नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की मौत पर पंजाब सरकार घिरी, BJP विधायक अश्वनी शर्मा का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं पठानकोट के विधायक अश्वनी शर्मा ने 22 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उनका आरोप है कि सरकार विधानसभा के विशेष सत्र को शुरू होते ही स्थगित कर जवाबदेही से भाग रही है, और नशा विरोधी तीन कार्यकर्ताओं की मौत के सवालों से मुँह फेर रही है।
विधानसभा स्थगन पर सवाल
विधायक शर्मा ने कहा कि विशेष सत्र का एजेंडा पहले से तय था, लेकिन जैसे ही स्पीकर सदन में आए, श्रद्धांजलि दी गई और पूरे दिन के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई। उनके अनुसार, यह सत्र शुरू होने के 'कुछ ही मिनटों' के भीतर हुआ। उन्होंने इसे विपक्ष की जाँच-पड़ताल और जनता के सवालों से बचने की सुनियोजित कोशिश करार दिया।
तीन नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की मौत का मामला
शर्मा के अनुसार, बीते एक महीने में तीन नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की संदिग्ध मौतें हुई हैं — मानसा में परविंदर सिंह झोटा, संगरूर में गुलजार सिंह और बटाला में बिक्रमजीत सिंह। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में सच्चाई सामने लाने की बजाय सरकार मुद्दे को दबाने में लगी है। उन्होंने राज्य सरकार से माँग की कि वह इन तीनों मौतों के मामलों में पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करे।
कानून-व्यवस्था पर चिंता
भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि पूरे पंजाब में भय का वातावरण बना हुआ है और आम नागरिक खुद को सुरक्षित नहीं समझ रहे। उनका कहना है कि जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के बजाय पुलिस अपने थानों की हिफाज़त में ही व्यस्त है। गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर राज्य में व्यापक चिंता है।
राज्य कर्मचारियों की माँगें
शर्मा ने सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि कई दौर की बैठकों के बावजूद राज्य कर्मचारियों को पूरा महंगाई भत्ता (DA) नहीं मिला है और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की माँग भी अधूरी पड़ी है। उन्होंने सरकार पर अपने कर्मचारियों को धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा उनकी जायज माँगों के साथ 'मजबूती से खड़ी' है।
आगे क्या होगा
विधायक शर्मा ने पंजाब सरकार से अपील की कि वह जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचना बंद करे, तीन नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की मौत के मामलों में स्पष्ट जवाब दे और कर्मचारियों की लंबित शिकायतों का समाधान करे। विशेष सत्र की कार्यवाही के अगले चरण पर सबकी नज़रें टिकी हैं, और विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह सवाल पूछना जारी रखेगा।