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सूरत की 'इनसाइड एफपीवी' ने 60 दिनों में भारतीय सेना को सौंपे 100 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन, डिफेंस सेक्टर में नया कीर्तिमान

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सूरत की 'इनसाइड एफपीवी' ने 60 दिनों में भारतीय सेना को सौंपे 100 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन, डिफेंस सेक्टर में नया कीर्तिमान

सारांश

सूरत की 'इनसाइड एफपीवी' ने 60 दिनों में 100 कामिकेज ड्रोन सेना को सौंपकर डिफेंस इकोसिस्टम में नया मानक स्थापित किया। 250 किमी/घंटे की रफ्तार और विदेशी उपकरणों से 100 गुना कम लागत — यह स्टार्टअप आत्मनिर्भर भारत के रक्षा सपने की ज़मीनी तस्वीर है।

मुख्य बातें

सूरत की डिफेंस टेक स्टार्टअप 'इनसाइड एफपीवी' ने 60 दिनों में 100 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन भारतीय सेना को सौंपे — डिफेंस इकोसिस्टम की अब तक की सबसे तेज़ डिलीवरी।
ड्रोन की रफ्तार 250 किमी/घंटे से अधिक; लागत विदेशी उपकरणों की तुलना में लगभग 100 गुना कम ।
सीईओ अर्थ चौधरी के अनुसार स्टार्टअप को केंद्र सरकार का समर्थन और गुजरात सरकार का अनुदान व निवेश प्राप्त है।
डिफेंस विशेषज्ञ टी.पी.
त्यागी ने इसे भविष्य के युद्धों के लिए अत्यंत कारगर बताया।
गुजरात की एसएसआईपी 2.0 नीति के तहत 400 से अधिक स्टार्टअप्स को ₹28 करोड़ की सहायता; इन स्टार्टअप्स का कुल बाज़ार मूल्य ₹3,569 करोड़ ।

गुजरात के सूरत स्थित डिफेंस टेक स्टार्टअप 'इनसाइड एफपीवी' ने भारतीय सेना के लिए मात्र 60 दिनों के भीतर 100 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन तैयार कर डिफेंस इकोसिस्टम में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इसे अब तक की सबसे तेज़ डिलीवरी माना जा रहा है और यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश की रक्षा क्षमताओं को घरेलू स्तर पर मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

क्या है यह कामिकेज ड्रोन

इनसाइड एफपीवी द्वारा निर्मित यह कामिकेज ड्रोन वन-टाइम यूज़ वाला हथियार है, जो 250 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। इसकी मारक क्षमता को अत्यंत घातक बताया जा रहा है। उल्लेखनीय यह भी है कि इस ड्रोन की लागत विदेशी समकक्ष उपकरणों की तुलना में लगभग 100 गुना कम है, जो इसे रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाती है।

डिफेंस विशेषज्ञ टी.पी. त्यागी ने कहा कि 'इनसाइड एफपीवी' आने वाले युद्धों में काफी कारगर साबित होगा। विशेषज्ञों ने भविष्य के युद्धों के संदर्भ में इस ड्रोन को अति महत्वपूर्ण बताया है।

स्टार्टअप को मिला सरकारी समर्थन

इनसाइड एफपीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्थ चौधरी ने बताया कि इस स्टार्टअप को केंद्र सरकार से भरपूर समर्थन मिला है। इसके अलावा गुजरात सरकार ने कंपनी को अनुदान (ग्रांट) दिया है और स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति के अंतर्गत कंपनी में निवेश भी किया है। चौधरी ने कहा कि 60 दिनों के भीतर 100 स्वदेशी कामिकेज ड्रोन तैयार करना उनके लिए बेहद गर्व और खुशी का विषय है।

गुजरात की स्टार्टअप नीति की भूमिका

इनसाइड एफपीवी की यह सफलता गुजरात सरकार की स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी (एसएसआईपी) की उपज है, जिसे 2017-18 में पाँच वर्षों के लिए लागू किया गया था। इस नीति की अभूतपूर्व सफलता के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में 2022 में एसएसआईपी 2.0 लॉन्च की गई, जो परंपरागत और नई पीढ़ी की तकनीक दोनों क्षेत्रों के स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करती है।

स्टार्टअप सृजन सीड सपोर्ट योजना के तहत अब तक 400 से अधिक स्टार्टअप्स को ₹28 करोड़ की सहायता प्रदान की जा चुकी है। आई-हब के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स ने राज्य में 4,000 से अधिक रोज़गार सृजित किए हैं और इन स्टार्टअप्स का कुल बाज़ार मूल्य लगभग ₹3,569 करोड़ तक पहुँच चुका है।

आत्मनिर्भर भारत के लिए क्या मायने रखती है यह उपलब्धि

सूरत का यह स्टार्टअप सिद्ध करता है कि भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में सक्षम है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ड्रोन युद्ध की प्रासंगिकता तेज़ी से बढ़ रही है और भारत अपनी रक्षा खरीद में स्वदेशीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में इस तरह के स्टार्टअप भारत के डिफेंस इकोसिस्टम की रीढ़ बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी अब शुरू होती है — क्षेत्र में प्रदर्शन, गुणवत्ता की निरंतरता और स्केल-अप की क्षमता। भारत के डिफेंस स्टार्टअप इकोसिस्टम में सरकारी अनुदान और निवेश से उभरे कई उद्यम प्रारंभिक डिलीवरी के बाद दीर्घकालिक आपूर्ति श्रृंखला बनाने में संघर्ष करते रहे हैं। विदेशी उपकरणों से 100 गुना कम लागत का दावा सत्यापन की माँग करता है — स्वतंत्र परीक्षण रिपोर्ट और सेना की परिचालन प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। आत्मनिर्भर भारत के लिए यह एक उत्साहजनक संकेत है, पर एक स्टार्टअप की एकल डिलीवरी को रणनीतिक आत्मनिर्भरता मानना अभी जल्दबाज़ी होगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इनसाइड एफपीवी का कामिकेज ड्रोन क्या है और यह कैसे काम करता है?
इनसाइड एफपीवी का कामिकेज ड्रोन एक वन-टाइम यूज़ स्वदेशी हथियार है, जो 250 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से लक्ष्य पर हमला करता है। इसे भारतीय सेना की ज़रूरतों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है और इसकी लागत विदेशी समकक्ष उपकरणों की तुलना में लगभग 100 गुना कम बताई जाती है।
60 दिनों में 100 ड्रोन की डिलीवरी क्यों ऐतिहासिक मानी जा रही है?
रिपोर्टों के अनुसार, डिफेंस इकोसिस्टम में इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में सैन्य ड्रोन की डिलीवरी अब तक का सबसे तेज़ रिकॉर्ड माना जा रहा है। यह उपलब्धि भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता को लेकर एक नया विश्वास जगाती है।
गुजरात सरकार ने इनसाइड एफपीवी को किस प्रकार सहयोग दिया?
गुजरात सरकार ने इनसाइड एफपीवी को अनुदान (ग्रांट) प्रदान किया है और स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति के तहत कंपनी में सीधा निवेश भी किया है। यह सहयोग मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में 2022 में लागू एसएसआईपी 2.0 नीति के अंतर्गत दिया गया है।
गुजरात की एसएसआईपी नीति क्या है और इसका क्या असर हुआ?
स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी (एसएसआईपी) गुजरात सरकार की 2017-18 में शुरू की गई योजना है, जिसका उद्देश्य युवाओं में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना है। इस नीति के तहत 400 से अधिक स्टार्टअप्स को ₹28 करोड़ की सहायता मिली है और इन स्टार्टअप्स का कुल बाज़ार मूल्य ₹3,569 करोड़ तक पहुँच गया है।
भारतीय सेना के लिए स्वदेशी कामिकेज ड्रोन क्यों ज़रूरी हैं?
वैश्विक स्तर पर ड्रोन युद्ध की बढ़ती प्रासंगिकता को देखते हुए भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों में स्वदेशीकरण को प्राथमिकता दे रहा है। डिफेंस विशेषज्ञों के अनुसार, कम लागत वाले स्वदेशी कामिकेज ड्रोन भविष्य के युद्धों में रणनीतिक बढ़त दे सकते हैं और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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