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अदाणी और जैबिल की साझेदारी: भारत में एआई डेटा सेंटर मैन्युफैक्चरिंग का नया युग, $3 ट्रिलियन बाज़ार पर नज़र

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अदाणी और जैबिल की साझेदारी: भारत में एआई डेटा सेंटर मैन्युफैक्चरिंग का नया युग, $3 ट्रिलियन बाज़ार पर नज़र

सारांश

अदाणी और जैबिल की यह साझेदारी महज़ एक कारोबारी करार नहीं — यह भारत को एआई हार्डवेयर के वैश्विक निर्माता के रूप में स्थापित करने का दांव है। मल्टी गीगावाट रैक क्षमता और $3 ट्रिलियन के बाज़ार पर नज़र के साथ, यह अदाणी के $100 अरब के डेटा सेंटर विज़न की सबसे ठोस अभिव्यक्ति है।

मुख्य बातें

अदाणी एंटरप्राइजेज और जैबिल ने 16 जून 2025 को भारत में वर्टिकली इंटीग्रेटेड एआई डेटा सेंटर मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म बनाने की रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।
योजना में भारत में मल्टी गीगावाट उच्च-घनत्व एआई रैक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता स्थापित करना शामिल है।
यह पहल अगले 7 वर्षों में $3 ट्रिलियन से अधिक के वैश्विक एआई कंप्यूट बाज़ार को लक्षित करती है।
साझेदारी अदाणी ग्रुप की 2035 तक 5 गीगावाट ग्रीन-एनर्जी डेटा सेंटर बनाने की $100 अरब प्रतिबद्धता से जुड़ी है।
उद्योग अनुमानों के अनुसार भारत का डेटा सेंटर बाज़ार 2030 तक 5-8 गीगावाट क्षमता तक पहुँच सकता है।

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग दिग्गज जैबिल ने 16 जून 2025 को भारत में एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड एआई और डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म स्थापित करने के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। इस साझेदारी का लक्ष्य भारत को वैश्विक एआई हार्डवेयर आपूर्ति श्रृंखला में एक निर्माता और निर्यातक के रूप में स्थापित करना है।

साझेदारी में क्या शामिल है

दोनों कंपनियों की योजना भारत में मल्टी गीगावाट की उच्च-घनत्व वाली एआई रैक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने की है। इसमें अत्याधुनिक सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी (SMT) और जटिल बॉक्स-बिल्ड प्रक्रियाओं के ज़रिए अगली पीढ़ी के लिक्विड-कूल्ड एआई रैक, सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्किंग सिस्टम की एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इंटीग्रेशन शामिल है। यह वैश्विक हाइपरस्केलर, को-लोकेशन सुविधाओं और एंटरप्राइज डेटा सेंटरों की इन्फ्रास्ट्रक्चर ज़रूरतों को पूरा करेगा।

कंप्यूटिंग रैक के अतिरिक्त, इस साझेदारी में 'व्हाइट स्पेस' और 'ग्रे स्पेस' उपकरणों की पूरी श्रृंखला की मैन्युफैक्चरिंग भी शामिल है — जिसमें पावर डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट्स (PDU), कूलेंट डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट्स (CDU), ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर, बस बार और एडवांस्ड थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम सम्मिलित हैं। दोनों कंपनियाँ मिलकर एक एंड-टू-एंड, डिज़ाइन-से-डिप्लॉयमेंट हार्डवेयर इकोसिस्टम बनाना चाहती हैं।

गौतम अदाणी का विज़न

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा, 'दुनिया एक ऐसी इंटेलिजेंट क्रांति में प्रवेश कर रही है जो पिछली किसी भी औद्योगिक क्रांति से कहीं अधिक गहरी है। ऊर्जा और कंप्यूटर के बीच सामंजस्य स्थापित करने में महारत हासिल करने वाले राष्ट्र ही आने वाले दशक को आकार देंगे।' उन्होंने कहा कि जैबिल के साथ यह साझेदारी भारत का पूरा एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टैक बनाने की दिशा में अहम कदम है — ग्रीन पावर से लेकर वर्ल्ड-क्लास हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग तक। अदाणी ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि 'एआई के दौर में भारत सिर्फ कंज्यूमर ही न रहे, बल्कि इंटेलिजेंस का क्रिएटर, बिल्डर और एक्सपोर्टर भी बने।'

जैबिल का नज़रिया

जैबिल के सीईओ माइक दस्तूर ने कहा, 'अदाणी ग्रुप के साथ यह रणनीतिक साझेदारी, प्रोडक्ट के पूरे लाइफसाइकल में स्केलेबल सॉल्यूशन देकर एआई इकोसिस्टम में ग्राहकों के लिए लंबे समय तक वैल्यू बनाने की हमारी कोशिशों में एक और कदम है।' दस्तूर ने यह भी रेखांकित किया कि भारत की कुशल वर्कफोर्स और सपोर्टिव बिजनेस माहौल इसे साझेदारी के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं।

वैश्विक बाज़ार और अदाणी की बड़ी प्रतिबद्धता

यह पहल अगले सात वर्षों में $3 ट्रिलियन से अधिक के वैश्विक एआई कंप्यूट बाज़ार को लक्षित करती है। गौरतलब है कि यह साझेदारी अदाणी ग्रुप की 2035 तक 5 गीगावाट के ग्रीन-एनर्जी से संचालित हाइपरस्केल एआई-रेडी डेटा सेंटर बनाने की $100 अरब की प्रतिबद्धता से सीधे जुड़ी है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत का डेटा सेंटर बाज़ार एक अहम मोड़ पर खड़ा है — उद्योग के अनुमानों के अनुसार, एआई की बढ़ती माँग, क्लाउड विस्तार और डेटा लोकलाइजेशन की ज़रूरतों के कारण 2030 तक इसकी क्षमता 5-8 गीगावाट तक पहुँच सकती है।

आगे की राह

यह साझेदारी अदाणी ग्रुप द्वारा वैश्विक टेक्नोलॉजी लीडर्स के साथ पहले से स्थापित संबंधों को और मज़बूत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम सफलतापूर्वक विकसित हुआ, तो भारत वैश्विक एआई हार्डवेयर आपूर्ति श्रृंखला में चीन के एकाधिकार को चुनौती देने की स्थिति में आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या देश की सप्लाई चेन, सेमीकंडक्टर निर्भरता और स्किल्ड वर्कफोर्स की कमी इस विज़न को ज़मीन पर उतरने देगी। $100 अरब का डेटा सेंटर लक्ष्य प्रभावशाली है, परंतु आलोचकों का कहना है कि भारत अभी भी उन्नत चिप्स और कोर एआई घटकों के लिए आयात पर निर्भर है — जो किसी भी 'एंड-टू-एंड' इकोसिस्टम के दावे को कमज़ोर करता है। जैबिल जैसे वैश्विक भागीदार का आना भरोसे का संकेत है, लेकिन असली कसौटी तब होगी जब मल्टी गीगावाट क्षमता सिर्फ घोषणापत्र से निकलकर उत्पादन लाइन तक पहुँचे।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी और जैबिल की साझेदारी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस साझेदारी का उद्देश्य भारत में एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड एआई और डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म स्थापित करना है। इसमें लिक्विड-कूल्ड एआई रैक, सर्वर, स्टोरेज, नेटवर्किंग सिस्टम और पावर-कूलिंग उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग शामिल है।
इस साझेदारी से भारत को क्या फ़ायदा होगा?
यह साझेदारी भारत को वैश्विक एआई हार्डवेयर आपूर्ति श्रृंखला में एक निर्माता और निर्यातक के रूप में स्थापित करने का प्रयास है। उद्योग अनुमानों के अनुसार भारत का डेटा सेंटर बाज़ार 2030 तक 5-8 गीगावाट क्षमता तक पहुँच सकता है, जिससे रोज़गार और तकनीकी विकास के नए अवसर बनेंगे।
अदाणी ग्रुप का डेटा सेंटर क्षेत्र में कुल निवेश लक्ष्य क्या है?
अदाणी ग्रुप ने 2035 तक 5 गीगावाट के ग्रीन-एनर्जी से संचालित हाइपरस्केल एआई-रेडी डेटा सेंटर बनाने के लिए $100 अरब की प्रतिबद्धता जताई है। जैबिल के साथ यह साझेदारी उसी व्यापक योजना का हिस्सा है।
जैबिल कंपनी क्या करती है और इस साझेदारी में उसकी भूमिका क्या होगी?
जैबिल एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है जो जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर सिस्टम बनाने में विशेषज्ञ है। इस साझेदारी में जैबिल अपनी SMT और बॉक्स-बिल्ड विशेषज्ञता लाएगी, जिससे एआई रैक और डेटा सेंटर उपकरणों की एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग संभव होगी।
यह साझेदारी किस वैश्विक बाज़ार अवसर को लक्षित कर रही है?
यह पहल अगले सात वर्षों में $3 ट्रिलियन से अधिक के वैश्विक एआई कंप्यूट बाज़ार को लक्षित करती है, जो एआई कंप्यूट में स्ट्रक्चरल इन्वेस्टमेंट की बढ़ती माँग से प्रेरित है।
राष्ट्र प्रेस
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