27 सितंबर 2026 का पंचांग: पितृपक्ष का पहला श्राद्ध, राहुकाल शाम 4:45 से 6:14 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ 27 सितंबर 2026 (रविवार) को पितृपक्ष का पहला श्राद्ध मनाया जाएगा। इस दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करना विशेष रूप से शुभ माना गया है। हिंदू काल-गणना पद्धति के अनुसार, पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है और शुभ कार्यों, यात्रा एवं निवेश के लिए इसका अनुसरण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय
27 सितंबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 8:58 बजे तक रहेगी, जिसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:20 बजे और सूर्यास्त शाम 5:14 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 6:35 बजे और चंद्रास्त सुबह 7:38 बजे होगा।
सूर्य इस दिन हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हस्त 13वाँ नक्षत्र है, जिसका अर्थ 'हाथ' होता है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। चंद्रमा का सूर्य से मित्रता का संबंध माना गया है, जो इस दिन को आध्यात्मिक दृष्टि से अनुकूल बनाता है।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
रविवार को दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजीत मुहूर्त है, जो सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा। यह लगभग 48 मिनट का काल होता है, जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होते हैं। मान्यता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से समस्त अशुभ दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
इसके अतिरिक्त, अमृतकाल सुबह 6:25 बजे से 7:59 बजे तक रहेगा। पंचांग की दृष्टि से यह अत्यंत सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण समय होता है, जिसमें नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा का आरंभ करना श्रेष्ठ माना जाता है।
योग: वृद्धि और ध्रुव
रविवार को सुबह 11:17 बजे तक वृद्धि योग रहेगा। सत्ताईस योगों में यह 12वाँ योग है और अत्यंत शुभ माना जाता है। जब सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त ज्योतिषीय स्थिति 133 डिग्री 20 मिनट से 146 डिग्री 40 मिनट के बीच होती है, तब वृद्धि योग बनता है। इसके स्वामी सूर्य देव हैं। 11:17 बजे के बाद ध्रुव योग प्रारंभ होगा।
अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड
इस दिन राहुकाल शाम 4:45 बजे से 6:14 बजे तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष के अनुसार, यह दिन का वह समयखंड होता है जिसमें किसी नए या शुभ कार्य का आरंभ वर्जित माना जाता है। राहुकाल सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बाँटकर निकाला जाता है और यह प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का होता है। पहले से चल रहे कार्यों को इस दौरान जारी रखा जा सकता है।
गुलिक काल दोपहर 3:16 बजे से शाम 4:45 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है और यह अशुभ उपग्रह काल माना जाता है। हालाँकि, इस काल में बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना शास्त्रसम्मत माना गया है। यमगंड काल दोपहर 12:17 बजे से 1:47 बजे तक रहेगा। यह काल मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध माना जाता है और इसमें नया व्यापार, यात्रा तथा वित्तीय लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।
ग्रह स्थिति और दिशाशूल
रविवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस स्थिति में व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना लाभकारी होता है। चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेंगे, जो एक जल राशि है। इस स्थिति में व्यक्ति अत्यधिक संवेदनशील और भावुक हो सकता है।
इस दिन दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा का आरंभ करना अशुभ माना जाता है। यदि अनिवार्य हो तो उचित उपाय करके यात्रा की जा सकती है। 27 सितंबर 2026 का यह पंचांग पितृपक्ष के प्रथम दिन की धार्मिक महत्ता को और भी बढ़ा देता है — शुभ मुहूर्तों का सदुपयोग कर पूर्वजों को श्रद्धा-सुमन अर्पित करना इस दिन का मुख्य उद्देश्य है।