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विंबलडन ग्रास कोर्ट का विज्ञान: 1877 से आज तक, जानिए क्यों है यह टेनिस की सबसे कठिन सतह

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विंबलडन ग्रास कोर्ट का विज्ञान: 1877 से आज तक, जानिए क्यों है यह टेनिस की सबसे कठिन सतह

सारांश

1877 में शुरू हुआ विंबलडन आज भी दुनिया का एकमात्र घास-आधारित ग्रैंड स्लैम है। 2001 से 100% बारहमासी राईग्रास, कम घर्षण, फिसलन भरी सतह और बदलते उछाल ने इसे टेनिस की सबसे अनूठी और कठिन परीक्षा बनाए रखा है।

मुख्य बातें

विंबलडन की शुरुआत 1877 में हुई — यह दुनिया का सबसे पुराना और एकमात्र घास-आधारित ग्रैंड स्लैम है।
2001 से कोर्ट में 100% बारहमासी राईग्रास का उपयोग होता है; पहले 70% राईग्रास और 30% रेड फेस्क्यू का मिश्रण था।
सेंटर कोर्ट पर 9,709 वर्ग फुट घास है; कुल 17 चैंपियनशिप कोर्ट और 20 अभ्यास कोर्ट हैं।
घास पर घर्षण कम होने से गेंद नीची और तेज़ रहती है — यह सभी ग्रैंड स्लैम में सबसे फिसलन भरी सतह है।
तापमान, नमी और घास के घिसने से गेंद का उछाल टूर्नामेंट के दौरान लगातार बदलता रहता है।
ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब हर वर्ष सितंबर में सभी कोर्ट का नवीनीकरण करता है।

विंबलडन — दुनिया का सबसे पुराना और सर्वाधिक प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टेनिस टूर्नामेंट — घास की एक ऐसी अनूठी सतह पर खेला जाता है जो इसे बाकी सभी प्रमुख टूर्नामेंटों से अलग करती है। 1877 में शुरू हुआ यह टूर्नामेंट आज भी एकमात्र ग्रैंड स्लैम है जो पूरी तरह घास पर आयोजित होता है, और इसी वजह से यह खिलाड़ियों के लिए तकनीकी और शारीरिक दोनों दृष्टियों से सबसे चुनौतीपूर्ण मंच बना हुआ है।

घास की सतह का इतिहास और विकास

गौरतलब है कि फ्रेंच ओपन को छोड़कर अन्य सभी ग्रैंड स्लैम इवेंट्स कभी न कभी घास पर खेले गए हैं, लेकिन कालांतर में उन्हें ग्रीन क्ले, हार्ड कोर्ट और क्ले कोर्ट पर स्थानांतरित कर दिया गया। विंबलडन अकेला ऐसा ग्रैंड स्लैम है जिसने अपनी मूल सतह को बरकरार रखा।

साल 2001 से पहले विंबलडन के कोर्ट में 70 प्रतिशत राईग्रास और 30 प्रतिशत रेड फेस्क्यू घास का मिश्रण उपयोग किया जाता था। इसके बाद ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब ने इसे 100 प्रतिशत बारहमासी राईग्रास में बदल दिया — एक ऐसी किस्म जो हर मौसम में हरी बनी रहती है। यह ऐसी दुर्लभ सतहों में से एक है जिस पर कई पेशेवर खिलाड़ी अपने पूरे करियर में कभी अभ्यास तक नहीं कर पाते।

कोर्ट की देखभाल और तकनीकी तैयारी

कोर्ट की निचली मिट्टी का सख्त और शुष्क रहना अनिवार्य है, ताकि खेल के दौरान सतह को नुकसान न पहुँचे। इसके लिए कोर्ट को नियमित रूप से रोल किया जाता है और ढककर रखा जाता है। ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब प्रत्येक वर्ष सितंबर में सभी कोर्ट का पूर्ण नवीनीकरण करता है।

विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर 9,709 वर्ग फुट की घास है। इसके अतिरिक्त 17 चैंपियनशिप कोर्ट और 20 घास के अभ्यास कोर्ट हैं — जो इस टूर्नामेंट के पैमाने और तैयारी की गहराई को दर्शाते हैं।

घास पर गेंद और खिलाड़ी का व्यवहार

घास के कोर्ट पर घर्षण अन्य सतहों की तुलना में काफी कम होता है। गेंद के उछाल के दौरान अधिक ऊर्जा अवशोषित हो जाती है, जिससे गेंद नीची और तेज़ रहती है। इसका सीधा अर्थ है कि खिलाड़ी को गेंद तक पहुँचने के लिए अपने शरीर को लगातार नीचे रखना पड़ता है — जो शारीरिक रूप से अत्यंत थका देने वाला होता है।

यह सतह खिलाड़ियों के लिए सभी ग्रैंड स्लैम में सबसे अधिक फिसलन भरी मानी जाती है। तापमान कम होने पर घास के नीचे की मिट्टी और ठोस हो जाती है, जिससे गेंद की गति और बढ़ जाती है। वहीं, नमी गेंद की रफ्तार को कम कर देती है और फिसलन को और खतरनाक बना देती है।

टूर्नामेंट के दौरान बदलती सतह

यह ऐसे समय में और भी जटिल हो जाता है जब शुरुआती दौर में घास कम घिसी होती है — तब फिसलन अधिक होती है और गेंद का व्यवहार अप्रत्याशित। जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ता है, घास घिसती जाती है और मिट्टी के बड़े पैच उभरने लगते हैं। इससे गेंद का उछाल अनिश्चित हो जाता है, जो खिलाड़ियों की रणनीति को लगातार बदलने पर मजबूर करता है।

घास की इस प्रकृति के कारण आक्रामक और तेज़ सर्विस-आधारित खेल यहाँ अधिक प्रभावी रहता है, क्योंकि तेज़ गति की गेंद के सामने प्रतिद्वंद्वी के लिए पूरा कोर्ट कवर करना बेहद कठिन हो जाता है। यही कारण है कि विंबलडन के इतिहास में बड़े सर्वर और नेट-आक्रमण करने वाले खिलाड़ियों का दबदबा रहा है।

विंबलडन की अनूठी विरासत

148 से अधिक वर्षों की यात्रा में विंबलडन ने अपनी घास की सतह को न केवल बचाए रखा, बल्कि उसे वैज्ञानिक सटीकता के साथ और बेहतर बनाया है। यह टूर्नामेंट आने वाले दशकों में भी टेनिस की सबसे कठिन और सबसे सम्मानित परीक्षा बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उससे कहीं अधिक एक सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है जिसे दशकों के शोध और प्रयोग से परिष्कृत किया गया है। 2001 में 100% राईग्रास की ओर बदलाव एक महत्वपूर्ण तकनीकी निर्णय था, जिसने खेल की गति और प्रकृति को स्थायी रूप से प्रभावित किया। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि टूर्नामेंट के शुरुआती और अंतिम दौर में सतह की प्रकृति इतनी भिन्न होती है कि व्यावहारिक रूप से यह दो अलग-अलग सतहों पर खेलने जैसा है — और यही कारण है कि विंबलडन के शुरुआती दौर में बड़े उलटफेर अधिक होते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विंबलडन में किस प्रकार की घास का उपयोग होता है?
विंबलडन में 2001 से 100% बारहमासी राईग्रास का उपयोग होता है, जो हर मौसम में हरी बनी रहती है। इससे पहले 70% राईग्रास और 30% रेड फेस्क्यू का मिश्रण प्रयोग किया जाता था।
विंबलडन की शुरुआत कब हुई और यह अन्य ग्रैंड स्लैम से अलग क्यों है?
विंबलडन की शुरुआत 1877 में हुई और यह दुनिया का सबसे पुराना ग्रैंड स्लैम है। यह एकमात्र ग्रैंड स्लैम है जो आज भी पूरी तरह घास की सतह पर खेला जाता है — अन्य सभी टूर्नामेंट हार्ड कोर्ट या क्ले कोर्ट पर स्थानांतरित हो चुके हैं।
घास के कोर्ट पर खेलना इतना कठिन क्यों होता है?
घास पर घर्षण कम होने से गेंद नीची और तेज़ रहती है, जिससे खिलाड़ी को शरीर को लगातार नीचे रखना पड़ता है। यह सभी ग्रैंड स्लैम में सबसे फिसलन भरी सतह है और तापमान व नमी के अनुसार गेंद का व्यवहार बदलता रहता है।
विंबलडन के कोर्ट की देखभाल कैसे होती है?
ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब प्रत्येक वर्ष सितंबर में सभी कोर्ट का पूर्ण नवीनीकरण करता है। सतह को सूखा और मजबूत बनाए रखने के लिए कोर्ट को नियमित रूप से रोल किया जाता है और ढककर रखा जाता है।
विंबलडन में टूर्नामेंट के दौरान कोर्ट की सतह कैसे बदलती है?
जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ता है, घास घिसती जाती है और मिट्टी के बड़े पैच बन जाते हैं, जिससे गेंद का उछाल अनिश्चित हो जाता है। शुरुआती दौर में घास कम घिसी होती है, इसलिए फिसलन अधिक होती है और खेल अधिक अप्रत्याशित रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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