क्या 19 राज्यों में नागरिक घर बैठे जमीन के कागजात डाउनलोड कर सकेंगे?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अब देश के 19 राज्यों के निवासी अपने जमीन के कागजात (लैंड रिकॉर्ड) को घर पर ही डिजिटल तरीके से डाउनलोड कर सकेंगे। ये दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य होंगे। इसके अतिरिक्त, 406 जिलों में बैंक अब ऑनलाइन ही जमीन गिरवी रखने (मॉर्गेज) की जानकारी की जांच कर सकेंगे, जिससे लोगों को लोन जल्दी मिलने में सहायता मिलेगी।
सरकार के अनुसार, भूमि संसाधन विभाग ने जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। इससे जमीन से संबंधित कार्य अब लाइन में लगकर नहीं, बल्कि ऑनलाइन होने लगे हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, देश के 97 प्रतिशत से अधिक गांवों में जमीन के अधिकार से जुड़े रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज किए जा चुके हैं। लगभग 97 प्रतिशत जमीन के नक्शे भी डिजिटल बना दिए गए हैं। करीब 85 प्रतिशत गांवों में जमीन के लिखित रिकॉर्ड को नक्शों के साथ जोड़ दिया गया है।
शहरों में जमीन की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 'नक्शा' (एनएकेएसएचए) यानी 'राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित शहरी आवास भूमि सर्वेक्षण' योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत देश के 157 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में काम किया जा रहा है। इनमें से 116 यूएलबी में हवाई सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जिसमें उच्च-रिजॉल्यूशन चित्र के साथ 5,915 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया गया।
सरकार ने बताया कि 72 शहरों में जमीनी स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है और 21 शहरों में यह कार्य पूरी तरह समाप्त हो गया है।
केंद्र सरकार ने 2025-26 की योजना के तहत 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1,050 करोड़ रुपए की सहायता मंजूर की है, ताकि वे जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड का कार्य पूरा कर सकें।
सरकार ने जमीन के लिए एक खास पहचान संख्या भी शुरू की है, जिसे यूएलपीआईएन कहा जाता है। यह 14 अंकों का नंबर है और इसे जमीन का आधार कार्ड माना जा रहा है। नवंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 करोड़ से अधिक लैंड पार्सल को यह नंबर दिया जा चुका है।
मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने राष्ट्रीय दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) शुरू की है, जिससे जमीन की खरीद-बिक्री आसान हो गई है। यह प्रणाली पंजाब, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश सहित 17 राज्यों में लागू हो चुकी है।
करीब 88 प्रतिशत सब रजिस्ट्रार ऑफिस (एसआरओ) अब राजस्व कार्यालयों के साथ जुड़ चुके हैं, जिससे रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद जमीन का रिकॉर्ड अपने आप अपडेट हो जाता है।
सरकार का कहना है कि इन सभी कदमों से जमीन से जुड़े काम आसान, तेज और पारदर्शी हो गए हैं।