6 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

धोनी के करियर को गांगुली ने दी नई उड़ान: तीन ICC ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
धोनी के करियर को गांगुली ने दी नई उड़ान: तीन ICC ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान

सारांश

गांगुली का वह एक फैसला — धोनी को नंबर 3 पर भेजना — भारतीय क्रिकेट की दिशा बदलने वाला निर्णय बन गया। 4 मैचों की विफलता के बाद भी भरोसा कायम रखा, और धोनी ने 148 रन की पारी से जवाब दिया। आगे चलकर वे दुनिया के एकमात्र कप्तान बने जिन्होंने तीन ICC ट्रॉफियाँ जीतीं।

मुख्य बातें

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई, 1981 को रांची में हुआ; स्कूल कोच केशव रंजन बनर्जी ने उन्हें विकेटकीपर बनाया।
शुरुआती 4 अंतरराष्ट्रीय मैचों में विफलता के बावजूद सौरव गांगुली ने धोनी को नंबर 3 पर बल्लेबाजी का मौका दिया।
पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे वनडे में धोनी ने 123 गेंदों में 148 रन की विस्फोटक पारी खेली।
धोनी ने 538 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 17,266 रन बनाए; टेस्ट में 6 और वनडे में 10 शतक ।
धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 टी20 विश्व कप , 2011 वनडे विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीती — तीनों ICC खिताब जीतने वाले दुनिया के एकमात्र कप्तान ।
धोनी ने 15 अगस्त, 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया।

महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तान माने जाते हैं — और इस सफर की नींव रखने में सौरव गांगुली के एक साहसी फैसले की अहम भूमिका रही। 7 जुलाई, 1981 को रांची में जन्मे धोनी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में बल्लेबाजी और कप्तानी दोनों मोर्चों पर ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अमिट हैं।

क्रिकेट से पहले का सफर

धोनी की क्रिकेट से पहचान संयोगवश हुई। उनके स्कूल के कोच केशव रंजन बनर्जी ने उन्हें फुटबॉल में गोलकीपर की भूमिका निभाते देखा और यह भाँप लिया कि उनके हाथ और रिफ्लेक्स विकेटकीपिंग के लिए भी उतने ही कारगर हो सकते हैं। कोच बनर्जी ने धोनी को स्कूल क्रिकेट टीम में बतौर विकेटकीपर शामिल किया, और माही का क्रिकेट के प्रति जुनून दिन-ब-दिन गहरा होता गया।

घरेलू क्रिकेट में निरंतर अच्छे प्रदर्शन के चलते धोनी को भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी मिली। नौकरी के बाद भी वे मैदान पर अभ्यास जारी रखते थे। भारत ए के लिए दमदार प्रदर्शन के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में बुलावा आया।

गांगुली का वह ऐतिहासिक फैसला

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धोनी की शुरुआत निराशाजनक रही। बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज की 3 पारियों में वे केवल 19 रन बना सके, और पाकिस्तान के खिलाफ पहले वनडे में भी महज 3 रन पर आउट हुए। 4 मैचों में लगातार विफलता के बाद उनके टीम से बाहर होने की चर्चाएँ तेज हो गई थीं।

तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने इस दबाव के बावजूद धोनी पर भरोसा बनाए रखा और पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे वनडे में उन्हें नंबर तीन पर बल्लेबाजी के लिए भेजा। यह फैसला ऐतिहासिक साबित हुआ — धोनी ने उस मैच में 123 गेंदों में 148 रन की विस्फोटक पारी खेलकर विश्व क्रिकेट में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी। गांगुली के उस एक निर्णय ने धोनी के करियर की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।

बल्लेबाजी के आँकड़े

धोनी ने तीनों प्रारूपों को मिलाकर भारत के लिए 538 मुकाबलों में 17,266 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 6 शतक और वनडे में 10 शतक दर्ज हैं। विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में यह आँकड़े उन्हें क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में स्थान दिलाते हैं।

कप्तानी का अजेय रिकॉर्ड

बतौर कप्तान धोनी का रिकॉर्ड बेमिसाल है। उनकी अगुवाई में भारत ने 2007 में टी20 विश्व कप जीता। 2008 में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज पर कब्जा किया। 2011 में धोनी ने 28 साल का इंतजार समाप्त करते हुए भारत को वनडे विश्व कप का ताज पहनाया। फिर 2013 में इंग्लैंड को फाइनल में पराजित कर चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती।

धोनी दुनिया के एकमात्र कप्तान हैं जिन्होंने तीन ICC ट्रॉफियाँ — टी20 विश्व कप, वनडे विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी — जीती हैं। यह उपलब्धि आज तक कोई अन्य कप्तान नहीं दोहरा सका।

संन्यास और विरासत

धोनी ने 15 अगस्त, 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उनकी विरासत केवल आँकड़ों में नहीं, बल्कि उस नेतृत्व शैली में भी है जिसने एक पीढ़ी के क्रिकेटरों को प्रेरित किया। गांगुली के उस एक फैसले ने जिस प्रतिभा को मंच दिया, वह भारतीय क्रिकेट की सबसे चमकदार कहानियों में से एक बन गई।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस नेतृत्व-दृष्टि की भी है जो गांगुली ने दिखाई — दबाव में किसी युवा खिलाड़ी पर भरोसा बनाए रखना आसान नहीं होता। यह उल्लेखनीय है कि भारतीय क्रिकेट में 'मैन-मैनेजमेंट' की चर्चा अक्सर धोनी तक सीमित रहती है, जबकि उनके करियर की नींव रखने वाले गांगुली का योगदान उतना रेखांकित नहीं होता। तीन ICC ट्रॉफियों का यह रिकॉर्ड आज भी अटूट है और यह सवाल उठाता है कि क्या आधुनिक भारतीय क्रिकेट में कप्तानों को वही स्वायत्तता मिलती है जो गांगुली के युग में थी। धोनी की विरासत का असली पाठ शायद यही है — सही समय पर सही इंसान पर भरोसा करना।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धोनी दुनिया के एकमात्र कप्तान कैसे बने जिन्होंने तीन ICC ट्रॉफियाँ जीतीं?
धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 में टी20 विश्व कप, 2011 में वनडे विश्व कप और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती। ये तीनों प्रमुख ICC खिताब एक ही कप्तान के नेतृत्व में जीतना क्रिकेट इतिहास में अब तक केवल धोनी ने ही संभव किया है।
सौरव गांगुली ने धोनी के लिए कौन सा फैसला लिया था?
पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में लगातार 4 मैचों में विफलता के बावजूद गांगुली ने धोनी को दूसरे वनडे में नंबर 3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा। धोनी ने 123 गेंदों में 148 रन की पारी खेलकर इस विश्वास को सही साबित किया।
महेंद्र सिंह धोनी का अंतरराष्ट्रीय करियर कब समाप्त हुआ?
धोनी ने 15 अगस्त, 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने 538 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 17,266 रन बनाए।
धोनी क्रिकेट में कैसे आए?
धोनी के स्कूल कोच केशव रंजन बनर्जी ने उन्हें फुटबॉल में गोलकीपिंग करते देखकर विकेटकीपर के रूप में क्रिकेट टीम में शामिल किया। इसके बाद घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें भारत ए और फिर राष्ट्रीय टीम में जगह मिली।
धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कितने शतक लगाए?
धोनी ने टेस्ट क्रिकेट में 6 और वनडे में 10 शतक लगाए। तीनों प्रारूपों को मिलाकर उन्होंने 538 मुकाबलों में कुल 17,266 रन बनाए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 घंटे पहले
  2. 6 घंटे पहले
  3. 6 घंटे पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले