वर्ल्ड जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में जगशेर सिंह खंगुरा ने जीता कांस्य, पंजाब के पहले ऐसे खिलाड़ी बने
सारांश
मुख्य बातें
जगशेर सिंह खंगुरा ने मिस्र में आयोजित वर्ल्ड जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 के बॉयज सिंगल्स में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। नाभा, पंजाब के इस युवा शटलर ने यह उपलब्धि हासिल कर वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले पहले पंजाबी खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया। उनकी इस सफलता पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बधाई दी है।
मुख्य घटनाक्रम
भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जगशेर सिंह खंगुरा की पदक के साथ तस्वीर साझा करते हुए बधाई संदेश लिखा। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, 'पंजाब और पंजाब में बैडमिंटन के लिए यह खुशी और गर्व की बात है कि नाभा के जगशेर सिंह खंगुरा ने मिस्र में हुई वर्ल्ड जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता है।' मुख्यमंत्री ने खिलाड़ी के माता-पिता और उनके कोच को भी दिल से बधाई दी।
सेमीफाइनल में कैसा रहा मुकाबला
बॉयज सिंगल्स सेमीफाइनल में जगशेर का सामना इंडोनेशिया के रादित्य बायू वर्धना से हुआ। बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, खंगुरा ने पहला गेम हारने के बाद वापसी करते हुए मुकाबले को तीसरे और निर्णायक गेम तक खींचा। हालांकि, 49 मिनट तक चले इस संघर्षपूर्ण मुकाबले में उन्हें 6-15, 15-13, 3-15 से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
सेमीफाइनल में कैसे पहुँचे खंगुरा
सेमीफाइनल से पहले खंगुरा ने चीनी ताइपे के युआन-स्यू झुआंग को 48 मिनट में 6-15, 17-15, 15-12 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी। इस जीत के साथ वे इस प्रतियोगिता में पोडियम पर स्थान पाने वाले भारत के नौवें बॉयज एकल खिलाड़ी बन गए। गौरतलब है कि यह उनकी वर्ल्ड जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में पहली भागीदारी थी।
भारत के पदक खाते में ऐतिहासिक इज़ाफ़ा
खंगुरा के इस कांस्य पदक से व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत का कुल पदक योग 13 हो गया है — जिसमें 1 स्वर्ण, 5 रजत और 7 कांस्य शामिल हैं। यह इस चैंपियनशिप के व्यक्तिगत वर्ग में भारत का सातवाँ कांस्य पदक था।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
पंजाब बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव रितिन खन्ना ने इस प्रदर्शन को एक ऐतिहासिक उपलब्धि और पंजाब के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने जोर दिया कि अपनी पहली ही वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में पदक जीतना एक दुर्लभ कारनामा है, जो बहुत कम भारतीय खिलाड़ियों ने कर दिखाया है। यह उपलब्धि पंजाब में बैडमिंटन के बढ़ते आधार और खिलाड़ियों की बेहतर होती तैयारी का संकेत है।