राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस: पोखरण से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक भारत की तकनीकी यात्रा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 11 मई। 11 मई 1998 को भारत ने राजस्थान के पोखरण में अपना सफल भूमिगत परमाणु परीक्षण 'ऑपरेशन शक्ति' संपन्न किया, जिसने विश्व की भू-राजनीतिक गतिविधियों को एक नई दिशा दी। उसी दिन, भारत के वैज्ञानिकों ने स्वदेशी विमान 'हंसा-3' की सफल उड़ान और 'त्रिशूल' मिसाइल का परीक्षण भी किया, जिससे परमाणु, विमानन और रक्षा क्षेत्रों में भारत की तकनीकी श्रेष्ठता स्पष्ट हुई। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी ऐतिहासिक उपलब्धि को सम्मानित करने के लिए 11 मई को 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस' घोषित किया।
तकनीक से जमीनी बदलाव
आज तकनीक भारत के विकास का मूल आधार बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान 'ई-चौपाल' प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी फसल के सटीक मूल्य और मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। 'स्टेम ऑन व्हील्स' जैसी पहलें गांवों में मोबाइल चिकित्सा क्लीनिक पहुंचा रही हैं, जहां ग्रामीण मरीज़ शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से वीडियो परामर्श ले सकते हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा 'पोषण ट्रैकर' ऐप का उपयोग बच्चों के कुपोषण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि भारत की तकनीकी क्रांति केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर समाज को रूपांतरित कर रही है।
विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा
फरवरी 2026 में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में 15 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और 70,000 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति भारत की तकनीकी नेतृत्व की स्थिति को प्रदर्शित करती है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल तकनीकी उपभोक्ता नहीं है, बल्कि वैश्विक तकनीकी दिशा निर्धारण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
वैज्ञानिक प्रतिभा और सरकारी समर्थन
भारत की तकनीकी प्रगति के पीछे अनगिनत वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स की निरंतर मेहनत है। भारत सरकार का 'प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड' (टीडीबी) इन प्रतिभाओं को पोषण और वित्तीय सहायता प्रदान करता है। प्रति वर्ष राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर टीडीबी 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी पुरस्कार' और 'राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार' से उन स्टार्टअप्स और एमएसएमई को सम्मानित करता है, जिन्होंने शोध को व्यावहारिक बाजार समाधान में परिणत किया है। 'रोटावैक' जैसी सस्ती स्वदेशी वैक्सीन निर्माता कंपनियों और शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाने वाली एडटेक स्टार्टअप्स इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
युवा पीढ़ी को इनोवेशन के लिए तैयार करना
सरकार इन उद्यमियों को लाखों-करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। साथ ही, दिल्ली विश्वविद्यालय से लेकर शारदा विश्वविद्यालय तक देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में 'हैकथॉन' और 'रोबो रेस' आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि नई पीढ़ी को तकनीकी नवाचार के लिए प्रेरित और तैयार किया जा सके।
भविष्य की दिशा
2026 के आगे की ओर देखते हुए, भारत 'डीप-टेक', 'क्वांटम मिशन' और अपना स्वयं का 'सेमीकंडक्टर हब' विकसित करने पर केंद्रित है। पेटेंट फाइलिंग में भारत विश्व के शीर्ष देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। 1998 में पोखरण परीक्षण से लेकर आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की यात्रा यह प्रदर्शित करती है कि भारत न केवल अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर सकता है, बल्कि विश्व को एक सुरक्षित और समावेशी भविष्य की ओर ले जाने में भी सक्षम है।