क्या 19 राज्यों में नागरिक घर बैठे जमीन के कागजात डाउनलोड कर सकेंगे?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या 19 राज्यों में नागरिक घर बैठे जमीन के कागजात डाउनलोड कर सकेंगे?

सारांश

सरकार ने 19 राज्यों में नागरिकों को जमीन के कागजात घर पर ही डिजिटल रूप से डाउनलोड करने की सुविधा दी है, जिससे लोन प्राप्ति में भी तेजी आएगी।

मुख्य बातें

19 राज्यों में डिजिटल लैंड रिकॉर्ड डाउनलोड करने की सुविधा।
बैंक अब ऑनलाइन जमीन गिरवी रखने की जानकारी चेक कर सकते हैं।
सरकार ने यूएलपीआईएन पहचान संख्या शुरू की है।
85 प्रतिशत गांवों में जमीन के नक्शे डिजिटल कर दिए गए हैं।
राष्ट्रीय दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली से बिक्री आसान।

नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अब देश के 19 राज्यों के निवासी अपने जमीन के कागजात (लैंड रिकॉर्ड) को घर पर ही डिजिटल तरीके से डाउनलोड कर सकेंगे। ये दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य होंगे। इसके अतिरिक्त, 406 जिलों में बैंक अब ऑनलाइन ही जमीन गिरवी रखने (मॉर्गेज) की जानकारी की जांच कर सकेंगे, जिससे लोगों को लोन जल्दी मिलने में सहायता मिलेगी।

सरकार के अनुसार, भूमि संसाधन विभाग ने जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। इससे जमीन से संबंधित कार्य अब लाइन में लगकर नहीं, बल्कि ऑनलाइन होने लगे हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, देश के 97 प्रतिशत से अधिक गांवों में जमीन के अधिकार से जुड़े रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज किए जा चुके हैं। लगभग 97 प्रतिशत जमीन के नक्शे भी डिजिटल बना दिए गए हैं। करीब 85 प्रतिशत गांवों में जमीन के लिखित रिकॉर्ड को नक्शों के साथ जोड़ दिया गया है।

शहरों में जमीन की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 'नक्शा' (एनएकेएसएचए) यानी 'राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित शहरी आवास भूमि सर्वेक्षण' योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत देश के 157 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में काम किया जा रहा है। इनमें से 116 यूएलबी में हवाई सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जिसमें उच्च-रिजॉल्यूशन चित्र के साथ 5,915 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया गया।

सरकार ने बताया कि 72 शहरों में जमीनी स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है और 21 शहरों में यह कार्य पूरी तरह समाप्त हो गया है।

केंद्र सरकार ने 2025-26 की योजना के तहत 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1,050 करोड़ रुपए की सहायता मंजूर की है, ताकि वे जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड का कार्य पूरा कर सकें।

सरकार ने जमीन के लिए एक खास पहचान संख्या भी शुरू की है, जिसे यूएलपीआईएन कहा जाता है। यह 14 अंकों का नंबर है और इसे जमीन का आधार कार्ड माना जा रहा है। नवंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 करोड़ से अधिक लैंड पार्सल को यह नंबर दिया जा चुका है।

मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने राष्ट्रीय दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) शुरू की है, जिससे जमीन की खरीद-बिक्री आसान हो गई है। यह प्रणाली पंजाब, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश सहित 17 राज्यों में लागू हो चुकी है।

करीब 88 प्रतिशत सब रजिस्ट्रार ऑफिस (एसआरओ) अब राजस्व कार्यालयों के साथ जुड़ चुके हैं, जिससे रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद जमीन का रिकॉर्ड अपने आप अपडेट हो जाता है।

सरकार का कहना है कि इन सभी कदमों से जमीन से जुड़े काम आसान, तेज और पारदर्शी हो गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि इस नई पहल से नागरिकों को महत्वपूर्ण राहत मिलेगी। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। यह कदम निश्चित रूप से भारत की डिजिटल क्रांति को और गति देगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या जमीन के कागजात डाउनलोड करना मुफ्त है?
हाँ, नागरिक अपने जमीन के कागजात मुफ्त में डाउनलोड कर सकेंगे।
क्या ये कागजात कानूनी रूप से मान्य होंगे?
जी हाँ, डाउनलोड किए गए कागजात कानूनी रूप से मान्य होंगे।
क्या मैं लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता हूँ?
हाँ, 406 जिलों में बैंक ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन स्वीकार कर रहे हैं।
क्या सरकार ने अन्य योजनाएं भी शुरू की हैं?
जी हाँ, सरकार ने डिजिटल भूमि रिकॉर्ड के लिए कई अन्य योजनाएं भी शुरू की हैं।
क्या यह प्रक्रिया सभी राज्यों में लागू है?
यह प्रक्रिया वर्तमान में 19 राज्यों में लागू है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले