3 अगस्त 2026
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अफगानिस्तान में कबीलाई जमीन विवाद: खोस्त-पक्तिका सीमा पर चौथे दिन भी सशस्त्र झड़प, कई घायल

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अफगानिस्तान में कबीलाई जमीन विवाद: खोस्त-पक्तिका सीमा पर चौथे दिन भी सशस्त्र झड़प, कई घायल

सारांश

अफगानिस्तान के खोस्त-पक्तिका सीमावर्ती इलाके में दो कबीलों के बीच दशकों पुराना पहाड़ी जमीन विवाद एक बार फिर सशस्त्र संघर्ष में बदल गया है। चौथे दिन भी झड़पें जारी हैं, भारी हथियारों के इस्तेमाल की खबरें हैं और तालिबान बल मौके पर तैनात किए गए हैं।

मुख्य बातें

खोस्त प्रांत के बोरी खेल और पक्तिका प्रांत के गियान खेल कबीलों के बीच 3 अगस्त 2026 को चौथे दिन भी सशस्त्र झड़प जारी रही।
विवाद स्पाइरा और गियान जिलों के बीच स्थित पहाड़ी क्षेत्र के मालिकाना हक और पाइन नट जंगलों के नियंत्रण को लेकर है।
दोनों पक्षों ने कथित तौर पर हल्के और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया; एक मोर्टार दागने का वीडियो सामने आया, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।
निवासी शाह मीर खान के अनुसार पुराने संघर्षों में करीब 80 लोग हताहत हुए थे; रेडियो हुर्रियत के दावे के मुताबिक 80 वर्षों में 250 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं — दोनों आँकड़े स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं।
स्थिति नियंत्रित करने के लिए तालिबान बल इलाके में तैनात किए गए हैं।

दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान के खोस्त और पक्तिका प्रांतों की सीमा पर स्थित एक विवादित पहाड़ी क्षेत्र के मालिकाना हक को लेकर दो कबीलों के बीच सशस्त्र संघर्ष सोमवार, 3 अगस्त को चौथे दिन भी जारी रहा। बोरी खेल और गियान खेल कबीलों के बीच शुरू हुई यह झड़प अब गंभीर क्षेत्रीय तनाव का रूप ले चुकी है, जिसमें हल्के और भारी हथियारों के इस्तेमाल की खबरें हैं।

मुख्य घटनाक्रम

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह झड़प खोस्त प्रांत के स्पाइरा जिले के बोरी खेल कबीले और पक्तिका प्रांत के गियान जिले के गियान खेल कबीले के बीच शुरू हुई। दोनों पक्षों ने कथित तौर पर संघर्ष में हल्के और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया। तालिबान के करीबी माने जाने वाले मीडिया संस्थान रेडियो हुर्रियत ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें कथित तौर पर एक व्यक्ति विरोधी पक्ष की दिशा में मोर्टार दागता दिख रहा है — हालाँकि इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तालिबान बलों को इलाके में तैनात किया गया है, ताकि दोनों पक्षों को अलग किया जा सके और हालात को और बिगड़ने से रोका जा सके।

विवाद की जड़ें और संसाधनों का सवाल

स्थानीय निवासियों के अनुसार, विवादित पहाड़ स्पाइरा और गियान जिलों के बीच स्थित है और घने जंगलों से घिरा हुआ है। इन जंगलों में पाइन नट के कीमती पेड़ हैं, जो इस क्षेत्र में आर्थिक महत्व रखते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इन्हीं प्राकृतिक संसाधनों — चराई की भूमि, जंगल और उनसे होने वाली आमदनी — के नियंत्रण को लेकर दोनों समुदायों के बीच मतभेद कई पीढ़ियों से चले आ रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में केंद्रीय प्रशासनिक तंत्र की कमज़ोरी के कारण जमीनी विवादों का निपटारा अदालतों या सरकारी तंत्र के बजाय अक्सर सशस्त्र टकराव के जरिए होता है।

दशकों पुराना संघर्ष, भारी जनहानि का दावा

स्पाइरा जिले के निवासी शाह मीर खान ने बताया कि इस पहाड़ को लेकर पहले हुई झड़पों में भारी जान-माल का नुकसान हो चुका है। उनके अनुसार, इस विवाद से जुड़े पुराने संघर्षों में करीब 80 लोग मारे गए या घायल हुए थे — हालाँकि इस आँकड़े की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो सकी।

रेडियो हुर्रियत का दावा है कि यह व्यापक विवाद लगभग 80 वर्षों से जारी है और इस दौरान दोनों पक्षों के 250 से अधिक लोग जान गँवा चुके हैं। गौरतलब है कि यह आँकड़ा भी स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित नहीं है।

तालिबान की भूमिका और सीमाएँ

रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान प्रशासन ने संघर्ष को रोकने के लिए सुरक्षा बल तैनात किए हैं। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि तालिबान शासन में जनजातीय विवादों के दीर्घकालिक समाधान के लिए कोई विश्वसनीय न्यायिक या मध्यस्थता तंत्र नहीं है, जो इस तरह के संघर्षों को बार-बार भड़कने से रोक सके।

क्या होगा आगे

फिलहाल दोनों कबीलों के बीच युद्धविराम या मध्यस्थता की कोई पुष्ट खबर नहीं है। इस क्षेत्र में संचार और पहुँच सीमित होने के कारण घायलों की सटीक संख्या और ताज़ा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल बनी हुई है। यदि तालिबान की मध्यस्थता विफल रही, तो दशकों पुराना यह संसाधन-आधारित विवाद और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या उनके पास भूमि स्वामित्व के ऐतिहासिक दावों को सुलझाने के लिए कोई विश्वसनीय न्यायिक तंत्र है। पाइन नट जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण की लड़ाई दर्शाती है कि आर्थिक हाशियाकरण और कमज़ोर शासन मिलकर किस तरह हिंसा को ईंधन देते हैं। जब तक भूमि विवादों का दीर्घकालिक और संस्थागत समाधान नहीं होता, ये झड़पें बार-बार लौटती रहेंगी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफगानिस्तान में खोस्त-पक्तिका कबीलाई विवाद क्या है?
यह खोस्त प्रांत के बोरी खेल और पक्तिका प्रांत के गियान खेल कबीलों के बीच एक पहाड़ी क्षेत्र के मालिकाना हक को लेकर दशकों पुराना विवाद है। इस पहाड़ पर पाइन नट के जंगल हैं, जो दोनों समुदायों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
यह झड़प कब से जारी है और अब तक क्या नुकसान हुआ है?
3 अगस्त 2026 को यह संघर्ष चौथे दिन में प्रवेश कर गया। रेडियो हुर्रियत के अनुसार, लगभग 80 वर्षों के इस व्यापक विवाद में 250 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं — हालाँकि यह आँकड़ा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।
तालिबान ने इस विवाद में क्या कदम उठाए हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान प्रशासन ने हालात बिगड़ने से रोकने और दोनों पक्षों को अलग करने के लिए इलाके में सुरक्षा बल तैनात किए हैं। हालाँकि किसी स्थायी युद्धविराम या मध्यस्थता की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
इस विवाद की असली वजह क्या है?
विवाद की जड़ें भूमि स्वामित्व के ऐतिहासिक दावों में हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, विवादित पहाड़ पर पाइन नट के जंगल, चराई की भूमि और अन्य प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनके नियंत्रण को लेकर दोनों कबीलों में कई पीढ़ियों से तनाव चला आ रहा है।
क्या इस संघर्ष में भारी हथियारों का इस्तेमाल हुआ है?
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों ने हल्के और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया। रेडियो हुर्रियत ने एक वीडियो जारी किया जिसमें कथित तौर पर मोर्टार दागा जा रहा है, लेकिन इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
राष्ट्र प्रेस
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