26 सितंबर 2026 का पंचांग: पूर्णिमा तिथि, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 से 12:42 बजे तक, पितृ पक्ष का आरंभ
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 26 सितंबर 2026 (शनिवार) को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात 10:18 बजे तक रहेगी, जिसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन भगवान सत्यनारायण, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी बताई गई है। साथ ही, इस दिन से पितृ पक्ष (पूर्णिमा श्राद्ध) का भी शुभारंभ हो रहा है।
सूर्योदय, सूर्यास्त एवं चंद्र स्थिति
शनिवार को सूर्योदय सुबह 6:20 बजे और सूर्यास्त शाम 5:15 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 6:00 बजे और चंद्रास्त सुबह 6:00 बजे होगा। इस दिन सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे और चंद्रमा मीन राशि में विराजमान होंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में होने पर व्यावहारिक एवं योजनाबद्ध ढंग से कार्य करना लाभकारी माना जाता है। वहीं चंद्रमा का मीन राशि में होना व्यक्ति को अत्यधिक भावुक और संवेदनशील बना सकता है।
नक्षत्र एवं योग
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे। यह आकाश मंडल का 12वाँ नक्षत्र है, जो सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक विस्तृत है। इस नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव हैं और इसके देवता अर्यमा (देवताओं एवं पितरों के प्रमुख) माने जाते हैं। पंचांग के अनुसार इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी, परोपकारी और नेतृत्व गुणों से संपन्न होते हैं।
शनिवार को दोपहर 1:17 बजे तक गंड योग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में गंड योग को 27 नित्य योगों में से 10वाँ योग माना गया है। इसे सामान्यतः कठिनाइयों का सूचक और अशुभ योग माना जाता है। यह योग तब बनता है जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों का योग 120 डिग्री 00 मिनट से 133 डिग्री 20 मिनट के बीच हो। हालाँकि यह अशुभ माना जाता है, इसमें जन्मे जातक प्रायः निडर, दृढ़निश्चयी और शूरवीर प्रवृत्ति के होते हैं।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
इस दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजीत मुहूर्त है, जो सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक रहेगा — अर्थात लगभग 48 मिनट का यह समयखंड दिन का आठवाँ मुहूर्त होता है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव और दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होते हैं, तभी अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है।
इसके अलावा अमृतकाल तड़के 3:32 बजे से 5:07 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार यह समय अत्यंत मंगलकारी एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण होता है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल एवं यमगंड
शनिवार को राहुकाल सुबह 9:19 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष के अनुसार यह वह समय है जिसमें कोई भी नया या शुभ कार्य प्रारंभ करना वर्जित माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बाँटकर निकाला जाता है, जो प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का होता है।
गुलिक काल (जिसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है) सुबह 6:20 बजे से 7:50 बजे तक रहेगा। इस उपग्रह काल को अशुभ माना जाता है और नए कार्य प्रारंभ करने से बचना उचित है, हालाँकि बैंक में धन जमा करना, दान देना या पहले से चल रहे कार्य जारी रखना इस काल में स्वीकार्य माना गया है।
यमगंड काल दोपहर 1:47 बजे से 3:17 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध माना जाता है। इस काल में नया व्यापार, यात्रा और धन के लेनदेन से बचना श्रेयस्कर बताया गया है।
दिशाशूल एवं विशेष संयोग
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार दिशाशूल उस अशुभ दिशा को इंगित करता है जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना अनुचित माना जाता है। गौरतलब है कि इस दिन पूर्णिमा होने के साथ-साथ पितृ पक्ष का आरंभ भी हो रहा है, जो इसे पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध-तर्पण के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।