भारतीय वायु सेना का स्वदेशी कामिकेज ड्रोन प्रोजेक्ट: 16,000 फीट पर उड़ान, IPR रहेगा IAF के पास
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायु सेना (IAF) ने 16 जून 2026 को स्वदेशी लंबी दूरी के कामिकेज (वन-वे अटैक) ड्रोन विकसित करने की परियोजना आधिकारिक रूप से शुरू की है। इस परियोजना के तहत वायु सेना ने भारतीय कंपनियों के चयन के लिए सीमित टेंडर जारी किया है, जिसमें घरेलू उद्योग, स्टार्टअप्स और एमएसएमई की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इन ड्रोन का इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट (IPR) पूरी तरह भारतीय वायु सेना के पास रहेगा।
परियोजना की संरचना और नोडल एजेंसी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी तमिलनाडु के कोयंबटूर के निकट सुलूर में स्थित 5 बेस रिपेयर डिपो को सौंपी गई है, जिसे नोडल एजेंसी बनाया गया है। ड्रोन को पूर्णतः भारत में डिज़ाइन, विकसित और निर्मित किया जाएगा। परियोजना की संरचना इस प्रकार बनाई गई है कि आवश्यकता के अनुसार तेज़ अपग्रेड, बदलाव और अनुकूलन संभव हो सके।
कामिकेज ड्रोन को 'लोइटरिंग म्यूनिशन' या 'आत्मघाती ड्रोन' भी कहा जाता है। ये मानव रहित हवाई वाहन लक्ष्य क्षेत्र में पहुँचकर दुश्मन की पहचान करते हैं और टकराकर विस्फोट करते हैं — यानी ये एकल-उपयोग, एकदिशीय हथियार प्रणाली हैं।
तकनीकी क्षमताएँ
IAF के अनुसार, ये कामिकेज ड्रोन 16,000 फीट तक की ऊँचाई पर संचालित हो सकेंगे। ये दिन और रात दोनों परिस्थितियों में काम करने में सक्षम होंगे, जिससे इनकी सामरिक उपयोगिता उच्च-ऊँचाई वाले क्षेत्रों — विशेषकर हिमालयी सीमाओं — में भी सुनिश्चित होगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पाकिस्तान और चीन दोनों से लगी सीमाओं पर अपनी हवाई निगरानी और हमले की क्षमता को मजबूत करने में जुटा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का रुख
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव में कहा था कि भारत को ड्रोन निर्माण में वैश्विक केंद्र बनने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजराइल तनाव का हवाला देते हुए कहा था कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की भूमिका निर्णायक होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया था, 'ड्रोन के मोल्ड्स से लेकर सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी तक सब कुछ भारत में ही बनना चाहिए। यह आसान काम नहीं है, क्योंकि कई देशों में ड्रोन के महत्वपूर्ण हिस्से अभी भी चीन से आयात किए जाते हैं।'
iDEX और रक्षा नवाचार इकोसिस्टम की स्थिति
गौरतलब है कि फरवरी 2026 तक इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (iDEX) पहल के तहत 676 स्टार्टअप्स, एमएसएमई और इनोवेटर्स जुड़ चुके हैं और 548 अनुबंध हस्ताक्षरित हो चुके हैं। इनमें से 58 प्रोटोटाइप को खरीद के लिए मंजूरी मिली है, जिनकी अनुमानित लागत ₹3,853 करोड़ है। इसके अतिरिक्त 45 खरीद अनुबंध भी लगभग ₹2,326 करोड़ के हस्ताक्षरित हो चुके हैं।
यह कामिकेज ड्रोन परियोजना उसी व्यापक आत्मनिर्भर भारत रक्षा नीति का हिस्सा है जो पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से आकार ले रही है। आने वाले महीनों में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद विकास कार्य का पहला चरण प्रारंभ होने की संभावना है।