21 जुलाई 2026
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एंबुलेंस में खुफिया चैंबर बनाकर गांजा तस्करी: नोएडा पुलिस ने 64 किलो गांजा व वाहन किया बरामद

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एंबुलेंस में खुफिया चैंबर बनाकर गांजा तस्करी: नोएडा पुलिस ने 64 किलो गांजा व वाहन किया बरामद

सारांश

एंबुलेंस की आड़ में गांजा तस्करी — नोएडा पुलिस ने उस शातिर नेटवर्क का पर्दाफाश किया जिसमें मरीज की स्ट्रेचर के नीचे खुफिया चैंबर बनाकर ओडिशा से दिल्ली-एनसीआर तक 64 किलो गांजा पहुँचाया जाता था। आरोपी ने एंबुलेंस को इसलिए चुना क्योंकि चेकपॉइंट पर उसे रोका नहीं जाता।

मुख्य बातें

गौतमबुद्ध नगर पुलिस और नार्कोटिक्स सेल ने 21 जुलाई 2026 को झुंडपुरा बॉर्डर के पास संयुक्त कार्रवाई की।
मॉडिफाइड मारुति इको एंबुलेंस से 64 किलोग्राम गांजा बरामद; अनुमानित कीमत ₹13 लाख ।
आरोपी ओमवीर सिंह (उम्र लगभग 48 वर्ष ), निवासी आगरा, गिरफ्तार।
एंबुलेंस में मरीज-स्ट्रेचर के नीचे और सहयात्री सीट के नीचे खुफिया चैंबर बनाए गए थे।
आरोपी ओडिशा से गांजा लाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करता था; एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज।
पुलिस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और राज्यों में फैले सप्लायरों की जाँच कर रही है।

गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने 21 जुलाई 2026 को एक अंतर्राज्यीय गांजा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए ओमवीर सिंह नामक आरोपी को गिरफ्तार किया, जो एक मॉडिफाइड मारुति इको एंबुलेंस में 64 किलोग्राम गांजा छिपाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करता था। थाना फेस-1 पुलिस और नार्कोटिक्स सेल की संयुक्त कार्रवाई में यह गिरफ्तारी झुंडपुरा बॉर्डर के पास की गई। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब ₹13 लाख बताई जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। आरोपी की पहचान ओमवीर सिंह पुत्र श्याम लाल, निवासी ग्राम नागर, थाना अछनेरा, जनपद आगरा, उम्र लगभग 48 वर्ष, के रूप में हुई है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल बिना नंबर प्लेट की एंबुलेंस भी जब्त कर ली है।

एंबुलेंस में कैसे छिपाया जाता था गांजा

जाँच में सामने आया कि आरोपी ने एंबुलेंस को अत्यंत शातिराना तरीके से संशोधित किया था। जहाँ सामान्यतः मरीज को लिटाया जाता है, उसके नीचे एक खुफिया चैंबर बनाया गया था। इसके अलावा, तीमारदार की सीट के नीचे भी विशेष स्थान तैयार किया गया था, जहाँ बड़ी मात्रा में गांजा छिपाकर रखा जाता था। बाहर से देखने पर वाहन पूरी तरह एक सामान्य एंबुलेंस जैसा दिखता था।

तस्करी का तरीका और नेटवर्क

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह ओडिशा से विशेष किस्म का गांजा लाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करता था। एंबुलेंस का उपयोग इसलिए किया जाता था क्योंकि टोल प्लाजा और पुलिस चेकपॉइंट पर एंबुलेंस को प्राथमिकता दी जाती है और उसे प्रायः बिना जाँच के जाने दिया जाता है। आरोपी इसी छूट का फायदा उठाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक बड़ी मात्रा में गांजा पहुँचाता था।

दिल्ली पहुँचने के बाद गांजे को छोटे-छोटे पैकेटों में बाँटकर स्थानीय स्तर पर सप्लाई किया जाता था। इस अवैध कारोबार से अर्जित धन का उपयोग आरोपी अपनी विलासितापूर्ण जीवनशैली पर करता था, पुलिस ने बताया।

कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध थाना फेस-1 में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गौतमबुद्ध नगर पुलिस अब इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और यह भी जाँच की जा रही है कि इस गिरोह का संबंध किन राज्यों व स्थानीय सप्लायरों से था।

क्या होगा आगे

यह मामला दर्शाता है कि तस्कर अब आपातकालीन सेवाओं की आड़ में नशे की सप्लाई चेन चला रहे हैं — एक प्रवृत्ति जो कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है। पुलिस की जाँच जारी है और नेटवर्क के विस्तार का पूरा खाका सामने आना अभी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में सेंध है — क्योंकि यह उस भरोसे को तोड़ता है जो चेकपॉइंट पर इन वाहनों को मिलती है। यह पहली बार नहीं है जब देश में एंबुलेंस को तस्करी के लिए इस्तेमाल किया गया हो; यह एक उभरता हुआ पैटर्न है जो टोल और पुलिस चेकिंग प्रोटोकॉल में संरचनात्मक खामी को उजागर करता है। असली सवाल यह है कि क्या इस गिरफ्तारी के बाद एंबुलेंस की नियमित तकनीकी जाँच की कोई व्यवस्था बनेगी, या यह मामला भी महज एक 'बड़ी बरामदगी' की सुर्खी बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में एंबुलेंस से गांजा तस्करी का मामला क्या है?
21 जुलाई 2026 को गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने एक मॉडिफाइड मारुति इको एंबुलेंस से 64 किलोग्राम गांजा बरामद किया और आरोपी ओमवीर सिंह को झुंडपुरा बॉर्डर के पास गिरफ्तार किया। आरोपी ओडिशा से गांजा लाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करता था।
आरोपी ने एंबुलेंस में गांजा कैसे छिपाया था?
आरोपी ने एंबुलेंस में मरीज की स्ट्रेचर के नीचे और तीमारदार की सीट के नीचे खुफिया चैंबर बनवाए थे, जहाँ बड़ी मात्रा में गांजा रखा जाता था। बाहर से देखने पर वाहन पूरी तरह सामान्य एंबुलेंस जैसा दिखता था।
तस्करी के लिए एंबुलेंस का इस्तेमाल क्यों किया जाता था?
पुलिस पूछताछ के अनुसार, आरोपी ने एंबुलेंस इसलिए चुनी क्योंकि टोल प्लाजा और पुलिस चेकपॉइंट पर एंबुलेंस को प्राथमिकता दी जाती है और उसे प्रायः बिना जाँच के जाने दिया जाता है। इसी का फायदा उठाकर वह राज्यों के बीच बड़ी मात्रा में गांजा आसानी से पहुँचाता था।
बरामद गांजे की कीमत कितनी है और आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
बरामद 64 किलोग्राम गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब ₹13 लाख बताई जा रही है। आरोपी ओमवीर सिंह के विरुद्ध थाना फेस-1 में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
क्या इस तस्करी नेटवर्क में और लोग शामिल हैं?
गौतमबुद्ध नगर पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है और यह जाँच की जा रही है कि इस गिरोह का संबंध किन राज्यों व स्थानीय सप्लायरों से था। अभी तक केवल ओमवीर सिंह की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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