सूडान के साउथ कोर्डोफान में दो हमलों में 26 की मौत, SPLM-N पर सीजफायर तोड़ने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
सूडान के साउथ कोर्डोफान राज्य में 5 सितंबर 2026 को हुए दो अलग-अलग हमलों में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य घायल हो गए। स्वयंसेवी संगठन सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क के अनुसार, ये हमले सूडान पीपल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ (SPLM-N) की सेनाओं ने किए, जो पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) की सहयोगी मानी जाती है।
मुख्य घटनाक्रम
नेटवर्क के बयान के अनुसार, गुरुवार दोपहर SPLM-N की सेनाओं ने कौडा के दक्षिण और पश्चिम में स्थित डेबी और लुवैरी पर हमला किया। इस हमले में महिलाओं और बच्चों सहित 21 से अधिक लोग मारे गए और कई घायल हो गए। डेबी के एक ग्रामीण अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक वहाँ 20 से अधिक शव और 11 घायल लाए गए।
शुक्रवार तड़के एक दूसरी घटना में SPLM-N की गोलाबारी की चपेट में आने से डिलिंग शहर में एक बच्चे सहित 5 लोगों की जान चली गई और 7 से अधिक घायल हो गए। एक चश्मदीद के अनुसार, रिहायशी इलाकों में तोप के गोले गिरे। SPLM-N ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सीजफायर उल्लंघन का आरोप
सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने डेबी और लुवैरी पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अगस्त के अंत में हुए सीजफायर समझौते का उल्लंघन बताया। संगठन ने SPLM-N पर आम नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। मानवीय हालात बिगड़ने की आशंका से स्थानीय लोग इलाका छोड़कर पलायन करने लगे हैं।
SPLM-N और संघर्ष की पृष्ठभूमि
2011 में गठित SPLM-N, साउथ कोर्डोफान और ब्लू नाइल राज्य के कुछ हिस्सों पर अपना नियंत्रण रखती है। कोर्डोफान राज्यों में सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और RSF-SPLM-N गठबंधन के बीच लड़ाई अप्रैल 2023 से जारी है। अब अपने चौथे वर्ष में पहुँचे इस संघर्ष में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोग देश के भीतर और बाहर विस्थापित हो चुके हैं।
आम जनता पर असर
ताज़ा हमलों ने साउथ कोर्डोफान में पहले से ही गंभीर मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है और नागरिकों का पलायन जारी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय सूडान में स्थायी युद्धविराम के लिए प्रयासरत है।
क्या होगा आगे
इस हमले के बाद सीजफायर की भविष्य की संभावनाएँ और अनिश्चित हो गई हैं। मानवाधिकार संगठन और राहत एजेंसियाँ प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँच की माँग कर रही हैं। SPLM-N की चुप्पी और नागरिक हताहतों की संख्या इस संघर्ष की भयावहता को रेखांकित करती है।