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अदाणी फाउंडेशन ने हजारीबाग के 4 गांवों में लगाईं सोलर हाई मास्ट लाइटें, रात में मिली रोशनी

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अदाणी फाउंडेशन ने हजारीबाग के 4 गांवों में लगाईं सोलर हाई मास्ट लाइटें, रात में मिली रोशनी

सारांश

अदाणी फाउंडेशन ने हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड के चार गांवों — होरम, मरदुसोटी, पुंदौल और चंदौल — में सोलर हाई मास्ट लाइटें स्थापित कीं। सीएसआर के तहत की गई इस पहल से रात में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का आवागमन सुरक्षित हुआ और ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

मुख्य बातें

अदाणी फाउंडेशन ने हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड के 4 गांवों में सोलर हाई मास्ट लाइटें स्थापित कीं।
लाभान्वित गांव हैं — होरम, मरदुसोटी, पुंदौल और चंदौल , जो गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में हैं।
सौर ऊर्जा आधारित यह पहल महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के रात्रि आवागमन को सुरक्षित बनाती है।
यह पहल सीएसआर के अंतर्गत की गई है और स्वच्छ व टिकाऊ ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देती है।
फाउंडेशन इस क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास सहित 10 से अधिक क्षेत्रों में सीएसआर कार्यक्रम संचालित कर रहा है।

अदाणी फाउंडेशन ने झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड में 8 जुलाई 2026 को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पहल की है। गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र के होरम, मरदुसोटी, पुंदौल और चंदौल — इन चार गांवों के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सोलर हाई मास्ट लाइटें स्थापित की गई हैं, जिससे ग्रामीणों को रात के समय सुरक्षित आवागमन और बेहतर रोशनी सुलभ हो गई है।

पहले क्या थी स्थिति

इन गांवों में शाम ढलने के बाद चौक-चौराहों, मंदिर परिसरों और मुख्य मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव था। अंधेरे के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को रात में घर से बाहर निकलने में कठिनाई होती थी। ग्रामीणों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद सार्वजनिक स्थानों पर आना-जाना असुरक्षित महसूस होता था।

सोलर लाइटों का असर

सोलर हाई मास्ट लाइटें स्थापित होने के बाद अब इन स्थानों पर रात में भी पर्याप्त प्रकाश उपलब्ध है। ग्रामीणों ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी आने से सुरक्षा का भाव बढ़ा है और गांव में सामाजिक गतिविधियाँ भी अब देर शाम तक जारी रह सकती हैं। मंदिर परिसरों, चौक-चौराहों और प्रमुख मार्गों पर स्थापित ये लाइटें दैनिक जीवन को सुगम बना रही हैं।

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम

फाउंडेशन के अनुसार, सौर ऊर्जा आधारित यह व्यवस्था न केवल स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देती है, बल्कि ऊर्जा संरक्षण में भी योगदान करती है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल विकास और बेहतर आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण झारखंड में बिजली आपूर्ति की अनियमितता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

व्यापक सीएसआर कार्यक्रम

अदाणी फाउंडेशन गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण, आजीविका संवर्धन, पेयजल, आधारभूत संरचना, खेल एवं युवा विकास तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में विभिन्न सीएसआर कार्यक्रम संचालित कर रहा है। फाउंडेशन का उद्देश्य स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और सतत विकास की प्रक्रिया से जोड़ना है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में और अधिक सीएसआर परियोजनाओं के विस्तार की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका संदर्भ महत्वपूर्ण है — गोंदुलपारा जैसे खनन-प्रभावित क्षेत्रों में सीएसआर गतिविधियाँ अक्सर सामुदायिक असंतोष को शांत करने का माध्यम भी मानी जाती हैं। सोलर लाइटें निस्संदेह उपयोगी हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये प्रयास खनन परियोजनाओं से प्रभावित स्थानीय समुदायों की दीर्घकालिक आजीविका और पर्यावरणीय चिंताओं को भी उतनी ही गंभीरता से संबोधित करते हैं। बुनियादी ढाँचे की पहल स्वागत योग्य है, पर पारदर्शी सीएसआर रिपोर्टिंग और स्वतंत्र प्रभाव मूल्यांकन के बिना इन कार्यक्रमों की वास्तविक सफलता को मापना कठिन है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी फाउंडेशन ने हजारीबाग के किन गांवों में सोलर लाइटें लगाई हैं?
अदाणी फाउंडेशन ने हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड के होरम, मरदुसोटी, पुंदौल और चंदौल गांवों में सोलर हाई मास्ट लाइटें स्थापित की हैं। ये सभी गांव गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में आते हैं।
इन गांवों में सोलर लाइटें लगाने से क्या फायदा हुआ?
सोलर हाई मास्ट लाइटें लगने से रात के समय चौक-चौराहों, मंदिर परिसरों और मुख्य मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश मिल रहा है। इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का रात्रि आवागमन सुरक्षित हुआ है और सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
अदाणी फाउंडेशन की यह पहल किस कार्यक्रम के तहत है?
यह पहल कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत की गई है। अदाणी फाउंडेशन गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण सहित कई क्षेत्रों में सीएसआर कार्यक्रम चला रहा है।
सोलर हाई मास्ट लाइट पर्यावरण के लिए कैसे फायदेमंद है?
सौर ऊर्जा आधारित यह व्यवस्था स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और ऊर्जा संरक्षण में योगदान मिलता है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण-अनुकूल विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
क्या अदाणी फाउंडेशन झारखंड में और भी विकास कार्य कर रहा है?
हाँ, अदाणी फाउंडेशन गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में पोषण, पेयजल, आजीविका संवर्धन, खेल एवं युवा विकास सहित दस से अधिक क्षेत्रों में सीएसआर कार्यक्रम संचालित कर रहा है। फाउंडेशन का लक्ष्य स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाना और सतत विकास से जोड़ना है।
राष्ट्र प्रेस
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