अदाणी फाउंडेशन ने हजारीबाग के 4 गांवों में लगाईं सोलर हाई मास्ट लाइटें, रात में मिली रोशनी
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी फाउंडेशन ने झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड में 8 जुलाई 2026 को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पहल की है। गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र के होरम, मरदुसोटी, पुंदौल और चंदौल — इन चार गांवों के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सोलर हाई मास्ट लाइटें स्थापित की गई हैं, जिससे ग्रामीणों को रात के समय सुरक्षित आवागमन और बेहतर रोशनी सुलभ हो गई है।
पहले क्या थी स्थिति
इन गांवों में शाम ढलने के बाद चौक-चौराहों, मंदिर परिसरों और मुख्य मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव था। अंधेरे के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को रात में घर से बाहर निकलने में कठिनाई होती थी। ग्रामीणों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद सार्वजनिक स्थानों पर आना-जाना असुरक्षित महसूस होता था।
सोलर लाइटों का असर
सोलर हाई मास्ट लाइटें स्थापित होने के बाद अब इन स्थानों पर रात में भी पर्याप्त प्रकाश उपलब्ध है। ग्रामीणों ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी आने से सुरक्षा का भाव बढ़ा है और गांव में सामाजिक गतिविधियाँ भी अब देर शाम तक जारी रह सकती हैं। मंदिर परिसरों, चौक-चौराहों और प्रमुख मार्गों पर स्थापित ये लाइटें दैनिक जीवन को सुगम बना रही हैं।
स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम
फाउंडेशन के अनुसार, सौर ऊर्जा आधारित यह व्यवस्था न केवल स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देती है, बल्कि ऊर्जा संरक्षण में भी योगदान करती है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल विकास और बेहतर आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण झारखंड में बिजली आपूर्ति की अनियमितता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
व्यापक सीएसआर कार्यक्रम
अदाणी फाउंडेशन गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण, आजीविका संवर्धन, पेयजल, आधारभूत संरचना, खेल एवं युवा विकास तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में विभिन्न सीएसआर कार्यक्रम संचालित कर रहा है। फाउंडेशन का उद्देश्य स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और सतत विकास की प्रक्रिया से जोड़ना है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में और अधिक सीएसआर परियोजनाओं के विस्तार की संभावना है।