अमेठी की 'शेर' एके-203 राइफल 100% स्वदेशी: अप्रैल 2027 तक 7,000 राइफलों की पहली खेप सेना को
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना के लिए अमेठी के मुंशीगंज स्थित आयुध निर्माण फैक्ट्री में तैयार हो रही एके-203 'शेर' राइफल ने स्वदेशीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया है — राइफल के 100 प्रतिशत कंपोनेंट अब भारत में निर्मित किए जा रहे हैं। मेजर जनरल सुधीश कुमार शर्मा के अनुसार, अप्रैल 2027 तक पूरी तरह स्वदेशी 7,000 राइफलों की पहली खेप भारतीय सेना को सौंपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
तीन वर्षों में 5% से 100% स्वदेशीकरण
2023 में जब अमेठी की फैक्ट्री में पहली एके-203 राइफल तैयार हुई, उस समय उसमें केवल 5 प्रतिशत भारतीय और 95 प्रतिशत रूसी कंपोनेंट थे। अगस्त 2023 से अगस्त 2026 के बीच महज तीन वर्षों में यह अनुपात पूरी तरह पलट गया है। अब राइफल के सभी 50 प्रमुख कंपोनेंट — और उनके भीतर के करीब 180 पुर्जे — भारत में बनाए जा रहे हैं। यह बदलाव भारत के रक्षा स्वदेशीकरण अभियान की सबसे तेज़ गति से हुई प्रगति में से एक माना जा रहा है।
अब तक 55,000 राइफलें सेना को, अगला पड़ाव ट्रायल
मेजर जनरल शर्मा ने बताया कि अब तक अलग-अलग स्तर के स्वदेशीकरण वाली करीब 55,000 एके-203 राइफलें भारतीय सेना को सौंपी जा चुकी हैं। अगला चरण यह है कि फैक्ट्री में शुरुआत में 10 पूरी तरह स्वदेशी राइफलें तैयार की जाएंगी, जिन्हें सितंबर 2026 के अंत तक परीक्षण के बाद सेना को यूजर ट्रायल के लिए सौंपा जाएगा। ट्रायल और उत्पादन की प्रक्रिया को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की योजना है, ताकि समय की बचत हो।
राइफल की तकनीकी विशेषताएँ
एके-203 गैस-ऑपरेटेड डिजाइन पर आधारित एक आधुनिक असॉल्ट राइफल है, जिसे सरल, भरोसेमंद और मज़बूत बताया गया है। मेजर जनरल शर्मा के अनुसार, इसमें करीब 50 प्रमुख कंपोनेंट हैं, और सभी छोटे-बड़े पुर्जों की कुल संख्या लगभग 180 है। राइफल का डिज़ाइन युद्धक्षेत्र की कठिन परिस्थितियों के अनुकूल है और भारतीय सेना की परिचालन ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
100 एमएसएमई का इकोसिस्टम, 2032 तक 6 लाख राइफलों की आपूर्ति
फैक्ट्री का ध्यान केवल राइफल निर्माण तक सीमित नहीं रहा — इसके साथ-साथ करीब 100 एमएसएमई को जोड़कर एक पूरा औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित किया गया है, जो अब काफी हद तक तैयार हो चुका है। अनुबंध के अनुसार भारतीय सेना को कुल 6 लाख से अधिक एके-203 राइफलों की आपूर्ति 2032 तक करनी है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर प्रति माह करीब 12,000 राइफलें तैयार करने की योजना है। कोशिश है कि अनुबंध की समयसीमा से कम से कम एक वर्ष पहले पूरी आपूर्ति पूरी कर ली जाए।
पृष्ठभूमि: रूस से तकनीक, भारत में उत्पादन
गौरतलब है कि 2019 में भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय ने भारत में एके-203 राइफल बनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए रूस से तकनीक हस्तांतरण की व्यवस्था की गई और संबंधित समझौतों के बाद इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) नामक कंपनी का गठन किया गया। तकनीक लाने और फैक्ट्री स्थापित करने में कई वर्ष लगे, लेकिन अब यह परियोजना अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँच चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा निर्यात और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों पर तेज़ी से काम कर रहा है।