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28 सितंबर 2026 पंचांग: पितृ पक्ष द्वितीया श्राद्ध, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 से 12:41 बजे तक

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28 सितंबर 2026 पंचांग: पितृ पक्ष द्वितीया श्राद्ध, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 से 12:41 बजे तक

सारांश

28 सितंबर 2026 को पितृ पक्ष का द्वितीया श्राद्ध है — पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान का दिन। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 से 12:41 बजे तक शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम है। सूर्य हस्त नक्षत्र और कन्या राशि में, चंद्रमा मीन राशि में रहेंगे।

मुख्य बातें

28 सितंबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि रात 7:13 बजे तक रहेगी।
पितृ पक्ष द्वितीया श्राद्ध — इस दिन तर्पण और पिंडदान विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 से दोपहर 12:41 बजे तक; अमृत काल सुबह 7:57 से 9:29 बजे तक।
राहुकाल सुबह 7:50–9:19 , गुलिक काल दोपहर 1:46–3:15 , यमगंड काल सुबह 10:48–12:17 बजे — नए कार्य वर्जित।
सूर्य हस्त नक्षत्र व कन्या राशि में; चंद्रमा मीन राशि में; दिशाशूल पूर्व दिशा में।
सोमवार होने से भगवान शिव की पूजा और मंत्र-जाप विशेष रूप से शुभ।

पंचांग के अनुसार 28 सितंबर 2026 (सोमवार) को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रात 7:13 बजे तक रहेगी, जिसके बाद तृतीया तिथि का आरंभ होगा। यह दिन पितृ पक्ष का द्वितीया श्राद्ध है, जिसमें पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। हिंदू काल-गणना पद्धति में पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है और शुभ कार्यों से पहले इसका अध्ययन आवश्यक माना गया है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति

सोमवार को सूर्योदय सुबह 6:21 बजे और सूर्यास्त शाम 5:13 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 7:13 बजे और चंद्रास्त सुबह 8:41 बजे रहेगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे।

वैदिक ज्योतिष में हस्त नक्षत्र तेरहवाँ नक्षत्र है, जिसका अर्थ 'हाथ' होता है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, चंद्रमा और सूर्य में मित्रता का संबंध माना गया है, इसलिए हस्त नक्षत्र में सूर्य का प्रभाव सभी 12 राशियों पर गहरा पड़ता है।

इस दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जब चंद्रमा मीन राशि में होता है, तो यह जल राशि होने के कारण व्यक्ति को अत्यधिक संवेदनशील और भावुक बना सकती है। कन्या राशि में सूर्य की स्थिति व्यावहारिक और योजनाबद्ध कार्यशैली को लाभकारी बताती है।

पितृ पक्ष: तर्पण और पिंडदान का महत्व

पितृ पक्ष की द्वितीया तिथि पर पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। पितृ पक्ष पूर्वजों की आत्मशांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह दिन सोमवार भी है, इसलिए पितृ पक्ष के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना और उनके मंत्रों का जाप भी विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृत काल

इस दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा। यह लगभग 48 मिनट की अवधि होती है, जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर स्थित रहते हैं। पंचांग के अनुसार, इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से अशुभ प्रभाव और दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं।

अमृत काल सोमवार को सुबह 7:57 बजे से 9:29 बजे तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, यह अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि होती है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।

अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड

सोमवार को राहुकाल सुबह 7:50 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल में कोई नया या शुभ कार्य आरंभ करना अशुभ माना जाता है। यह समय सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के काल को 8 बराबर भागों में बाँटकर निर्धारित किया जाता है।

गुलिक काल दोपहर 1:46 बजे से शाम 3:15 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है और इसमें नए कार्य आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालाँकि, बैंक में जमा, दान और निवेश इस काल में अनुकूल माने जाते हैं।

यमगंड काल सुबह 10:48 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान नया व्यापार, यात्रा और पैसों के लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।

व्याघात योग और दिशाशूल

सोमवार को सुबह 8:53 बजे के बाद व्याघात योग लगेगा, जो अगले दिन सुबह 6:12 बजे तक रहेगा। यह 27 नित्य योगों में से 13वाँ योग है। 'व्याघात' का शाब्दिक अर्थ 'आघात' या 'बड़ी बाधा' होता है। जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों का योग 160 से 173 अंश 20 कला के बीच होता है, तब यह योग बनता है।

इस दिन दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस अशुभ दिशा को कहते हैं जिसमें उस दिन विशेष यात्रा करना अनुचित माना जाता है। अतः सोमवार को पूर्व दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

इस प्रकार, 28 सितंबर 2026 पितृ तर्पण, पिंडदान और भगवान शिव की आराधना की दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है — और अभिजीत मुहूर्त का सदुपयोग शुभ कार्यों के लिए किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यात्रा और व्यापार के निर्णयों में इसका सहारा लेते हैं। पितृ पक्ष जैसे अवसरों पर पंचांग की माँग विशेष रूप से बढ़ती है, क्योंकि श्राद्ध-तर्पण की तिथियाँ सटीक काल-गणना पर निर्भर हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल जैसी अवधारणाएँ वैदिक खगोल-गणना पर आधारित हैं, जिनकी वैज्ञानिक व्याख्या भले ही अलग हो, किंतु सांस्कृतिक दृष्टि से इनका महत्व अटूट है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

28 सितंबर 2026 को पितृ पक्ष की कौन-सी तिथि है?
28 सितंबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है, जो रात 7:13 बजे तक रहेगी। इस दिन पितृ पक्ष का द्वितीया श्राद्ध मनाया जाएगा और पूर्वजों के निमित्त तर्पण व पिंडदान किए जाएँगे।
28 सितंबर 2026 का अभिजीत मुहूर्त कितने बजे है?
28 सितंबर 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा। यह लगभग 48 मिनट की अवधि होती है और पंचांग के अनुसार दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।
28 सितंबर 2026 को राहुकाल कब से कब तक है?
सोमवार 28 सितंबर को राहुकाल सुबह 7:50 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई नया या शुभ कार्य आरंभ न करने की सलाह दी जाती है।
28 सितंबर 2026 को कौन-सा नक्षत्र और योग है?
इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में रहेंगे, जो वैदिक ज्योतिष का 13वाँ नक्षत्र है। सुबह 8:53 बजे से व्याघात योग प्रारंभ होगा, जो 27 नित्य योगों में से 13वाँ योग है।
पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान का क्या महत्व है?
पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान पूर्वजों की आत्मशांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए हिंदू धर्म में विशेष महत्वपूर्ण माने जाते हैं। द्वितीया तिथि पर किए जाने वाले ये अनुष्ठान परंपरागत रूप से पितृ ऋण से मुक्ति दिलाने वाले माने गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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