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संजू सैमसन का खुलासा: दिल्ली ट्रायल में रिजेक्शन के बाद पिता ने 3 दिन में पैक करवाया सामान, केरल से बदली किस्मत

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संजू सैमसन का खुलासा: दिल्ली ट्रायल में रिजेक्शन के बाद पिता ने 3 दिन में पैक करवाया सामान, केरल से बदली किस्मत

सारांश

दिल्ली के ट्रायल में नाम न आने के बाद संजू सैमसन के पिता ने तीन दिन में ट्रेन का टिकट बुक किया और पूरा परिवार केरल रवाना हो गया — यही वह मोड़ था जिसने एक गली क्रिकेटर को टी20 विश्व कप 2026 का चैंपियन बनाया।

मुख्य बातें

संजू सैमसन ने जियोस्टार के शो 'सुपरस्टार्स' में अपने क्रिकेट सफर की अनसुनी कहानी साझा की।
दिल्ली राज्य टीम के ट्रायल में दो-तीन बार कैंप तक पहुंचने के बावजूद सैमसन को जगह नहीं मिली।
ट्रायल में नाम न आने के उसी दिन पिता विश्वनाथन ने 3 दिन में परिवार को केरल शिफ्ट करने का फैसला किया।
उस समय सैमसन महज छठी कक्षा में थे; माँ ने दसवीं तक रुकने की बात कही थी।
सैमसन ने जीटीबी नगर की पुलिस कॉलोनी में गली क्रिकेट से शुरुआत की; पिता दिल्ली पुलिस फुटबॉल टीम में थे।
टी20 विश्व कप 2026 में भारत की चैंपियनशिप में सैमसन ने यादगार भूमिका निभाई।

विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने बताया कि टी20 विश्व कप 2026 में भारत की चैंपियनशिप में अहम भूमिका निभाने से पहले उनके करियर का सबसे निर्णायक मोड़ एक ट्रायल की विफलता थी — जब दिल्ली राज्य क्रिकेट टीम में जगह न मिलने के बाद उनके पिता विश्वनाथन ने महज तीन दिन में परिवार को केरल शिफ्ट करने का फैसला कर लिया। सैमसन ने कहा कि उनके पिता का यह साहसिक निर्णय उनके क्रिकेट जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

दिल्ली से क्रिकेट का सफर

सैमसन ने शनिवार को जियोस्टार के शो 'सुपरस्टार्स' में साझा किया कि जीटीबी नगर की पुलिस कॉलोनी में पले-बढ़े होने के कारण क्रिकेट उनकी रगों में उतरा। उनके पिता दिल्ली पुलिस फुटबॉल टीम में थे और सुबह-शाम अभ्यास पर जाते थे। सैमसन ने कहा, 'उसी समय से मुझे खेल से प्यार हो गया। मुझे लगा कि मैं एक दिन खिलाड़ी बनना चाहता हूं।' पुलिस क्वार्टर की गलियों में टेनिस बॉल से शुरू हुई गली क्रिकेट ने उनकी प्रतिभा को पहली पहचान दी।

ट्रायल की विफलता और पिता का ऐतिहासिक फैसला

स्कूल के दिनों में सैमसन ने डीडीसीए जैकेट पहने दोस्तों को देखकर दिल्ली का प्रतिनिधित्व करने का सपना पाला। उन्होंने ट्रायल दिए, स्टेट कैंप में भाग लिया और रन भी बनाए — लेकिन दो-तीन बार कैंप तक पहुंचने के बावजूद टीम की सूची में उनका नाम नहीं आया। सैमसन ने बताया, 'हम चुपचाप घर लौट आए। जैसे ही हम घर पहुंचे, मेरे पापा ने मेरी मां से कहा, हमें केरल जाना होगा। हम शिफ्ट हो रहे हैं।' जब माँ ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए दसवीं तक रुकने की बात कही, तो पिता का जवाब था — 'नहीं, हमें अभी जाना है। अपना सामान पैक करो। मैं तीन दिन में टिकट बुक कर रहा हूं।' गौरतलब है कि उस समय सैमसन महज छठी कक्षा में थे।

केरल पहुंचकर बदली तकदीर

ट्रेन से केरल पहुंचने के बाद सैमसन ने केरल राज्य टीम के लिए क्रिकेट खेलना शुरू किया। यह वही राह थी जिसने उन्हें अंततः भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचाया। सैमसन ने कहा, 'इस तरह केरल स्टेट टीम के लिए मेरा क्रिकेट का सफर शुरू हुआ।' यह ऐसे समय में आया जब दिल्ली में प्रतिस्पर्धा असाधारण रूप से कठिन थी और छोटे राज्यों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए अवसर की खिड़कियाँ अपेक्षाकृत खुली थीं।

फिरोज शाह कोटला की यादगार शाम

सैमसन ने अरुण जेटली स्टेडियम (तत्कालीन फिरोज शाह कोटला) में बचपन के एक अभ्यास सत्र की भावुक याद भी साझा की। उनके पिता की वहां पुलिस ड्यूटी थी और उन्होंने किसी से अनुरोध कर पूरे परिवार को नेट्स पर एक घंटा अभ्यास करवाया। सैमसन ने कहा, 'हम सब अपने पूरे सफेद कपड़ों में तैयार हुए और बस से फिरोज शाह कोटला गए। मेरे भाई, पापा और मैंने एक घंटे तक नेट्स में अभ्यास किया।' उन्होंने स्वीकार किया कि आजकल इस तरह की अनुमति मिलना संभव नहीं होती।

पिता की दूरदर्शिता और क्रिकेट का चुनाव

सैमसन ने बताया कि उनके पिता ने कभी उन पर फुटबॉल थोपने की कोशिश नहीं की, हालांकि वे स्वयं फुटबॉलर थे। पिता का कहना था — 'मैंने तुम्हें बैटिंग करते देखा और मुझे लगा कि तुममें प्रतिभा है।' इसी दूरदर्शिता के चलते उन्होंने सैमसन और उनके भाई दोनों को क्रिकेट की राह दिखाई। आज टी20 विश्व कप 2026 के विजेता भारतीय दल के अहम सदस्य के रूप में सैमसन की यह यात्रा उस एक रिजेक्शन की सबसे बड़ी जवाब है जो उन्हें दिल्ली में मिली थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय क्रिकेट की उस संरचनात्मक विडंबना की है जहाँ दिल्ली जैसे बड़े केंद्रों में प्रतिभा अक्सर भीड़ में दब जाती है। एक पिता का तात्कालिक निर्णय जो सिस्टम की विफलता का जवाब था, आज चैंपियन बनाने वाला फैसला कहलाता है। यह सवाल उठाता है कि कितने संजू सैमसन उस सूची में नाम न आने के बाद क्रिकेट छोड़ देते हैं — क्योंकि हर परिवार के पास केरल जाने का साहस या संसाधन नहीं होता।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजू सैमसन दिल्ली से केरल क्यों गए?
दिल्ली राज्य क्रिकेट टीम के ट्रायल में बार-बार जगह न मिलने के बाद सैमसन के पिता विश्वनाथन ने परिवार को केरल शिफ्ट करने का फैसला किया, ताकि सैमसन केरल के लिए क्रिकेट खेल सकें। यह फैसला ट्रायल की सूची आने के उसी दिन लिया गया था।
संजू सैमसन के पिता विश्वनाथन कौन हैं?
विश्वनाथन दिल्ली पुलिस फुटबॉल टीम में थे और जीटीबी नगर की पुलिस कॉलोनी में तैनात थे। उन्होंने संजू की बल्लेबाजी में प्रतिभा पहचानकर उन्हें और उनके भाई को फुटबॉल की बजाय क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया।
संजू सैमसन ने टी20 विश्व कप 2026 में कैसा प्रदर्शन किया?
टी20 विश्व कप 2026 में संजू सैमसन ने भारत की चैंपियनशिप में यादगार भूमिका निभाई। स्रोत में विस्तृत आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन उनके योगदान को भारत की जीत के लिए अहम बताया गया है।
संजू सैमसन ने क्रिकेट कहाँ से शुरू किया?
सैमसन ने दिल्ली के जीटीबी नगर की पुलिस कॉलोनी में टेनिस बॉल से गली क्रिकेट खेलकर शुरुआत की। बाद में केरल जाने के बाद उन्होंने केरल राज्य टीम के लिए क्रिकेट खेला और वहीं से उनका पेशेवर करियर आकार लेने लगा।
संजू सैमसन ने अपनी कहानी कहाँ सुनाई?
सैमसन ने यह कहानी शनिवार को जियोस्टार के शो 'सुपरस्टार्स' में साझा की, जिसमें उन्होंने अपने बचपन, दिल्ली के ट्रायल और केरल शिफ्ट होने की पूरी यात्रा विस्तार से बताई।
राष्ट्र प्रेस
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