वेदा कृष्णमूर्ति का जन्मदिन: कराटे ब्लैक बेल्ट से भारतीय क्रिकेट की 'एक्सप्रेस बैटर' तक का सफर
सारांश
मुख्य बातें
वेदा कृष्णमूर्ति — भारतीय महिला क्रिकेट की वह विस्फोटक बल्लेबाज़, जिन्होंने कर्नाटक के एक छोटे शहर से निकलकर दुनिया के बड़े स्टेडियमों तक अपना नाम रोशन किया — आज 16 अक्टूबर को अपना 34वाँ जन्मदिन मना रही हैं। उनकी यात्रा महज़ क्रिकेट तक सीमित नहीं रही; यह एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसने कराटे के अखाड़े से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान तक हर चुनौती को अपनी शर्तों पर स्वीकार किया।
चिकमंगलुरु से शुरू हुई कहानी
16 अक्टूबर 1992 को कर्नाटक के चिकमंगलुरु में जन्मी वेदा मात्र तीन साल की उम्र से क्रिकेट के साथ जुड़ी रहीं। बचपन में परिवार के दबाव में उन्होंने कराटे की ट्रेनिंग भी ली, भले ही यह खेल उन्हें पसंद नहीं था। अनुशासन और ज़िद के बल पर उन्होंने 12 साल की उम्र में कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल किया — एक उपलब्धि जो उनके अदम्य स्वभाव की झलक देती है।
13 साल की उम्र में वेदा ने क्रिकेट की विधिवत ट्रेनिंग शुरू की और फिर इसी खेल को अपनी ज़िंदगी बना लिया। उनके गृहनगर कदुर की संकरी गलियाँ एक दिन दुनिया के बड़े स्टेडियमों तक फैल जाएंगी — यह शायद उन्होंने तब नहीं सोचा था।
अंतरराष्ट्रीय करियर: आँकड़े और उपलब्धियाँ
वेदा ने जून 2011 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 मैच से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इसी महीने इंग्लैंड के खिलाफ उनका वनडे करियर भी आरंभ हुआ। लगभग 10 साल के अंतरराष्ट्रीय सफर में उन्होंने भारत के लिए 48 वनडे और 76 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले।
वनडे में वेदा ने 829 रन और टी20 में 875 रन बनाए। वनडे करियर में उनके नाम 8 अर्धशतक दर्ज हैं। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 8 मार्च 2020 को हुआ था।
यादगार पारी और विश्व कप की विरासत
2017 महिला वनडे विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ वेदा ने 45 गेंदों पर 70 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली — उनके करियर की सबसे चमकदार पारियों में से एक। यह पारी उनकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी शैली का प्रतीक बन गई।
वेदा उस ऐतिहासिक 2017 वनडे विश्व कप फाइनल खेलने वाली भारतीय टीम की सदस्य थीं और 2020 टी20 विश्व कप के फाइनल में भी उन्होंने टीम का प्रतिनिधित्व किया। घरेलू मैदान से परे, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
भावनात्मक विदाई और संन्यास
जुलाई 2025 में वेदा कृष्णमूर्ति ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों को औपचारिक विदाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा: 'एक छोटे शहर की लड़की, जिसके सपने बड़े थे। कदुर में यह सब शुरू हुआ। जब मैंने बल्ला उठाया था, तो सिर्फ इतना पता था कि इस खेल से मुझे प्यार है। कहाँ तक जाऊंगी, इसका अंदाजा नहीं था।'
उन्होंने आगे जोड़ा: 'मुझे गर्व है कि संकरी गलियों से दुनिया के बड़े स्टेडियमों तक खेलने का मौका मिला। क्रिकेट ने मुझे करियर से बढ़कर बहुत कुछ दिया। इसने मुझे सिखाया कि कैसे लड़ना है, कैसे गिरना है, और कैसे खुद को साबित करना है। आज, पूरे दिल से, मैं इस अध्याय को विराम दे रही हूं।'
संन्यास के बाद: नया अवतार
मैदान छोड़ने के बाद वेदा कृष्णमूर्ति एक सफल क्रिकेट विश्लेषक के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं। खेल की गहरी समझ और स्पष्ट अभिव्यक्ति ने उन्हें इस भूमिका में भी लोकप्रिय बनाया है। कदुर की वह लड़की आज भी क्रिकेट की दुनिया में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है — बस अब बल्ले की जगह माइक उनके हाथ में है।