनी ने बल्लेबाजी और कप्तानी दोनों में ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए, जो विश्व क्रिकेट में आज भी अटूट हैं। वे दुनिया के एकमात्र कप्तान हैं जिन्होंने तीनों प्रमुख ICC ट्रॉफियाँ जीती हैं।

फुटबॉल के गोलकीपर से क्रिकेट के विकेटकीपर तक

धोनी की क्रिकेट से पहली मुलाकात संयोग से हुई। स्कूल के कोच केशव रंजन बनर्जी की नज़र उन पर तब पड़ी जब वे फुटबॉल में शानदार गोलकीपिंग कर रहे थे। कोच बनर्जी ने उन्हें क्रिकेट टीम में विकेटकीपर के रूप में शामिल किया, और माही का खेल के प्रति लगाव दिन-ब-दिन गहरा होता गया।

लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद धोनी को रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी मिली। नौकरी के बाद भी वे मैदान पर अभ्यास जारी रखते थे। घरेलू क्रिकेट और भारत-ए में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम का बुलावा आया।

शुरुआती संघर्ष और गांगुली का निर्णायक भरोसा

अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत धोनी के लिए आसान नहीं रही। दिसंबर 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज में वे 3 पारियों में केवल 19 रन ही बना सके। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ पहले वनडे में भी वे 3 रन पर आउट हो गए। 4 मैचों में लगातार विफलता के बाद उनके टीम से बाहर होने की चर्चाएँ तेज़ हो गई थीं।

यहीं पर तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने वह फैसला किया जो भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। गांगुली ने धोनी पर अपना भरोसा बनाए रखा और पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे वनडे में उन्हें नंबर-3 पर प्रमोट किया। धोनी ने इस विश्वास को 123 गेंदों में 148 रनों की विस्फोटक पारी से चुकाया और विश्व क्रिकेट में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी।

बल्लेबाजी के आँकड़े: एक अटूट विरासत

धोनी ने तीनों प्रारूपों में भारत के लिए कुल 538 मुकाबले खेले और 17,266 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 6 शतक और वनडे में 10 शतक दर्ज हैं। विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में उनकी यह उपलब्धि आज भी अद्वितीय मानी जाती है।

कप्तानी में तीन ICC ट्रॉफियाँ — एक अनोखा कीर्तिमान

बतौर कप्तान धोनी का सफर बेमिसाल रहा। 2007 में उन्होंने भारत को पहला ICC T20 विश्व कप दिलाया। 2008 में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज भी भारत के नाम रही। फिर 2011 में धोनी की कप्तानी में भारत ने 28 साल का इंतज़ार खत्म करते हुए वनडे विश्व कप जीता। 2013 में इंग्लैंड को फाइनल में हराकर ICC चैंपियंस ट्रॉफी भी भारत की झोली में आई।

धोनी दुनिया के एकमात्र कप्तान हैं जिन्होंने T20 विश्व कप, वनडे विश्व कप और ICC चैंपियंस ट्रॉफी — तीनों ICC ट्रॉफियाँ जीती हैं। 15 अगस्त, 2020 को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की।

क्या होगा आगे: धोनी की विरासत

गांगुली के उस एक फैसले से शुरू हुई यात्रा ने भारतीय क्रिकेट को एक ऐसा नेतृत्व दिया जिसकी मिसाल आज तक नहीं मिली। धोनी के बाद भारतीय कप्तानों की हर पीढ़ी उनके उस मानदंड को छूने की कोशिश करती है जो उन्होंने रांची से रांची तक की यात्रा में स्थापित किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जो बात अनदेखी रह जाती है वह यह है कि यह सफर एक और कप्तान के साहस के बिना संभव नहीं था। गांगुली ने जब चार नाकाम मैचों के बाद भी धोनी को नंबर-3 पर उतारा, तो यह सिर्फ टैक्टिकल फैसला नहीं था — यह उस दौर की कप्तानी की परिपक्वता थी जो युवा प्रतिभा को दबाव में पालती थी। आज जब भारतीय क्रिकेट में 'फॉर्म बनाम टैलेंट' की बहस हर सीरीज के बाद छिड़ती है, गांगुली-धोनी का यह प्रसंग एक ज़रूरी आईना है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरव गांगुली ने धोनी के लिए कौन सा फैसला किया था?
पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में लगातार 4 मैचों में खराब प्रदर्शन के बावजूद गांगुली ने धोनी को टीम में बनाए रखा और दूसरे वनडे में उन्हें नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा। धोनी ने उस मौके पर 123 गेंदों में 148 रन बनाए और अपना करियर पलट दिया।
धोनी ने कितनी ICC ट्रॉफियाँ जीती हैं और कौन-सी?
धोनी ने कप्तान के रूप में तीन ICC ट्रॉफियाँ जीती हैं — 2007 में ICC T20 विश्व कप, 2011 में ICC वनडे विश्व कप, और 2013 में ICC चैंपियंस ट्रॉफी। वे दुनिया के एकमात्र कप्तान हैं जिन्होंने ये तीनों खिताब अपने नाम किए।
महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से कब संन्यास लिया?
धोनी ने 15 अगस्त, 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने अपने करियर में तीनों प्रारूपों में 538 मुकाबले खेले और 17,266 रन बनाए।
धोनी क्रिकेट में कैसे आए?
धोनी मूलतः फुटबॉल के गोलकीपर थे। स्कूल कोच केशव रंजन बनर्जी ने उनकी प्रतिभा देखकर उन्हें क्रिकेट टीम में विकेटकीपर के रूप में शामिल किया। इसके बाद घरेलू क्रिकेट और भारत-ए में अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिली।
धोनी के अंतरराष्ट्रीय करियर के प्रमुख बल्लेबाजी आँकड़े क्या हैं?
धोनी ने भारत के लिए तीनों प्रारूपों में 538 मुकाबलों में 17,266 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 6 शतक और वनडे में 10 शतक दर्ज हैं।
राष्ट्र प्रेस
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