आदित्य धर ने 'धुरंधर' के संगीत की रचनात्मक यात्रा साझा की, शाश्वत सचदेवा को 'छोटा भाई' कहा
सारांश
Key Takeaways
- आदित्य धर और शाश्वत सचदेवा की दोस्ती की गहराई।
- 'धुरंधर' के गाने विश्व स्तर पर सराहे गए।
- शाश्वत की मेहनत और समर्पण की प्रशंसा।
- क्रिएटिव प्रक्रिया में परिवार जैसे रिश्ते का महत्व।
- तेज रफ्तार वाले गाने और उनकी रचना की कहानी।
मुंबई, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। स्पाई थ्रिलर फिल्म 'धुरंधर' के संगीत का मुख्य चेहरा बने हैं शाश्वत सचदेवा, जिन्होंने न केवल फिल्म के लिए अद्भुत गाने तैयार किए, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का कार्य भी किया। शाश्वत सचदेवा ने आदित्य धर द्वारा निर्देशित फिल्म 'धुरंधर' और इसके सीक्वल 'धुरंधर 2' के लिए तेज गति वाले, सिंथ बीट्स पर आधारित पॉप और रैप शैली के गाने बनाए।
फिल्म की सफलता और गानों की जबरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए निर्देशक आदित्य धर ने इंस्टाग्राम पर शाश्वत की प्रशंसा की। उन्होंने गानों की तैयारी के दौरान की बैकस्टेज तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिनमें शाश्वत सचदेवा सहित सभी गायकों और संगीतकारों को देखा जा सकता है।
आदित्य ने लिखा, "शाश्वत सचदेव को मेरा सलाम। कुछ साथी केवल काम के सहयोगी नहीं होते, बल्कि वे धीरे-धीरे परिवार जैसे बन जाते हैं। शाश्वत मेरे लिए ऐसे ही रहे हैं। वे 'धुरंधर' के संगीतकार ही नहीं, बल्कि मेरे छोटे भाई जैसे हैं। हमने साथ में गहरे क्रिएटिव पल साझा किए।"
निर्देशक ने आगे लिखा, "'धुरंधर पार्ट 1' के लिए 9 गाने केवल 9 दिनों में और पूरा बीजीएम 6 दिनों में तैयार किया गया। इसके बाद 'धुरंधर पार्ट 2' के लिए 14 गाने 11 दिनों में और बीजीएम 3 दिनों में पूरा किया गया। यह गति, पैमाने और भावनात्मक गहराई के साथ किया गया कार्य वास्तव में अद्भुत था।"
आदित्य धर ने बताया कि दोनों एल्बम केवल 3 महीने के अंदर रिलीज होने के बावजूद वैश्विक संगीत चार्ट्स में शीर्ष पर पहुँच गए। उन्होंने लिखा, "फिल्म के लगभग हर गाने को दुनिया भर से प्यार और सराहना मिली, जो किसी भी फिल्म के लिए अत्यंत दुर्लभ है।"
आदित्य ने याद करते हुए लिखा, "लगभग 15 दिनों तक मेरा घर केवल एक घर नहीं रहा, बल्कि एक जीवंत म्यूजिक स्टूडियो बन गया था। हर कमरे में कोई न कोई काम चल रहा था। लिविंग रूम में संगीत बन रहा था, बेडरूम में रिकॉर्डिंग हो रही थी और बालकनी में गाने लिखे जा रहे थे। गायक और संगीतकार लगातार आते-जाते रहे। दिन और रात एक-दूसरे में मिल गए। 21-22 घंटे तक के लंबे सेशन चलते रहे। समय का पता ही नहीं चलता था, बस सही चीज बनाने का जुनून था।"
निर्देशक ने शाश्वत की मेहनत की विशेष प्रशंसा करते हुए लिखा, "इस पूरे प्रोजेक्ट में शाश्वत का योगदान अद्वितीय था। उन्होंने सब कुछ संभाला। क्रिएटिंग, कंपोजिंग, मार्गदर्शन, फीडबैक देना और हर चीज को बेहतर बनाना। कई बार वे बीमार भी रहे, कम नींद ले रहे थे और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे, फिर भी वे बिना रुके, बिना किसी समझौते के पूरे जोश के साथ मौजूद रहे। ऐसी लगन और दृढ़ता आजकल बहुत कम देखने को मिलती है।"