उग्रम राइफल: द्विपा डिफेंस और एआरडीई ने सिर्फ 100 दिनों में बनाई स्वदेशी 7.62x51 मिमी युद्धक राइफल
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद की डिफेंस स्टार्टअप द्विपा डिफेंस और डीआरडीओ के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एआरडीई) ने संयुक्त रूप से उग्रम 7.62x51 मिमी युद्धक राइफल विकसित की है, जिसे केवल 100 दिनों में डिज़ाइन और तैयार किया गया। इस राइफल ने भारतीय सेना के जनरल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट (जीएसक्यूआर) ट्रायल और गृह मंत्रालय (एमएचए) के बोर्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पास कर लिए हैं। इसे देश के सबसे तेज़ स्वदेशी हथियार विकास कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है।
उग्रम राइफल की तकनीकी विशेषताएँ
द्विपा डिफेंस के अनुसार, उग्रम में एक आधुनिक गैस-ऑपरेटेड रोटेटिंग बोल्ट सिस्टम है। राइफल का वजन 4 किलोग्राम से कम है और इसकी प्रभावी रेंज 500 मीटर है। कंपनी के अनुसार, राइफल ने भरोसे और टिकाऊपन के कड़े परीक्षण पूरे किए हैं, जिनमें सभी मौसमों में फील्ड ट्रायल भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि यह राइफल 7.62x51 मिमी NATO कैलिबर में है, जो सीमावर्ती और अर्धसैनिक बलों की परिचालन आवश्यकताओं के अनुकूल मानी जाती है।
सरकारी ट्रायल और खरीद प्रक्रिया
द्विपा डिफेंस के मैनेजिंग डायरेक्टर सिबू जोसेफ के अनुसार, उग्रम ने आर्मी जीएसक्यूआर ट्रायल, सर्वमौसमी फील्ड परीक्षण और एमएचए बोर्ड ट्रायल — तीनों सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) — जिनमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और एनएसजी शामिल हैं — इसकी खरीद की प्रक्रिया में हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार छोटे हथियारों के आयात पर निर्भरता घटाने और 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
द्विपा डिफेंस: हैदराबाद से उभरता डिफेंस हब
2018 में स्थापित द्विपा डिफेंस को 2021 में मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस मिला था। तब से कंपनी ने तेलंगाना सरकार द्वारा आवंटित 13 एकड़ से अधिक भूमि पर हैदराबाद में एक पूर्ण उत्पादन सुविधा स्थापित की है। कंपनी अब तक 100 से अधिक स्वदेशी हथियार प्रणालियाँ और उनके विभिन्न संस्करण विकसित कर चुकी है।
कंपनी की उत्पाद श्रृंखला में यू-19 सब-मशीन गन, अल्ट्रा-लाइट मशीन गन (यूएलएमजी), यू-45 असॉल्ट राइफल और यू-39 प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसके अलावा, उग्रम आर्किटेक्चर पर आधारित एक एंटी-ड्रोन सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत और रणनीतिक महत्त्व
जोसेफ ने कहा, 'हम भारतीय सुरक्षा बलों के लिए भारत में वर्ल्ड-क्लास डिफेंस प्रोडक्ट बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।' द्विपा का मानना है कि उग्रम कार्यक्रम हैदराबाद को स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के केंद्र के रूप में स्थापित करने और छोटे हथियारों के लिए भारत की आयात निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
आगे देखें तो, यदि सीएपीएफ खरीद प्रक्रिया पूरी होती है, तो उग्रम भारत के किसी निजी डिफेंस स्टार्टअप द्वारा विकसित और बड़े पैमाने पर अपनाई गई पहली युद्धक राइफलों में से एक बन सकती है।