राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस: पोखरण से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक भारत की तकनीकी यात्रा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 10 मई। 11 मई 1998 की वह ऐतिहासिक सुबह जब भारत ने राजस्थान के पोखरण में अपना पहला सफल भूमिगत परमाणु परीक्षण 'ऑपरेशन शक्ति' संपन्न किया, उसी दिन देश के वैज्ञानिकों ने स्वदेशी विमान 'हंसा-3' को आसमान में उड़ाया और 'त्रिशूल' मिसाइल का सफल परीक्षण किया। एक ही दिन में परमाणु, विमान निर्माण और रक्षा प्रौद्योगिकी में भारत की क्षमता का प्रदर्शन करने वाली इस उपलब्धि को चिन्हित करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 11 मई को 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस' घोषित किया।
तकनीक की जमीनी सफलता
तीन दशक बाद आज भारत की तकनीकी क्रांति केवल प्रयोगशालाओं और परीक्षण केंद्रों तक सीमित नहीं रही। ग्रामीण इलाकों में 'ई-चौपाल' जैसी पहलों के माध्यम से किसान अपने स्मार्टफोन पर फसल के सही दाम और मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। 'स्टेम ऑन व्हील्स' कार्यक्रम के तहत मोबाइल क्लीनिक दूरदराज़ के गांवों तक पहुँच गए हैं, जहाँ मरीज़ शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से वीडियो परामर्श ले रहे हैं। आंगनवाड़ियों में कार्यरत महिलाएं 'पोषण ट्रैकर' ऐप का उपयोग करके बच्चों के पोषण स्तर की निगरानी कर रही हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की प्रासंगिकता
फरवरी 2026 में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में भारत की बदली हुई स्थिति स्पष्ट दिखाई दी। 15 से अधिक देशों के नेताओं और 70,000 से ज़्यादा प्रतिभागियों की उपस्थिति में आयोजित इस शिखर सम्मेलन ने प्रदर्शित किया कि भारत अब तकनीकी क्षेत्र में विश्व का अनुसरण नहीं करता, बल्कि दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
अदृश्य प्रतिभा की भूमिका
ये सफलताएँ गुमनाम वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स के दशकों के परिश्रम का परिणाम हैं, जो प्रयोगशालाओं में भारत का भविष्य रच रहे हैं। भारत सरकार का 'प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड' (टीडीबी) इन प्रतिभाओं को वित्तीय सहायता और संस्थागत समर्थन प्रदान करता है।
पुरस्कार और प्रोत्साहन
प्रतिवर्ष 11 मई को टीडीबी उन स्टार्टअप्स और एमएसएमई को 'राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी पुरस्कार' और 'राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार' से सम्मानित करता है, जिन्होंने अनुसंधान को व्यावहारिक बाज़ार समाधानों में रूपांतरित किया है। 'रोटावैक' जैसी सस्ती स्वदेशी वैक्सीन निर्माता कंपनियों से लेकर ग्रामीण शिक्षा को रूपांतरित करने वाले एडटेक स्टार्टअप्स तक, सरकार इन नवोद्भावकों को लाखों-करोड़ों की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
अगली पीढ़ी को तैयार करना
दिल्ली विश्वविद्यालय से लेकर शारदा विश्वविद्यालय तक, देश भर के संस्थानों में छात्रों के लिए 'हैकथॉन' और 'रोबो रेस' का आयोजन किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी को नवाचार के लिए तैयार किया जा सके। भारत पेटेंट दाखिल करने में विश्व के शीर्ष देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है।
आने वाले दशक की दिशा
2026 के बाद की ओर देखते हुए भारत का ध्यान 'डीप-टेक', 'क्वांटम मिशन' और अपना सेमीकंडक्टर हब स्थापित करने पर केंद्रित है। 11 मई 1998 में भारत ने विश्व को अपनी सैन्य शक्ति का संदेश दिया था; आज 2026 में यह एक सुरक्षित और समावेशी भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।